बिन मुद्दों की सूनी सियासत

November 30, 2009 by हरिवंश  
Filed under स्पेशल रिपोर्ट

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मुद्दे, राजनीति के सुहाग हैं. बिन मुद्दे राजनीति उजड़ी, सूनी और अर्थहीन है. प्रसंग था, अर्थनीति, महंगाई और देश के गरीब. लोकसभा में डॉ राममनोहर लोहिया ने पहले ही भाषण में कहा, इस देश के एक नागरिक की आमद साढ़े तीन आने रोजाना है. इसके पहले वह संसद के बाहर कह चुके थे. प्रधानमंत्री पर रोज पच्चीस हजार खर्च होते हैं. यह बहस ऐतिहासिक दस्तावेज बन गया. राजनीति में भ्रष्टाचार पर संसद में पहली आवाज फ़िरोज़ गांधी ने उठायी. मशहर कानूनविद ए जी नूरानी की चर्चित पुस्तक आयी थी. शायद नेहरूजी के कार्यकाल के अंतिम दौर में. नाम था मिनिस्टर्स मिसकंडक्ट. इससे समाजवादी सुरेंद्रनाथ द्विवेदी ने सवाल उठाया. मामला कुल साढ़े बारह हज़ार का था. केशवदेव मालवीय जैसे तपे नेता को मंत्री पद छोड़ना पड़ा. Read more

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क्या हमारे नेता बेशर्म हो गए हैं?

क्या कभी हमारे देश का राजनीतिक माहौल ऐसी शर्मनाक स्थिति में रहा है, जैसा की अभी है? अख़बारों के पहले पन्ने पर जिस तरह की ख़बरें रोज़ आ रही हैं, उससे आपको उबकाई आती होगी।

बात कुछ दिन पहले से शुरू करते हैं, जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाइ राजशेखर रेड्डी का निधन एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुआ। रातों-रात वाइएसआर देवतुल्य हो गये। यह सुन कर कि उनके प्रिय नेता वाइएसआर नहीं रहे, लोगों के बीच से आत्महत्या की ख़बरें आने लगीं। लेकिन इस बीच एक और बात हुई, जिस पर कम ग़ौर किया गया। वाइएसआर के बेटे जगन मोहन रेड्डी देखते ही देखते राष्‍ट्रीय स्तर पर चमकते सितारे की तरह छा गये? तीस वर्ष से भी कम उम्र में ही उनके द्वारा हजारों करोड़ से अधिक की जायदाद बटोरने ने उन्हें चरचा में ला दिया? पता नहीं यह सच है कि झूठ, लेकिन उसी दिन एक और ख़बर आयी कि जिसने वाइएसआर के वियोग में आत्महत्या की, उसके परिवार को आर्थिक मुआवजा यह कहते हुए दिया गया कि वाइएसआर के बिना परिवार का जीवनयापन-भरणपोषण मुश्किल है। अगर यह सच है, तो यह कह सकते हैं कि हमारे नेता मानवीय मूल्यों को खोने की आख़‍िरी राह पर चल रहे हैं। Read more

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संघर्ष कहां, आदर्श कहां… चारण और सूबेदारों का राज है

November 27, 2009 by हरिवंश  
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पहले चरण में वोट फ़ीसदी घटा है. झारखंड विधानसभा चुनावों में. एक स्रोत का मानना है, बीस वर्षों में सबसे कम मत पड़े. खासतौर से शहरों में. इससे क्या संकेत मिलते हैं? यह क्या राजनीति के प्रति नफ़रत का प्रतिफल है? इस घटते वोट फ़ीसदी के संकेत गहरे हैं. समाजशास्त्रियों के लिए भी. राजनीतिज्ञों के लिए भी. लोकतंत्र के प्रेमियों के लिए भी.

