कट्टरपंथी हुसैन के जाने से देश पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा
March 2, 2010 by Samrendra
Filed under स्पेशल रिपोर्ट
धर्म इस देश में हमेशा से संवेदनशील मसला रहा है। धर्म के नाम पर विभाजन पहले ही हो चुका है। दंगों से धरती बार-बार लाल हुई है। कई धर्म और पंथ वाले इस राष्ट्र में अभिव्यक्ति की आज़ादी की एक सीमा है। हर संवेदशनशील शख़्स को उस सीमा का ख्याल रखना चाहिए। अगर कहीं चूक हो जाए तो इतना तत्पर रहना चाहिए कि यह कह सके कि “मेरी मंशा ठेस पहुंचाने की नहीं थी। अगर किसी को ठेस पहुंची तो उसके लिए वो माफ करे।” लेकिन क्या अभिव्यक्ति की आज़ादी की मांग करने वाले हमेशा उस लक्ष्मण रेखा का पालन करते हैं? और चूक होने पर क्या माफी मांगने का साहस दिखाते हैं? ये कुछ बड़े सवाल हैं। खासकर उस संदर्भ में तो ज़रूर जिस संदर्भ में एम एफ हुसैन को खुदा बनाने की कोशिश की जा रही है। Read more




