स्वाइन फ्लू पर सरकार और संपादकों की बैठक
August 18, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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न्यूज़ चैनलों और अख़बारों के संपादकों के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद और सूचना एंव प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने बैठक की। बैठक में सरकार ने स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदमों का ब्योरा दिया। साथ ही ये भी बताया कि इस बीमारी से लड़ने के लिए नए दिशानिर्देश अगले एक-दो दिन में जारी कर दिए जाएंगे। Read more
हिंदुस्तान और नई दुनिया का “सरकार राग”
August 15, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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उधार - टीओआई
अपराधी सरकार, आरोपी मीडिया
स्वाइन फ्लू पर सरकार ने न्यूज़ चैनलों को हिदायत दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा है कि मीडिया संस्थान डर नहीं फैलाएं। सरकार ने कहा है कि हालात काबू में हैं। अब तक … “सिर्फ़ 24 लोग मारे गए हैं। ज़्यादातर पुणे से। घबराने की बात नहीं। मीडिया भी लोगों को डराए नहीं।”
ठीक ही है मीडिया को किसी भी सूरत में लोगों को डराना नहीं चाहिए। स्वाइन फ्लू हो या फिर कोई और मुद्दा। लोगों को डराने से बात नहीं बनती बल्कि उन्हें जागरूक बनाना चाहिए ताकि सामने खड़ी चुनौती का सामना किया जा सके। लेकिन यहां तो डर का माहौल अकेले मीडिया नहीं बना रहा। खुद सरकार और उसके मंत्री भी लोगों को डराने में जुटे हैं। Read more
स्वाइन फ्लू से कैसे करें बचाव?
August 12, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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आखिर क्या है स्वाइन फ्लू?
स्वाइन का हिंदी मतलब है सूअर। स्वाइन प्लू सूअर से फैलने वाली बीमारी है। इसमें सर्दी-जुकाम होता है और तेज बुखार भी। ये बीमारी बहुत तेजी से फैलती है। इसका वायरस हवा में तैरता है और इंसान से इंसान में फैलता चला जाता है। इस बार स्वाइन फ्लू नए इन्फ्लुएंजा वायरस ए/एच1एन1 से फैल रहा है। इसका पहला केस 17 मार्च 2009 को मैक्सिको में सामने आया था। उसके बाद इसने अमेरिका में पैर पसारे। 17 अप्रैल 2009 को अमेरिका के दक्षिणी कैलिफोर्निया में दो बच्चे इसकी चपेट में आए। उनमें से कोई भी किसी जानवर के संपर्क में नहीं आया था। 17 मार्च से 25 अप्रैल के भीतर मैक्सिको और अमेरिका के कई इलाकों में इस वायरस ने लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। Read more
स्वाइन फ्लू से सरकार के बचाव में जुटा “हिंदुस्तान”
August 12, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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हिंदुस्तान में हर रोज फ्रंट पेज पर दो टूक छपता है। पहले पन्ने पर संपादकीय देने का ये तरीका हिंदुस्तान ने शुरू किया है। कई बार उसमें बहुत ही बेतुकी बातें लिखी होती हैं। बिना सिर पैर की बातें। उनका सिर्फ़ एक ही मक़सद होता है कि किसी भी तरह से सरकार का बचाव किया जाए। मेट्रो हादसा हो, एनसीआर में बढ़ते अपराध हों या फिर कोई ऐसा मामला जिसमें सरकार घिरती नज़र आती है तो दो टूक में उसका समर्थन किया जाता है।
अभी स्वाइन फ्लू पर सरकार घिरी है। स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद बेतुके बयानों से उसकी फजीहत हो रही है। हिंदुस्तान को भी चाहिए कि उसके लिए सरकार को आड़े हाथों ले, लेकिन हिंदुस्तान में जनहित की पत्रकारिता को ताक पर रख कर सरकार का बचाव किया जा रहा है। आगे बढ़ने से पहले आप दो दिन के दो टूक पढ़िए। Read more