एक विश्लेषण यह भी है कि यह ग्लोबल विलेज की नयी दुनिया में उभरे आत्मकेंद्रित समाज का रुझान है. इक्कीसवीं सदी की यह दुनिया, गांव मानी जा रही है. एक सूत्र में बंधी. यह दुनिया, बाजार के विचारों से संचालित है. अब दुनिया पलटने और बदलनेवाले राजनीतिक विचार प्रभावी नहीं हैं. राजनीति, विचारविहीन है. पहले ‘वाद’ थे. पूंजीवाद, समाजवाद, साम्यवाद, अराजकतावाद. अब है… बाजारवाद. इस बाजारवाद के विचारस्रोत है, ‘मैनेजमेंट थाट’ या ‘मैनेजमेंट गुरु’ या ‘मैनेजमेंट आइडियालाग’ (प्रबंधन के भाष्यकार). अभी दुनिया ने मैनेजमेंट गुरु पीटर ड्रकर की शताब्दी मनायी. उनके मरे चार वर्ष हुए. वह जीते तो सौ वर्ष के हुए होते. वह अर्थशास्त्री जेएम किंस और जोसेफ़ शुंपीटर स्तर के थे. इन दोनों से वह प्रबंधन के अपने विचार लेकर मंथन भी करते रहे. प्रबंधन में आज वही पीटर ड्रकर आइडियालाग माने जाते हैं. प्रबंधन शास्त्र की शुरुआत का श्रेय उन्हें है. कहते हैं, इस वर्ष ‘मैनेजमेंट कंसलटिंग इंडस्ट्री’ को 300 बिलियन डॉलर (13.88 लाख करोड़ रुपये) की आय होगी. इसका श्रेय उन्हें दिया गया है. जब राजनीतिकवाद थे, अर्थशास्त्र के सिद्धांत समाज को गढ़ते थे, तब प्रबंधन का शास्त्र नहीं था. आज एक प्रबंधन गुरु अपने एक व्याख्यान के लिए 60000 डॉलर (28 लाख रुपये) कमा सकता है. प्रबंधन कला को इस स्तर तक पहुंचाने का श्रेय पीटर ड्रकर को दिया जाता है. वह बाजार, प्रबंधन और उद्योग के मौलिक विचारक माने गये. वह ‘द फ़ादर ऑफ़ माडर्न मैनेजमेंट’ (आधुनिक प्रबंधन के पिता) और ‘वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट मैनेजमेंट थिंकर’ (विश्व के सबसे बड़े प्रबंधन विचारक) माने जाते हैं. उन्होंने ही भविष्यवाणी की थी कि भविष्य में नालेज वर्कर (ज्ञानसंपन्न मजदूर) होंगे. Read more

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“जनतंत्र को पाल रहे हैं बड़े अख़बार”

प्रभात ख़बर, जमशेदपुर की तरफ़ से जवाब आया है। उनके मुख्य संवाददाता विनोद शरण ने यह जवाब भेजा है। उनका कहना है कि तथागत ने प्रभात ख़बर पर जो आरोप लगाए हैं वो सभी बेबुनियाद है। उनका अख़बार कोई भेदभाव नहीं कर रहा। बल्कि सभी उम्मीदवारों को एक समान जगह दी जा रही है। सभी को जिताया जा रहा है। अगर किसी दिन सरयू राय की जीत सुनिश्चित की जाती है तो अगले दिन उनके विरोधियों के बारे में भी वैसी ही सकारात्मक ख़बरें छापी जाती हैं। अपने ख़त में विनोद शरण ने तथागत के साथ जनतंत्र पर भी कई आरोप लगाए हैं। आप उन सभी आरोपों पर एक नज़र डालिए। – मॉडरेटर

