संस्कृति के रक्षकों कहो- किसकी रोटी में किसका लहू है?

भारतीय संस्कृति अक्सर खतरे में पड़ जाती है। और फिर उसे बचाने के लिए बहुत से लोग कमर कसने लगते हैं। लेकिन संस्कृति है कि फिर से खतरे में पड़ जाती है….अपनी इस महान संस्कृति को कभी सविता भाभी खतरे में डाल देती हैं, तो कभी सच का सामना इसे तार-तार करने पर उतारू हो जाता है। कभी सहमत की प्रदर्शनी इसकी दुश्मन बन जाती है, तो कभी मक़बूल फ़िदा हुसैन की पेंटिंग इस पर कालिख पोतने लगती है। भारतीय संस्कृति के रक्षकों को बड़ा गुस्सा आता है। वो सबकुछ बर्दाश्त कर सकते हैं, लेकिन संस्कृति पर हमला? इसे तो हरगिज़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सबका गुस्सा देख कई बार मुझे भी लगता है, इतने समझदार लोग गुस्सा कर रहे हैं, ज़रूर कोई वाज़िब बात होगी। आखिर हम भारतवासी हैं, भारतीय संस्कृति पर हमला कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं? सोचता हूं मुझे भी संस्कृति की रक्षा में जुटे लोगों का साथ देना चाहिए।
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सोच-समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला

अविनाश ने जो बातें कही हैं , उनमें बहुत दम है। और इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि “अश्लीलता कोई राजनीतिक या सामाजिक (या यहां तक कि निजी) विचारधारा नहीं है। यह हमारी सभ्‍यता की वो सरहद है, जहां कब दीवार खड़ी कर दी गयी, हमें पता ही नहीं चला”। लेकिन अश्लीलता परिभाषित नहीं की जा सके – ऐसा भी नहीं है। इसकी परिभाषा है। ये परिभाषा बहुत हद तक सब्जेक्टिव है। मतलब हमारे समाज में जो अश्लील है, यूरोप के लिए वो श्लील हो सकती है। यूरोप के अलग-अलग देशों में भी ये परिभाषा बदल सकती है। ये भी मुमकिन है कि यूरोप में जो अश्लील मानी जाए जापान में उसे लोग यूं ही नज़रअंदाज कर दें। हर देश के कानून में वहां के सामाजिक परिदृष्य को रख कर अश्लीलता की परिभाषा गढ़ी गई है। Read more

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खजुराहो क्‍या हमारे पर्यटन उद्योग का अश्‍लील पैकेज है?

जनतंत्र पर साथी कबीर ने दो दिन पहले एक लेख लिखानवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की वेबसाइट पर ख़बरों के रूप में अश्लील साहित्य परोसने का आरोप लगाते हुए कबीर ने सविता भाभी की तरह उन पर प्रतिबंध लगाने का मांग की। आज वरिष्ठ पत्रकार अविनाश ने कबीर के लेख का जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि ये मांग बेतुकी है। साइबर स्पेस में हर किसी का अपना कोना है। दूसरे का कोना छेकने का हक़ किसी को नहीं होना चाहिए। कानून को भी नहीं। आप उनका लेख पढ़िए और उतनी ही बेबाकी से अपनी राय रखिए जितनी बेबाकी से अविनाश ने लिखा है।

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“सविता भाभी” की तरह इन पर भी लगे प्रतिबंध

सविता भाभी। जी हां… हाल ही में सविता भाभी पर प्रतिबंध लगा दिया गया। ये एक पोर्न कार्टून साइट है, जिसके चरित्र का नाम है सविता भाभी। कुछ ही दिन में ये वेबसाइट भारत में काफी लोकप्रिय हो गई थी। इतनी कि दुनिया के सबसे अधिक “नैतिक राष्ट्र” में नैतिकता का सवाल उठ खड़ा हुआ। इंटरनेट पर ऐसी हज़ारों पोर्न वेबसाइट भारत में धड़ल्ले से खुलती हैं। साइबर कैफे में लोग घंटों ऐसी वेबसाइटों पर चिपके रहते हैं। लेकिन नैतिकता का सवाल सिर्फ़ और सिर्फ़ सविता भाभी नाम की साइट पर उठा। सरकार भी तुरंत हरकत में आई और उसने इस पर प्रतिबंध लगा दिया। अब ये साइट भारत में नहीं खुलती है। Read more

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