प्रेस क्लब में पुष्पेंद्र-परवेज पर तानाशाही का आरोप

February 27, 2010 by जनतंत्र डेस्क  
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प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और अध्यक्ष परवेज अहमद फिर विवादों के घेरे में हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने क्लब की मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य नरेंद्र भल्ला को जबरन उनके अधिकारों से वंचित कर दिया और कमेटी की बैठकों में आने से रोका। यही नहीं उन दोनों पर कई गैरकानूनी गतिविधियों का आरोप भी लगा है।

जनतंत्र के पास मौजूद दस्तावेज के मुताबिक प्रेस क्लब चुनाव में नरेंद्र भल्ला और ललित मोहन जोशी को 216-216 वोट मिले। मुकाबला टाई होने पर चुनाव अधिकारी ने दोनों को जीता हुआ घोषित किया। उसके बाद पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और उनकी टीम ने ललित मोहन जोशी को तमाम बैठकों में आने का न्योता दिया। लेकिन नरेंद्र भल्ला को इसकी जानकारी नहीं दी गई। इतना ही नहीं, सदस्यों को मैनेजमेंट कमेटी के बारे में भेजी गई चिट्ठी से भी नरेंद्र भल्ला का नाम काट दिया गया। Read more

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पुष्पेंद्र-परवेज की जोड़ी फिर जीती

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प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और परवेज अहमद की जोड़ी ने एक बार फिर विरोधियों को मात दे दी है। पुष्पेंद्र ने सेक्रेटरी जनरल के पद पर नदीम अहमद काजमी को हराया। जबकि परवेज ने अध्यक्ष पद पर आठ वोटों से अरुण केसरी को शिकस्त दी। इनके अलावा उपाध्यक्ष पद पर पुष्पेंद्र के पैनल से रीतू वर्मा ने जीत दर्ज की है। जबकि नदीम अहमद काजमी के पैनल से विजय सलूजा को जीत मिली है। ट्रैजरार का पद भी पुष्पेंद्र के पैनल के खाते में गया है। जयंत भट्टाचार्य ट्रैजरार बने हैं। बीते साल यह पद नदीम के पास था। इनके अलावा सतरह सदस्यीय मैनेजिंग कमेटी में दस पुष्पेंद्र की टीम से तो सात विपक्ष के हैं। Read more

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प्रेस क्लब से पुष्पेंद्र की विदाई, बालाचंद्रन को कमान

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की मैनेजमेंट कमेटी भंग कर दी गई है। शनिवार को ईजीएम में दो सौ से ज़्यादा सदस्यों ने सेक्रेटरी जनरल पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और अध्यक्ष परवेज अहमद के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित कर दिया। इस प्रस्ताव के मुताबिक मौजूदा कमेटी को तत्काल प्रभाव से भंग करते हुए चुनाव तक पी पी बालाचंद्रन की अगुवाई में सात सदस्यों की अंतरिम कमेटी का गठन कर दिया गया है।

प्रेस क्लब में अगले एक-दो महीने में चुनाव होने हैं। लेकिन उससे पहले ही क्लब के सेक्रेटरी जनरल पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ पर घोटाले के आरोप लग गए। उन आरोपों के बाद आपात ईजीएम बुलाई गई। उस ईजीएम में क्लब के ट्रेजरार नदीम अहमद काजमी ने आरोप पत्र पढ़ा। उन्होंने बताया कि पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने मैनेजमेंट कमेटी की मंजूरी के बगैर बैंक में एक गोपनीय खाता खुलवाया और उस खाते से लेन-देन किया। इसके अलावा क्लब में कच्ची पर्चियों पर कई बड़े भुगतान किए गए। नियमों के ख़िलाफ़ पांच हज़ार रुपये से अधिक का कैश पेमेंट किया गया। Read more

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प्रेस क्लब में आर-पार की लड़ाई

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की लड़ाई जोर पकड़ रही है। आज शाम मैनेजमेंट कमेटी की बैठक बुलाई गई है। ख़बरों के मुताबिक इस बैठक में कोषाध्यक्ष (ट्रेजरार) नदीम अहमद काजमी को उनके पद से हटाया जा सकता है। उन पर क्लब की गोपनीयता भंग करने और “गैरकानूनी” तरीके से पर्चा छपवाने का आरोप लगाया जा रहा है। गौरतलब है कि नदीम अहमद काजमी ने दो दिन पहले एक ई-मेल जारी किया था और एक पर्चा प्रेस क्लब के सदस्यों को बांटा था। उसमें क्लब के खाते में भारी धांधली की आशंका जताई गई थी। क्लब के महासचिव पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के कामकाज पर सवाल खड़ा किया गया था। उन्होंने बताया था कि किस तरह मैनेजमेंट कमेटी की मंजूरी के बगैर पुष्पेंद्र ने बैंक में एक अलग खाता खुलवाया और लेन-देन उसी खाते से किया। नदीम के उस ई-मेल के बाद से उन्हें हटाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। Read more

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प्रेस क्लब को एक करोड़ रुपये का घाटा

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया कंगाल

दिल्ली का प्रेस क्लब ऑफ इंडिया एक करोड़ रुपये के घाटे में है। ट्रेजरार नदीम अहमद काजमी के मुताबिक प्रेस क्लब ने कर्मचारियों के पीएफ और ईएसआई की रकम जमा कराने में कई बार देरी की। यही नहीं फंड की कमी के कारण कई बार बिजली का बिल और किराया भी समय पर जमा नहीं कराया जा सका है। नदीम के मुताबिक प्रेस क्लब ने एक बैंक से पांच लाख रुपये का कर्ज भी लिया है। उनके इस खुलासे से प्रेस क्लब के महासचिव पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ट की “ईमानदारी” पर सवालिया निशान लग गया है। Read more

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घुसपैठ के बाद दिल्ली के प्रेस क्लब में पुलिस

दिल्ली में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में इन दिनों जो कुछ हो रहा है वैसा क्लब के इतिहास में कभी नहीं हुआ। रविवार की घटना से आप प्रेस क्लब की हालत का अंदाजा लगा सकते हैं। साथ ही मीडिया के एक खराब पहलू को भी जान और समझ सकते हैं। ये भी कि पत्रकारिता के इस पवित्र पेशे में किस हद तक सड़ांध हो गई है। जो बेहद छोटे लाभ के लिए गुणा-गणित में जुटे हों वो समाज और देश के बारे में कैसे सोचेंगे।

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