सच सुनिये-देखिये प्रभात ख़बर पर आरोप लगानेवाले

प्रिय समरेंद्र जी

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प्रभात ख़बर की आचार संहिता पर सरयू राय भारी शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट पढी। तथागत नाम से यह रिपोर्ट लिखी गयी है। इसमें सरयू राय से संबंधित दो ख़बरों की कटिंग भी है और उस पर चर्चा है। अब मेरी बात सुनिये। सरयू राय से संबंधित वह रिपोर्ट मैंने ही लिखी है। मैं पिछले 20 साल से प्रभात ख़बर में हूं। आपने लिखा है कि ख़बर देखने से पता चलता है कि रिपोर्टर रिश्वत लेकर लिख रहा है। यह आरोप मेरे ऊपर आपने लगाया है। गंभीर आरोप है। किसी तथागत ने आपको प्रभात ख़बर में छपी दो-चार रिपोर्ट की कटिंग भेज दी और आपने लिख दिया कि अख़बार सरयू राय का है। क्या आपने चुनाव के दौरान पूरे प्रभात ख़बर अख़बार को देखा है। अन्य प्रत्याशियों की ख़बरें कैसे, कितनी छप रही है, यह देखा है? मैं आपकी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देना नहीं चाहता था। लेकिन चूंकि व्यक्तिगत टिप्पणी की गई है, मुझे करप्ट बताने का प्रयास किया है, इसलिए जवाब भी पढिये। Read more

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“प्रभात ख़बर सरयू राय का मुखपत्र है”

दो दिन पहले जनतंत्र के पास एक चिट्ठी आई। जमशेदपुर से एक पाठक ने झारखंड के नंबर वन अख़बार प्रभात ख़बर पर अनैतिक होने का आरोप लगाया। हमने उस चिट्ठी की ख़बर “तथागत” को दी और कहा कि ज़रा सच्चाई का पता लगाइए। “तथागत” ने पता लगाने का वादा किया। इधर जनतंत्र की टीम ने भी प्रभात ख़बर के ई-पेपर के जरिए थोड़ी बहुत छानबीन की। और तथागत को उसका ब्योरा भी दिया। अब तथागत ने एक रिपोर्ट भेजी है। उसके मुताबिक तो जनतंत्र के पाठक की बात में दम है। हो सकता है कि यहां कुछ लोग कहें कि यह प्रभात ख़बर की रिपोर्टिंग का तरीका है। ऐसे में उन लोगों से हमें सिर्फ़ यही कहना है कि रिपोर्टिंग का यह तरीका बेहद ख़तरनाक है। इससे लेन-देन की भनक भले ही नहीं लगे लेकिन एक गठजोड़ का एहसास ज़रूर होता है। और एक सचेत पाठक को हर हाल में इसका विरोध करना चाहिए। - मॉडरेटर Read more

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प्रभात ख़बर में आचार संहिता का अंतिम संस्कार

मुसलमान भाजपा से हाथ मिलायें

मुख्य संवाददाता
जमशेदपुर : भाजपा के वरीय नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री सांसद सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि मुसलमान भाजपा से हाथ मिलायें, उनकी सारी गलतफहमियां दूर हो जायेंगी. वे जात-पात व धर्म से ऊपर उठ कर विकास के नाम पर वोट करें और जमशेदपुर पश्चिम के भाजपा प्रत्याशी सरयू राय को रिकार्ड मतों से विजयी बनायें. श्री हुसैन ने यह बात सोमवार को मानगो के गांधी मैदान में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कही. श्री हुसैन ने कहा कि कांग्रेस अब तक अल्पसंख्यकों को भाजपा का खौफ दिखा कर वोट बटोरती रही है. कांग्रेस मुसलमानों से निगेटिव वोट लेती रही है. इतना ही नहीं, कांग्रेस ने हिंदू-मुसलमान की दूरी बढायी है, गलतफहमी पैदा की है, लेकिन सच यही है कि मुसलमान से देशभक्त हैं. जो चले गये, वो चले गये, लेकिन जो रह गये, वे सच्‍चे भारतीय मुसलमान हैं. इसी धरती पर जन्म लिया, पले-बढे और यहीं की मिट्टी में दफन होंगे. उन्होंने कहा कि मुसलमान भाजपा से हाथ मिलायें, उसके करीब आयें, उनकी सारी गलतफहमी दूर हो जायेगी. उन्होंने कहा कि झारखंड को तरक्की के रास्ते पर भाजपा ही ले जा सकती है. इसलिए मुसलमान को चाहिए वे जात-पात व धर्म से परे जाकर तरक्की के लिए वोट करें और जमशेदपुर पश्चिम ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में भाजपा गंठबंधन को दो तिहाई बहुमत से विजयी बनाने में सहयोग करें. मानगो गांधी मैदान में भाजपा की सभा में शाहनवाज ने कहा कि जात-पात व धर्म के नाम पर नहीं, विकास के नाम पर सरयू राय को वोट दें.

