एम एफ़ हुसैन नाम का एक भारतीय नागरिक
February 27, 2010 by शिवप्रसाद जोशी
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भारतवर्ष के सबसे बड़े चित्रकार मक़बूल फ़िदा हुसैन अब खाड़ी देश क़तर के नागरिक होंगें. उन्हें क़तर की नागरिकता की पेशकश की गई है. चूंकि भारत में दोहरी नागरिकता का प्रावधान नहीं है लिहाज़ा अब हुसैन शायद आने वाले दिनों में ओवरसीज़ इंडियन सिटीज़न के रूप में अपना नामांकन चाहें तो करा लें वरना वो अब तो शायद क़तर के नागरिक होंगे ही.
2010 की शुरूआत में कला संस्कृति की भारतीय परंपरा के लिए ये एक सदमे वाली स्थिति है. द हिंदू अख़बार में हुसैन के भेजे एक संदेश से हुसैन के प्रशंसक और कला प्रेमी और संस्कृतिकर्मी स्तब्ध हैं कि भारत देश ने अपने एक सपूत को इस तरह गंवा दिया. ये एक अजीब संयोग है कि जब देश क्रिकेट के महान सितारे सचिन तेंदुलकर के वनडे में 200 रन का अभूतपूर्व जश्न मना रहा था तो उधर देश से बाहर अघोषित किस्म के निर्वसन में रह रहा देश का सबसे बड़ा पेंटर देश लौटने की एक विकराल छटपटाहट से जूझता हुआ एक दूसरे देश का नागरिक बनने का अनचाहा गौरव हासिल कर रहा था. Read more
कविता का रामदास और पुणे का सतीश शेट्टी
January 19, 2010 by शिवप्रसाद जोशी
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भारत के समकालीन लोकतंत्र की ख़ूबियों और उसमें आ रही गिरावटों को कविता में सबसे मुखर सबसे तीखे और सबसे उदास ढंग से दर्ज करने वाले थे हिंदी के वरिष्ठ कवि रघुबीर सहाय जिन्हें नागरिक लोकतांत्रिक मूल्यों की हिफ़ाज़त का पहरुआ कवि भी माना जाता है. उनकी एक चर्चित कविता है रामदास जिसे आशंका हो गई है कि एक दिन उसकी हत्या होगी. वो घर से निकलता है, उधेड़बुन, असमंजस और आधे भय आधे साहस और किंचित उदासी के साथ,
रामदास उस दिन उदास था, अंत समय आ गया पास था, उसे पता था आज उसकी हत्या होगी.
कविता का नागरिक रामदास अपनी हत्या की पक्की ख़बर को जानता हुआ जिस तरह चौड़ी सड़क और पतली गली से गुज़रता हुआ जा रहा था कुछ कुछ उसी तरह 21वीं सदी के हिंदुस्तान के एक शहर की एक सड़क पर सुबह की सैर पर निकला था सतीश शेट्टी. जिसकी उम्र 38 साल थी और उसे पता था कि उसकी हत्या हो सकती है. और उसने बताते हैं कि पुलिस को इस बारे में बताया भी था. उसे पता था कि भू दलालों के जिस दुष्चक्र को तोड़ने के लिए वो सूचना के अधिकार के औजारों से लड़ाई में कूदा है वो उसे फंसा कर गिरा भी सकता है. लेकिन इस आशंका और चिंता के बावजूद सतीश सैर पर निकला था. खुली हवा से अपने फेफड़ो को सक्रिय करने और अपने ख़ून को और तपिश से भरने और अपने इरादों को और तरोताज़ा और इस्पाती बनाने के लिए. Read more




