यह नुकसान तो पत्रकारों को ही उठाना होगा

September 29, 2009 by कबीर  
Filed under ब्लॉग, हक़ की आवाज़

बचपन में बाबा भारती और डाकू खड़ग सिंह की कहानी बहुतों ने पढ़ी होगी। बाबा भारती के पास एक शानदार घोड़ा था। जिसे देख कर डाकू खड़ग सिंह की नीयत डोल गई थी। वो एक दिन दीन-हीन बन कर बाबा भारती को मिला। जिसके बाद बाबा भारती खुद घोड़े ने उतर गए और उस पर उन्होंने डाकू खड़ग सिंह को बिठा दिया। मौका मिलते ही खड़ग सिंह ने हांक लगाई और घोड़े को ले भागा। तब बाबा ने उससे कहा कि घोड़ा ले जाना है ले जाओ लेकिन एक बात सुनते जाओ। बाबा भारती ने कहा कि खड़ग सिंह किसी को यह मत बताना कि तुमने घोड़ा कैसे चुराया है। लोग सुनेंगे तो किसी गरीब और जरूरतमंद को मदद देना बंद कर देंगे। उसके बाद डाकू खड़ग सिंह वहां से चला गया। लेकिन बाबा भारती की यह बात उसके जेहन में कौंधती रही। कुछ समय बाद उसका जमीर जाग गया और उसने घोड़ा बाबा भारती को लौटा दिया।

इस कहानी का सबक यही है कि कभी किसी के भरोसे का क़त्ल नहीं करना चाहिए। लेकिन सरकार ने लालगढ़ में पत्रकारों के भरोसे का ख़ून कर दिया है। वहां स्थानीय पत्रकारों के साथ जो छल किया गया है उसने एक ख़तरनाक खेल की ज़मीन तैयार कर दी है। नक्सली संगठनों को पत्रकारों का दुश्मन बना दिया है। नक्सली ही क्यों जितने भी आंदोलनकारी या फिर अलगाववादी ताक़तें हैं पत्रकार उनके निशाने पर होंगे। जब भी कोई पत्रकार उनसे ख़बर के लिए संपर्क करेगा वो उसे शक़ की नज़र से देखेंगे। इससे हो सकता है कि पत्रकारों पर हमले और बढ़ें। अगर ऐसा कुछ भी हुआ तो उसके लिए सीधे तौर पर सरकार जिम्मेदार होगी और वह पुलिस भी – जिसने पत्रकार बन कर लालगढ़ से छ्त्रधर महतो को गिरफ़्तार किया है। Read more

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