Exclusive: बेतुके आरक्षण से नक्सली बन रहे हैं आदिवासी
March 11, 2010 by आवेश तिवारी
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सोनभद्र। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच उत्तर प्रदेश का आदिवासी इलाका। जिस आरक्षण से देश के करोड़ों दलितों और आदिवासियों को उनके लोकतांत्रिक अधिकार मिले, आरक्षण की उसी नीति में खामियों की वजह से यह इलाका अब धीरे-धीरे नासूर बनता जा रहा है। ग्रामसभाओं से लेकर संसद तक चुनाव लड़ने के लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित आदिवासी अब माओवादी बन रहे हैं। “बैलेट नहीं तो बुलेट” का नारा बुलंद हो रहा है।
उत्तर प्रदेश के जिस जिले में सबसे अधिक आदिवासी हैं, विधानमंडल में वहां से एक भी आदिवासी प्रतिनिधि का नहीं होना काफी कुछ कहता है। यह बताता है कि आरक्षण के नाम पर हित साधने में जुटे हमारे हुक्मरान कितने दोमुंहे, मूर्ख और भ्रष्ट हो सकते हैं। यहां माहौल इतना ख़राब है कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में मौजूद खामियों को दूर करने की कोशिश से जातिगत तनाव बढ़ जाता है और हिंसा शुरू हो जाती है। Read more
इंदिरा गांधी के लहू का हर कतरा कुछ कहता है
November 1, 2009 by प्रभात शुंगलू
Filed under देश-दुनिया, ब्लॉग
कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं को रंगों से खासा लगाव है। जब किसी मेनस्ट्रीम से भटके गुट या आंदोलन को कुचलना होता है तो उसके खिलाफ सैन्य या अन्य कार्रवाई छेड़ देते हैं और उस ऑपरेशन को अमूमन किसी रंग से जोड़ कर नाम दे देते हैं। 1984 में इंदिरा गांधी ने सिख आतंकवाद के खिलाफ पंजाब में सैन्य कार्रवाई की तो उसे ऑपरेशन ब्लू स्टार नाम दिया। उसके बाद राजीव गांधी ने ऑपरेशन ब्लैक थंडर छेड़ा। और अब गृहमंत्री पी चिदंबरम ने नक्सली आंदोलन को कुचलने के लिये राज्य सरकारों के साथ मिलकर ‘रेड कॉरीडेर’ में ऑपरेशन ग्रीन हंट छेड़ दिया है। इंदिरा गांधी की 25वीं पुण्यतिथि के साल में कांग्रेसी नेता अपनी स्वर्गीय नेता को इससे सुंदर पुष्पांजलि और कैसे दे सकते थे?
इंदिरा गांधी यदि ज़िंदा होतीं और प्रधानमंत्री बनी रहतीं तो पता नहीं वो कैसे टैकेल करती नकसली समस्या को? क्या वो इस समस्या का वैसे ही संकीर्ण राजनीति का चश्मा पहन कर हल निकालने की कोशिश करती जैसा उन्होंने पंजाब के आतंकवाद से जूझने में किया। या फिर इमरजेंसी लगा कर विपक्षी नेताओं की धर पकड़ कर और उन्हें जेल में ठूंस कर किया ताकि उनकी सरकार पर आवाम के जायज गुस्से को कुचला जा सके। क्या इंदिरा गांधी नक्सली समस्या को उस समझदारी और कुशलता से हल करने की कोशिश करतीं, जैसा उन्होंने मुक्ति बाहिनी को समर्थन देकर और बांग्लादेश बनवा कर किया था? आज इंदिरा गांधी तो नहीं रहीं। मगर उनकी भरी-पूरी विरासत जरूर है। आज सोनिया गांधी हैं, राहुल गांधी हैं और गांधी परिवार के आशीर्वाद पर चलती मनमोहन सरकार और उसके गृहमंत्री चिदंबरम हैं। इसलिये रंगों कि विरासत को ध्यान में रखते हुये चिदंबरम साहब ने ऑपरेशन ग्रीन हंट छेड़ा हुया है। Read more




