“द हिंदू” ने मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के झूठ से पर्दा उठाया

November 30, 2009 by जनतंत्र डेस्क  
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सियासत में झूठ और ग़लतबयानी भी एक बहुत बड़ा हथियार है। ताज़ा मामला महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण से जुड़ा है। द हिंदू ने आज अपनी एक ख़बर में उनके झूठ से पर्दा उठाया है। द हिंदू के मुताबिक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने दावा किया है कि उन्होंने अख़बारों में विज्ञापन पर सिर्फ 5379 रुपये खर्च किए हैं और केबल टीवी पर विज्ञापनों में सिर्फ 6000 रुपये। लेकिन यह सही नहीं है।

द हिंदू के मुताबिक राज्य के कई छोटे-बड़े अख़बारों में अशोक चव्हाण के 47 फुल पेज विज्ञापन छपे हैं। वो भी रंगीन। इनमें उनका, उनकी सरकार और पार्टी का गुणगान किया गया है। जबकि उन्हें विज्ञापनों के तौर पर प्रदर्शित नहीं किया गया। उन सभी विज्ञापनों को ख़बरों की शक्ल में छापा गया। यह एक किस्म का अपराध है और लोकसभा चुनावों के दौरान भी सभी अख़बारों और नेताओं ने मिल कर ख़बरों का यह काला धंधा किया था। इस बारे में प्रेस काउंसिल में शिकायत भी की गई थी। ताजा मामला भी उसी दायरे में आता है। Read more

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द हिंदू की “चीन” नीति

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बुधवार को द हिंदू की सबसे बड़ी ख़बर दलाई लामा पर चीन का एक आरोप है। ख़बर के मुताबिक चीन ने कहा है कि दलाई लामा की वजह से भारत से उसके संबंधों पर असर पड़ रहा है। चीन ने यह भी कहा है कि भारत से सटे पूर्वोत्तर इलाकों को लेकर उसका रुख पहले की तरह है और वो दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा का विरोध करता है।

यह ख़बर अंग्रेजी के किसी दूसरे अख़बार में पहली ख़बर के तौर पर नहीं छापी गई है। लेकिन द हिंदू में भारत और तिब्बत को लेकर अगर चीन ने कुछ कहा है तो उसे प्राथमिकता से जगह दी जाती है। वह भी चीनी नज़रिए के साथ। चार नवंबर के दिल्ली संस्करण में पेज नंबर 12 पर एक और ख़बर छपी है कि वीजा नियमों को लेकर चीन ने भारत से अपनी चिंता जताई है। वह ख़बर भी ऐसे छापी गई है जैसे भारत को हर हाल में चीन की इस चिंता को दूर कर देना चाहिए। Read more

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छह से सात रुपये में बिकेंगे अख़बार!

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अगले दो से तीन साल के भीतर अख़बारों की कीमत छह से सात रुपये हो सकती है। दिल्ली में दो दिन पहले साउथ एशिया न्यूज़ पेपर कॉन्फ्रेंस हुई। जिसमें न्यूज़पेपर इंडस्ट्री के दिग्गजों ने हिस्सा लिया इस कॉन्फ्रेंस में द हिंदू के प्रबंध निदेशक एन मुरली ने कहा कि अख़बारों की लागत को कम करने के लिए दाम बढ़ाने की ज़रूरत है। उनके मुताबिक अब तक प्रिंट मीडिया का विज्ञापन रेवेन्यू बीस फीसदी प्रति वर्ष की रफ़्तार से बढ़ रहा था। लेकिन अब बढ़ोतरी की रफ़्तार दस फीसदी से कम रहने का अनुमान है। ऐसे में अख़बारों की लागत को कम करने के उपायों पर गौर करना होगा। Read more

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