जोशी जी के जातिवाद के बाद अमेरिकी रंगभेद पर नज़र
August 26, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को नस्ली बताने वाले ग्लेन बेक के टेलीविजन शो से विज्ञापन कंपनियां किनारा कर रही हैं। जुलाई में न्यूज़ चैनल फॉक्स पर एक शो के दौरान ग्लेन बेक ने अमेरिका के पहले ब्लैक राष्ट्रपति बराक ओबामा को नस्ली करार दिया था। ग्लेन बेक ने कहा था – “ये शख़्स (ओबामा), मेरे हिसाब से नस्ली है”। ग्लेन ने यह भी कहा था कि ओबामा के दिल में “कहीं गहरे गोरे लोगों को प्रति नफ़रत भरी हुई है”।
ग्लेन ने फॉक्स पर एक शो के दौरान अपनी राय दी। उसके बाद मीडिया में काफी हंगामा मचा। फॉक्स ने अपनी सफाई दी। कहा कि उस शो में ग्लेन चैनल के प्रतिनिधि के तौर पर नहीं बल्कि एक जानकार के दौर पर आए थे और वो उनकी निजी राय है। इससे चैनल का कोई लेना-देना नहीं है। Read more
अमेरिका में निकलेगी “टीआरपी” की हवा!
August 17, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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टीआरपी का लफड़ा सिर्फ़ भारत में नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में है। हर जगह इस टीआरपी ने टेलीविजन चैनलों में काम करने वालों की ज़िंदगी में चरस बो दिया है। अमेरिका में तो मीडिया कंपनियां इतनी परेशान हैं कि उन्होंने टीआरपी मापने वाली कंपनी नील्सन मीडिया रिसर्च को चुनौती देने का मन बना लिया है। Read more
अमेरिकी पत्रकार रुक्साना रिहा
May 11, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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ईरान में गिरफ़्तार पत्रकार रुक्साना साबेरी को रिहा कर दिया गया है। ईरानी मूल की रुक्साना को अमेरिकी नागरिकता भी हासिल है। ईरान में उन्हें जासूसी के आरोप में अदालत ने आठ साल कैद की सज़ा सुनाई थी। लेकिन अब अपील कोर्ट ने सज़ा घटा कर दो साल कर दी है और उस पर अमल को पांच साल के लिए निलंबित कर दिया है। इस फैसले से अब रुक्साना अमेरिका लौट सकेंगी। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस फैसले का स्वागत किया है। Read more
अख़बारों को बेलआउट नहीं!
May 5, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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अमेरिका में डूब रहे अख़बारों को बेलआउट पैकेज नहीं मिलेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के करीबी अधिकारियों ने ये संकेत दिया है। अमेरिका का बड़ा अख़बार बोस्टन ग्लोब संकट में है। मैनेजमेंट उसे किसी भी वक़्त बंद कर सकता है। सिर्फ वही नहीं अमेरिका के कई अख़बार मंदी के इस दौर में बंदी की कगार पर हैं।
अमेरिका के अख़बारों को उम्मीद थी कि जिस तरह अमेरिका ने कई दूसरे क्षेत्रों की कंपनियों को बेलआउट पैकेज दिया है उसी तरह उन्हें भी बेलआउट पैकेज मिलेगा। लेकिन व्हाइट हाउस के प्रवक्ता रॉबर्ट गिब्स से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसे टाल दिया। उन्होंने ये कहा कि “अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा मानते हैं कि देश में प्रेस पूरी तरह स्वतंत्र होना चाहिये। मुझे लगता है कि जब आप शहरों और इलाकों में उनके अख़बारों को मरते हुए देखते हैं तो दुख होता है। ये यकीनन एक चिंता का विषय है। लेकिन मैं नहीं जानता कि इस मामले में सरकार क्या कर सकती है”।
मुश्किल में अख़बार, वेब का फैला जाल