सरयू के लिए छत्तीसगढ़ के विधायक मैदान में

मुख्य संवाददाता
♦ जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के भाजपा प्रत्याशी सरयू राय का जनसंपर्क अभियान तेज हो गया है. आज तो उनके पक्ष में छत्तीसगढ़ के बैतूल के विधायक अल्केश आर्य भी उतर गये, जिसका असर छत्तीसगढ़ी समाज पर व्यापक रूप से पड़ा. वे लगातार घर-घर जा कर जन संपर्क कर रहे हैं. वे जहां-जहां जा रहे हैं, वहां-वहां उन्हें बेहतर समर्थन मिल रहा है. लोग उन्हें समर्थन देने का वादा कर रहे हैं. श्री राय ने एलआइसी कॉलोनी, कदमा, सोनारी कमल चौक, बुधराम कॉलोनी, राम मंदिर, नया लाइन, पुराना सीपी क्लब क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चलाया, जहां उनका सैकडों कार्यकर्ताओं व स्थानीय लोगों ने स्वागत किया. इस अवसर पर उनके पक्ष में जबरदस्त रूप से जयघोष के नारे लगे. इस अवसर पर गोपाल लहेरी, उमेश साहू, मनोज साहू, सत्यप्रकाश सिंह, तोता राम साहू सहित सैकडों कार्यकर्ता थे.

♦ एलआइसी कालोनी, कदमा : एलआइसी, कॉलोनी कदमा में भाजपा प्रत्याशी सरयू राय ने घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क किया और भाजपा के पक्ष में वोट देने की अपील की. इस दौरान जबरदस्त रूप से उनका स्वागत किया गया. इस दौरान सांवरमल शर्मा, चितरंजन वर्मा समेत कई लोग शामिल थे. कावेरी रोड में बैठक : साकची मंडल की कावेरी रोड में बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता ईश्वर चंद दुबे ने की. बैठक में सरयू राय को भारी मतों से जिताने की अपील की गयी.

♦ नुक्कड सभाएं : सरयू राय की जीत के लिए सोनारी एरोड­म, कदमा रंकिनी मंदिर, रामनगर व मानगो, शंकोसाई, रोड नंबर पांच में नुक्कड सभा का आयोजन किया, जिसमें यूपीए सरकार की जम कर आलोचना की गयी. नुक्कड सभा को छत्तीसगढ़ के विधायक अल्केश आर्य, प्रदीप दुबे, पूर्व मंत्री विक्रम कुंवर सिंह, संजय सिंह, जटाशंकर पांडेय आदि नेताओं ने संबोधित किया.

♦ भाजयुमो ने किया परची वितरण : भारतीय जनता युवा मोरचा (भाजयुमो) गोलमुरी मंडल अध्यक्ष सुखदेव गुरंग के नेतृत्व में टिनप्लेट क्षेत्र में परची वितरण किया.

♦ महिला मोरचा ने जनसंपर्क किया : भाजपा महिला मोरचा की रीता मिश्रा व रेणु मिश्रा ने संयुक्त रूप से बिष्‍टुपुर व कदमा के विभिन्न क्षेत्रों यथा कांट्रैक्‍टर्स एरिया, ओसी रोड आदि में दौरा किया व घर-घर संपर्क किया. साथ ही सरयू राय को जिताने की अपील की.

♦ जी तुलसी के नेतृत्व में चला संपर्क अभियान : महिला मोरचा द्वारा कदमा के उलियान क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चलाया गया, जिसका नेतृत्व भाजपा नेता जी तुलसी ने किया. सरयू राय को जिताने की अपील की गयी.

