चचा-भतीजा में होड़ है – बड़ा गुंडा कौन है

शिव सैनिक जब आईबीएन 7 और आईबीएन लोकमत के विक्रोली ऑफिस में तोड़-फोड़ कर रहे थे तो बस एक ही बात चिल्ला चिल्ला कर बोल रहे थे – बालासाहेब के खिलाफ कुछ कहा तो बर्दाश्त नहीं करेंगे। पिछले चार दशकों से बालासाहेब और उनके गुंडों की फौज मुंबई की जनता से जब तब कुछ ऐसे आती रही है। कभी मराठी संस्कृति के नाम, कभी मराठी-गैर मराठी विवाद खड़ा करके शिवसेना के गुंडों ने मुंबई को रैन्सम पर रखा हुया है। मासूम लोगों के साथ मारपीट करते हैं। मीडिया ऑफिस में तोड़फोड़ करके अपनी नपुंसकता का नंगा नाच दिखाते है। संस्कृति की रक्षा का ख्याल इतना कि आबीएन की महिला कर्मचारियों के साथ भी बदसलूकी की। अपनी भड़ास निकालने का ये गुर वो बरसों से अपने अराध्य देव बालासाहेब ठाकरे से सीखते आये हैं। इसलिये उनके अराध्य देव पर किसी ने अंगुली भी उठायी, मुखालफत की, लिखा या कहा तो वो उसे वो दंडित जरूर करते हैं। हमले के बाद अराध्यव देव के परम भक्त संजय राउत ने किसी आतंकी संगठन के तर्ज पर टीवी चैनलों पर आईबीएन पर हमले की जिम्मेदारी भी ली। उनके अराध्य देव जरूर खुश हुए होंगे। Read more

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नरेंद्र मोदी और राज ठाकरे से कम नहीं हैं शीला दीक्षित

November 19, 2009 by अरविंद शेष  
Filed under पहरेदार

राज ठाकरे और उनके गुर्गों के बर्ताव और पागलपन से बहुत सारे लोगों को दुख हो रहा होगा। लेकिन क्या कभी इस ओर भी ध्यान गया है कि लोकतंत्र की चादर ओढ़े कांग्रेसी सरकार दिल्ली को क्या बनाने की योजना पर काम कर रही है?  राज ठाकरे की उछल-कूद महज तात्कालिक ज्वार है, जिससे अगर ‘स्टेट’ नहीं निपट सका तो ‘जनता’ निपट लेगी। लेकिन दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार जिस रणनीति पर काम कर रही है, वह राज ठाकरे टाइप राजनीति नहीं है, जो सामने से दिख जाए। असर के स्तर पर वही होगा, जो राज ठाकरे टाइप राजनीति का मकसद है। बल्कि और भी स्थायी नतीजों के साथ होगा। और बुरा भी नहीं लगेगा। बुरा या अच्छा लगना सिर्फ उनका मायने रखता है, जो ‘सभ्य’ और ‘संभ्रांत’ हैं। Read more

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राज की जीत में मुंबई की हार है

महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे देखकर राज ठाकरे बहुत खुश होंगे। एक तो यूं कि चचा को बता दिया कि उनका असली राजनीतिक उत्तराधिकारी उनका बेटा ऊद्धव नहीं बल्कि वो खुद हैं। दूसरा ये कि एमएनएस के गुंडों ने उत्तर भारतीय के खिलाफ मुंबई में जो हिंसा की थी उसको राज ठाकरे अब नतीजों के आइने में निहारेंगे और अपनी पीठ ठोंक कर मराठी में कुछ यूं कहेंगे – मिनी जे काय केलाय, बरोबर केलाय..(जो मैने किया सही किया)।

मुंबई इस बार वाकई बंटी नजर आयी। राज ठाकरे की एमएनएस मुंबई की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी। लेकिन राज ठाकरे की बदौलत इस बार उत्तर भारतीय वोटरों ने भी वोट पोलराइज कर दिया। मुंबई की दस सीटों पर उत्तर भारतीय उम्मीदवार ही जीते, यानी एमएनएस के डर से मराठी और गैर मराठी वोटरों ने अपने-अपने तबके के लोगों को ही जिताया। कम से कम भूमिपुत्र और ‘मुंबई मराठियों की’ का नारा देकर जो चचा ने चार दशक पहले बीज बोये उसी फसल की दोबारा रोपाई आज राज ठाकरे कर रहे हैं। ये बात अलग है कि आज चचा उनके साथ नहीं। क्योंकि भतीजे ने उन्हें भी आइना दिखा दिया है। Read more

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अंग्रेजी सवाल, मराठी जवाब- टाइम्स नाउ का कमाल

टाइम्स नाउ का जवाब नहीं। यह अंग्रेजी का सबसे लोकप्रिय न्यूज़ चैनल हैं। आक्रामक और नए-नए प्रयोग करने वाला न्यूज़ चैनल। लेकिन शनिवार को एक ऐसा प्रयोग देखने को मिला जिसने बहुतों को चौंका दिया। टाइम्स नाउ पर राज ठाकरे का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिखाया गया और उसे यह कह कर बेचा गया कि किसी राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल पर राज ठाकरे का पहला इंटरव्यू। वो भी आधे घंटे का इंटरव्यू। चैनल के संपादक के कार्यक्रम “फ्रैंकली स्पीकिंग विद अर्णब” में। लेकिन यह इंटरव्यू कम एक नौटंकी ज़्यादा थी। इसमें अर्णब गोस्वामी के अंग्रेजी सवालों का राज ठाकरे ने मराठी में जवाब दिया। शायद तभी पूरे इंटरव्यू के दौरान अर्णब अपनी लय में नज़र नहीं आए।

आमतौर पर टेलीविजन स्क्रीन पर कूद-कूद कर सवाल पूछ कर मेहमानों पर हावी हो जाने वाले अर्णब पूरे इंटरव्यू के दौरान जरूरत से ज़्यादा मर्यादित नज़र आए। लगता है कि हर जवाब के बाद बगल में बैठा कोई शख़्स अनुवादित करते उन्हें समझाता होगा और फिर वो अगला सवाल दागते होंगे। या फिर सवाल और जवाब पहले से ही तय किए गए होंगे। Read more

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