जाने के बाद भी एनडीटीवी पर छाए हुए हैं दिबांग

दिबांगएनडीटीवी इंडिया के पूर्व मैनेजिंग एडिटर अब एनडीटीवी से अलग हो चुके हैं। 30 दिसंबर को एनडीटीवी में उनका आखिरी दिन रहा और इसकी ख़बर एनडीटीवी मैनेजमेंट को एक महीने पहले से थी। लेकिन जाने के बाद भी वो एनडीटीवी इंडिया पर छाए हुए हैं। इस महीने, दो शनिवार गुजर चुके हैं। दोनों ही शनिवार मुक़ाबला दिखाया गया। और उस टॉक शो का संचालन दिबांग कर रहे थे। ख़बर यह भी है कि बीते सात साल में उन्होंने मुक़ाबला के जितने भी एपिसोड किए हैं, उनमें से कुछ चुनिंदा एपिसोड छांटे गए हैं। ये वो एपिसोड हैं जिनमें बहस का मुद्दा समय के साथ ठंडा नहीं पड़ा है। मसलन धर्म, संस्कृति, जेंडर और कॉमेडी जैसे मुद्दे। अब इन्हें बारी-बारी दिखाया जा रहा है। Read more

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क्या मीडिया का एक धड़ा एन डी तिवारी का चेला है?

आंध्र प्रदेश में पोल सिर्फ नारायण दत्त तिवारी की ही नहीं खुली बल्कि मीडिया ने भी अपना बहुत कुछ गंवा दिया है। इस मामले में कुछ मीडिया संस्थानों ने जिस तरह की रिपोर्टिंग की है उससे एक बार फिर साफ हुआ है कि अगर किसी के पास ताक़त है और जातिगत औरा है तो बड़े से बड़े अपराध और घिनौने मामले में भी उसके पक्ष में माहौल तैयार किया जा सकता है। यही नहीं ऐसा माहौल भी बनाया जा सकता है कि जिससे उस ताक़तवर शख़्स के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले शख़्स या संस्था को उस दुस्साहस की क़ीमत चुकानी पड़े। Read more

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मंदी से पहले और बाद में एनडीटीवी

दो साल से भी कम समय में एनडीटीवी की स्थिति में ज़मीन आसमान का अंतर आ चुका है। 2008 के मध्य तक एनडीटीवी का सफ़र लाजवाब था। 2008 की शुरुआत तो एनडीटीवी के लिए बहुत हसीन थी। सबकुछ उसके योजनाओं के मुताबिक हो रहा था। कंपनी दिन-रात तरक्की कर रही थी। लेकिन सात महीने के भीतर उसके कदम लड़खड़ा गए। 2009 तो बहुत बुरा बीता। एनडीटीवी की आर्थिक स्थिति इतनी ख़राब हो गई कि उसे अपने दो-दो चैनल बेचने पड़े। उन चैनलों में अपनी हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों के हवाले करना पड़ा है। ऐसा वक़्त किसी भी कंपनी के लिए आसान नहीं होता। लेकिन उम्मीद है कि यह मुश्किल दौर अब ख़त्म हो जाएगा।

एक नज़र बीते दो साल के घटनाचक्र परRead more

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एनडीटीवी ने बेच दिया इमैजिन

एनडीटीवी ने अब यह सार्वजनिक कर दिया है कि उसने एनडीटीवी इमैजिन को टर्नर एशिया पेसिफिक वेंचर्स को बेच दिया है। कंपनी ने अपने 76 फीसदी शेयरों का सौदा 6.70 करोड़ डॉलर यानी करीब 313 करोड़ रुपये में किया है। समझौते के मुताबिक कंपनी को चैनल के 5 करोड़ डॉलर के ताज़ा शेयर जारी करने दिया गया। जिसकी वजह से यह सौदा कुल मिला कर 11.7 करोड़ डॉलर यानी करीब 547 करोड़ रुपये में हुआ है।

एनडीटीवी इमैजिन में एनडीटीवी नेटवर्क के 82 फीसदी शेयर थे। करीब 15 फीसदी शेयर धर्मा प्रोडक्शन के मालिक करण जौहर और एनडीटीवी के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर समीर नायर के पास हैं। और करीब तीन फीसदी शेयर एनडीटीवी के कर्मचारियों के पास हैं। Read more

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एनडीटीवी लाइफस्टाइल के बाद अब इमैजिन बेचने की तैयारी