♦ कृष्णानगर में भाजपा का कार्यालय खुला : जोजोबेडा कृष्णानगर बाजार में भाजपा कार्यालय का शुभारंभ मुख्य अतिथि मिथिलेश सिंह यादव, विशिष्‍ट अतिथि गुरुदेव सिंह राजा, खेमलाल चौधरी, दिलीप कुमार, धर्मेंद्र कुमार ने किया. इस दौरान बडी संख्या में कार्यकर्ता थे.

सरयू को हराने की साजिश नाकाम कर देगी जनता :
विक्रम-कुमुद

जमशेदपुर : बिहार के पूर्व मंत्री विक्रम कुंवर व भाजपा नेता कुमुद बिहारी सिंह ने कहा है कि कांग्रेस झारखंड लूट खजाने से एक करोड़ भी खर्च कर भ्रष्‍टाचार का विरोध करने वाले सरयू राय को धनबल की बदौलत हराने की साजिश रच रही है, लेकिन जमशेदपुर पश्चिम के जागरूक मतदाता इसे नाकाम कर देंगे. जारी संयुक्त बयान में नेताद्वय ने जमशेदपुर पश्चिम के विभिन्न क्षेत्रों में दौरा करने के बाद कहा कि बुद्धिजीवी और श्रमजीवी की एक ही राय है सरयू राय-सरयू राय. मतदाता सरयू राय की शालीनता, कर्मठता और उनकी बौद्धिक क्षमता के लिए वरदान व अनमोल रत्न की तरह समझते हैं. नेताद्वय ने दावा कि सरयू राय का मतदाताओं पर ऐसा सम्मोहन है कि वे हजारों वोट के अंतर से जीतेंगे, यहां लोग जाति, धर्म, क्षेत्र आदि से ऊपर उठ कर वोट देंगे.

कुछ दिनों पहले प्रभात खबर ने एक आचार संहिता का एलान किया था। इस अखबार ने अपने बारे में बार-बार कहा कि वह पक्षधर पत्रकारिता में विश्‍वास नहीं रखता, बल्कि निष्‍पक्षता उसकी शैली है। आचार संहिता में भी कुल यही बात कही। कहा कि पार्टियों से विज्ञापन लेंगे, लेकिन टेबल के ऊपर से। टेबल के नीचे से नहीं। लिहाज़ा अगर विज्ञापन वाली ख़बर भी छपी, तो उसके नीचे लिखेंगे कि ये ख़बर विज्ञापन का हिस्‍सा है। लेकिन प्रभात खबर की आचार संहिता एलान के 15 दिनों के भीतर दम तोड़ देगी, इसका क़तई अंदाज़ नहीं था।

ऐसी बहुत-सी खबरें हैं, जिनको आप पढ़ें तो साफ लगेगा कि रिपोर्टर रिश्‍वत लेकर खबर लिख रहा है। एक तरह से पार्टी बन कर खबर लिख रहा है। इसका यक़ीन तो बिल्‍कुल ही नहीं करना चाहिए कि हरिवंश जी के अख़बार में रिपोर्टर को ख़बर लिखने की ट्रेनिंग नहीं होगी। नहीं भी होगी, तो डेस्‍क पर उनकी ख़बरों पर काम किया जाएगा। लेकिन सारी स्‍क्रीनिंग के बाद छपी कुछ ख़बरें ऐसी हैं, जो बताती हैं कि दाल में काला है और प्रत्‍याशियों के साथ कुछ मिलीभगत ज़रूर चल रही है। अभी दो ख़बरों के उदाहरण के साथ बात करते हैं। पहली ख़बर 16 नवंबर को चार नंबर पन्‍ने पर छपी है, जिसकी तस्‍वीर और जिसका टेक्‍स्‍ट भी हम जारी कर रहे हैं। इस खबर को पढ़ेंगे तो माज़रा स्‍पष्‍ट हो जाएगा।