May 2, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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अमेरिका में अख़बारों का सर्कुलेशन तेजी से घट रहा है। वहां अख़बारों की बिक्री में बीते साल की तुलना में इस साल करीब सात फीसदी गिरावट दर्ज की गई है। सर्कुलेशन ऑडिट ब्यूरो की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक टॉप 25 अख़बारों में एक को छोड़, सभी का सर्कुलेशन कम हुआ है।
इस सूची में सबसे ऊपर है द न्यूयॉर्क पोस्ट। उसके 20.6 फीसदी पाठकों ने साथ छोड़ दिया है। अगर सबसे अधिक बिकने वाले अख़बारों की बात करें तो यूएसए टुडे के पाठकों की संख्या में 7.5 फ़ीसदी कमी आई है। इसका सर्कुलेशन घट कर 21 लाख 13 हज़ार 725 हो गया है।
करीब 3.55 फीसदी पाठकों ने न्यूयॉर्क टाइम्स का साथ छोड़ दिया है। तो लॉस एजेल्स टाइम्स की बिक्री में 6.55 और वाशिंगटन पोस्ट की बिक्री में 1.16 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
इसके उलट न्यूजपेपर वेबसाइट इस्तेमाल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एक सर्वे के मुताबिक इस साल शुरुआती तीन महीनों में न्यूजपेपर वेबसाइट पढ़ने वालों की संख्या 10.5 फीसदी बढ़ी है। ये संकेत है कि आने वाला दौर वेबसाइट का है।
धीरे-धीरे गुलाम होता प्रेस
May 1, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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इस साल प्रेस की स्वतंत्रता पर और अंकुश लग गया है। सीधे शब्दों में कहें तो प्रेस पिछले साल की तुलना में इस साल ज्यादा गुलाम है। अमेरिकी संस्था फ्रीडम हाउस की तरफ से जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक इस साल दो और देशों में प्रेस की आज़ादी छिन गई है। Read more
मंदी के नाम पर बेशर्मी
April 10, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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पत्रकारों की छंटनी हर जगह हो रही है, लेकिन कुछ जगहों पर मैनेजमेंट ने सारी सीमाएं तोड़ दी हैं। ऐसी ही एक कंपनी है अमेरिका की बोस्टन ग्लोब। इसके मैनेजमेंट ने कर्मचारी संगठनों के सामने कुछ ख़तरनाक शर्तें रखी हैं। साथ ही कहा है कि अगर संगठनों ने इन शर्तों को पूरा नहीं किया तो या तो अख़बार बंद कर दिया जाएगा या फिर बेच दिया जाएगा।
बोस्टन ग्लोब की सबसे बड़े संगठन से एक करोड़ डॉलर जुटाने को कहा गया है। इसे जुटाने के लिए सुझाव देते हुए मैनेजमेंट ने कहा है कि कर्मचारी अपनी तनख्वाह में कटौती करें, रिटायरमेंट प्लान में कंपनी कंट्रिब्यूशन को खत्म करें और हेल्थ केयर प्लान में भी कंपनी की हिस्सेदारी कम करने की छूट दी जाए। इनके अलावा कर्मचारियों से अब कहीं ज्यादा देर तक काम करने को कहा जा रहा है। साथ ही कंपनी ने कर्मचारी संगठनों से ये छूट भी मांगी है कि वो जब चाहें कर्मचारियों की छंटनी कर सके… इनमें वो 430 कर्मचारी भी शामिल हैं जो स्थाई नौकरी पर हैं और करीब 18-19 साल से कंपनी की सेवा कर रहे हैं।
मैनेजमेंट ने कर्मचारी संगठनों से कहा है कि बोस्टन ग्लोब को पिछले साल 5 करोड़ डॉलर यानी करीब 250 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था और इस साल ये घाटा बढ़ कर 8.5 करोड़ डॉलर यानी 425 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मैनेजमेंट कंपनी की मजबूरी को समझ रहे हैं लेकिन उनका कहना है कि मैनेजमेंट की शर्तों को मान लेने के बाद उनके पास क्या रह जाएगा?
बोस्टन ग्लोब को न्यूयॉर्क टाइम्स ने 1993 में 1.1 अरब डॉलर में खरीदा था। बोस्टन ग्लोब ने कंपनी को एक दशक से भी ज्यादा वक्त तक भारी मुनाफा दिया। लेकिन बीते कुछ साल से उनकी आमदनी कम हुई है और दो साल से कंपनी लगातार घाटे में है।