कुछ पंक्तियां हम पुन: उद्धृत किये दे रहे हैं और जिन पंक्तियों पर ग़ौर करने की गुज़ारिश कर रहे हैं, उन्‍हें बोल्‍ड किये दे रहे हैं : जमशेदपुर पश्चिम के भाजपा प्रत्याशी सरयू राय का जनसंपर्क अभियान तेज हो गया है। आज तो उनके पक्ष में छत्तीसगढ़ के बैतूल के विधायक अल्केश आर्य भी उतर गये, जिसका असर छत्तीसगढ़ी समाज पर व्यापक रूप से पड़ा।वे लगातार घर-घर जा कर जन संपर्क कर रहे हैं। वे जहां-जहां जा रहे हैं, वहां-वहां उन्हें बेहतर समर्थन मिल रहा है। लोग उन्हें समर्थन देने का वादा कर रहे हैं। श्री राय ने एलआइसी कॉलोनी, कदमा, सोनारी कमल चौक, बुधराम कॉलोनी, राम मंदिर, नया लाइन, पुराना सीपी क्लब क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चलाया, जहां उनका सैकडों कार्यकर्ताओं व स्थानीय लोगों ने स्वागत किया। इस अवसर पर उनके पक्ष में जबरदस्त रूप से जयघोष के नारे लगे।

अलग से कहने की ज़रूरत नहीं है कि इन ख़बरों में सरयू राय की पैरवी की जा रही है, उनका प्रचार किया जा रहा है और उन्‍हें लगभग जीता हुआ माना जा रहा है। इसे पढ़ कर अगर कोई ये सवाल करे कि प्रभात ख़बर ने इन ख़बरों के बदले पैकेज लिया है, तो अखबार का जवाब क्‍या होगा? झारखंड के मीडिया हलकों में तो ये भी चर्चा है कि चूंकि प्रभात खबर, जमशेदपुर संस्‍करण का काम देख रहे प्रभात खबर, झारखंड के वरिष्‍ठ संपादक अनुज कुमार सिन्‍हा संघी पृष्‍ठभूमि के रहे हैं, इसलिए वे बीजेपी के गुर्गे की तरह बर्ताव करते हैं। ऐसे में सरयू राय के लिए अख़बार के पन्‍नों पर अगर वे कैंपेन कर रहे हैं, तो इसमें कुछ भी हैरत नहीं है। लेकिन हरिवंश जी क्‍या कर रहे हैं? वे तो पूरे देश में घूम-घूम कर मीडिया की सकारात्‍मक भूमिका और निष्‍पक्षता पर व्‍याख्‍यान देते हैं – उन्‍हें तो अपने संपादक पर नज़र रखनी चाहिए? कार्रवाई करनी चाहिए? वे नहीं करते हैं, तो प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को कुछ करना चाहिए और प्रभात खबर को लेकर भ्रम पालने वालों को सोचना चाहिए कि इस अखबार के पास आंदोलन महज़ एक नारा है और ये भी नागरिक अधिकारों से ज़्यादा धन के धंधे में यक़ीन रखता है।

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जो हरिवंश जी को नहीं जानते, उनके लिए

आदरणीय मॉडरेटर,

मैं आपकी थोड़े दिनों में मशहूर हो गयी वेबसाइट पर लगातार तथागत के लिखे को पढ़ रहा हूं। उनकी राइटिंग इस बात की ओर इशारा करती है कि वे मीडिया के प्रबुद्ध नागरिक हैं – लेकिन उनकी चेतना एकांगी है और ये भी तय है कि वे समग्रता में हमारे दौर को देखने से परहेज़ कर रहे हैं।

ख़ैर, प्रभात ख़बर और हरिवंश जी की बात बाद में। पहले मैं आपको एक ख़बर सुना रहा हूं। संजय यादव रांची में बरसों से पत्रकारिता कर रहे हैं। पहले टीवी और फिर अख़बार। मैं उन्‍हें व्‍यक्तिगत तौर पर जानता हूं। संजय जी के पास दुर्लभ ईमानदारी है, जिसकी हमारे समय में घनघोर कमी है। रांची से आठ किलोमीटर दूर टाटीसिल्‍वे में रहते हैं। वहां पानी की बेतरह परेशानी है। रोज़ दफ़्तर आने से पहले बाल्‍टी-बाल्‍टी पानी ढोकर घर वालों की मदद करते हैं। इस एक जिक्र से आप ये न समझें कि उनकी माली हालत ठीक नहीं है। दरअसल वे कर्मठ स्‍वभाव के शख्‍स हैं और जहां तक मैंने उनको वॉच किया है, श्रमदान उनका प्रिय प्रसंग है। Read more

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गैर-सवर्ण अस्मिताओं के लिए प्रभात ख़बर में जगह नहीं

August 24, 2009 by तथागत  
Filed under ब्लॉग

हरिवंश, संपादक, प्रभात ख़बर

हरिवंश, संपादक, प्रभात ख़बर

प्रभात खबर में भी वही नज़ारे देखने को मिलते हैं, जो कि पूरे देश के मीडिया में आम हैं। यानी सवर्ण बहुमत वाली संपादकीय टीम। बिज़नेस, सर्कुलेशन आदि विभागों में भी ऐसे ही लोग काबिज़ हैं। इस उपस्थिति के पीछे मैं किसी हिडेन एजेंडा को नहीं देख रहा हूं – लेकिन इतना ज़रूर देख रहा हूं कि अपनी संपादकीय छवि को लेकर सजग हरिवंश जी इस मामले में इतने उदासीन क्‍यों रहे? एक तो ऐसे भी प्रभात ख़बर अपने कर्मचारियों से वित्तीय रिश्‍तों में कंजूसी बरतता है और ऐसे में चाहे तो वो उन जातियों के पत्रकारों को एक्‍स्‍प्‍लॉयट कर सकता है – जो मुख्‍यधारा में नहीं हैं और कम क़ीमत पर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर सकते हैं। लेकिन ज्ञान पर सवर्ण एकाधिकार की मंशा इस एक्‍स्‍प्‍लॉयटेशन के भी आड़े आती है। Read more

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भरोसे की नींव पहले हिली, हरिभाई बाद में अलग हुए

मुझे साइट मॉडरेटर ने बताया कि लोगों की दिलचस्‍पी इस बात में है कि तथागत कौन है। ये एक स्‍वाभाविक सवाल है। इसलिए भी, क्‍योंकि लोगों की दिलचस्‍पी इस बात में होगी कि जो प्रभात खबर के इतने सारे मसलों को व्‍यक्तिगत रूप से जानता है – वो जरूर निरपेक्ष आदमी नहीं होगा। इनके बीच का ही आदमी होगा। हां, मैं पत्रकारिता के झारखंडी (हरिवंश) स्‍कूल का ही छात्र हूं। अब भी उनके आसपास काम करता हूं। सच से प्‍यार है और सच कहना चाहता हूं। लेकिन कोई सज़ा पाना नहीं चाहता, इसलिए सच कहने के लिए अपना एक नाम रखा – तथागत। हो सकता है, मेरे सच में किसी तक़लीफ़ या पर्सनल खुन्‍नस की गंध आये – तो ये जायज़ है। लेकिन जहां तक कोशिश होगी, मैं ईमानदार बना रहूंगा। बहरहाल, वादे के मुताबिक मैं हरिनारायण सिंह की कहानी पर आता हूं। Read more

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खबर की राजनीति का दूसरा नाम प्रभात खबर

मुद्दे प्रभात खबर के लिए जरूरत भर होते हैं। ये अखबार बड़ी पार्टियों के एजेंट की तरह काम करता है। कहा जा सकता है कि छोटी और अल्‍पकालिक पार्टियों की अराजकता के बहाने आक्रामक तेवर अख्तियार कर पाठकों को भरमाने वाले इस अखबार ने मधु कोड़ा के एक खास आदमी विनोद सिन्‍हा के बारे में दो साल पहले बैनर खबर छापी थी। मधु कोड़ा उस वक्‍त मुख्‍यमंत्री थे और और विनोद सिन्‍हा उनके निकट के आदमियों में से एक। विनोद सिन्‍हा को हम राष्‍ट्रीय राजनीति में उभरे अमर सिंह जैसों का झारखंडी संस्‍करण कह सकते हैं। Read more

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