इंडियन एक्सप्रेस की यह ख़बर सही निकलती है तो एनडीटीवी के प्रमोटर अब एनडीटीवी इमैजिन को बेचने की तैयारी में जुटे हैं। करीब डेढ़ साल पहले यह चैनल बड़े तामझाम के साथ शुरू हुआ था। लेकिन कंपनी की माली हालत इतनी ख़राब है कि अब वह इस सफेद हाथी को ज्यादा दिनों तक नहीं पाल सकती। आर्थिक संकट से उबरने के लिए एक हफ़्ते पहले ही एनडीटीवी ने अपना लाइफस्टाइल चैनल एनडीटीवी गुडटाइम्स के 69 फीसदी शेयर एक विदेशी कंपनी स्क्रिप्स को बेच दिए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक एनडीटीवी इमैजिन के सौदे के लिए टर्नर ब्रॉडकास्टिंग (टाइम वार्नर से बातचीत अंतिम चरण में है। इस सौदे से जुड़े दो करीबी लोगों ने बताया है कि एनडीटीवी अपनी पूरी हिस्सेदारी करीब 75-80 फीसदी टर्नर ब्रॉडकास्टर्स को बेच सकती है। करीब 7 करोड़ डॉलर यानी 322 करोड़ रुपये में यह सौदा हो सकता है। बाकी शेयर एनडीटीवी इमैजिन के सीईओ समीर नायर समेत कुछ कर्मचारियों और धर्मा प्रोडक्शन के मालिक करण जौहर के पास हैं। सूत्रों के मुताबिक अगर टर्नर चाहे तो वो उन लोगों से बात करके उनकी हिस्सेदारी भी खरीद सकता है। Read more

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एनबीसी यूनिवर्सल ने एनडीटीवी से पीछा छुड़ाया!

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एनबीसी यूनिवर्सल ने एनडीटीवी में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला कर लिया है। जिसके बाद एनडीटीवी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दी है कि वो एनबीसी यूनिवर्सल की हिस्सेदारी को वापस खरीदेगा। लेकिन यह सौदा कितने में हुआ है इसका खुलासा नहीं किया गया है।

एनबीसी यूनिवर्सल ने मई 2008 में एनडीटीवी की सब्सिडरी कंपनी एनडीटीवी नेटवर्क्स पीएलसी में 26 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। एनडीटीवी नेटवर्क्स पीएलसी के अंतर्गत एनडीटीवी इमैजिन समेत सभी नॉन न्यूज़ चैनल हैं। इसके एवज में तब एनबीसी यूनिवर्सल ने 15 करोड़ डॉलर (तब की कीमत के हिसाब से करीब 630 करोड़ रुपये) दिए थे। लेकिन यह सौदा कामयाब नहीं रहा। वित्तीय वर्ष 2008-2009 में एनडीटीवी को करीब 508 करोड़ रुपये का ऑपरेशन घाटा हुआ था। मंदी के दौर और खराब नतीजों की वजह से कंपनी के शेयरों की कीमत लगातार गिरती गई। एक समय 400 रुपये से अधिक के भाव वाले शेयर 68 रुपये तक गिर गए। हालांकि बीते कुछ महीनों में एक बार फिर तेजी देखी जा रही है। Read more

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मीडिया छोड़ कॉरपोरेट वर्ल्ड में शिवनाथ की छलांग

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शिवनाथ ठुकराल (बीच में)

शिवनाथ ठुकराल (बीच में)

शिवनाथ ठुकराल को लेकर चल रहा सस्पेंस ख़त्म हो गया। एनडीटीवी से अलग होने के अब उन्होंने एस्सार ग्रुप से रिश्ता जोड़ लिया है। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया सेक्टर को अलविदा कह दिया। शिवनाथ ठुकराल ने एस्सार ग्रुप में कॉरपोरेट ब्रांडिंग और स्ट्रेटेजिक इनिसिएटिव के ग्रुप प्रेसिडेंट का पद भार संभाला है। अपने करीबी दोस्तों के भेजे गए ई-मेल में शिवनाथ ठुकराल ने इसकी पुष्टि कर दी है।

उधर एक्सचेंज फॉर मीडिया पर छपी ख़बर के मुताबिक एस्सार ग्रुप के चेयरमैन शशि रुइया ने कहा है कि “भारतीय बिजनेस, वित्तीय बाज़ार और आर्थिक मामलों में शिवनाथ के पास अच्छा अनुभव है। दुनिया के बड़े अर्थशास्त्रियों और सीईओ से उनके संपर्क हैं। एस्सार ग्रुप की ब्रांडिंग को बेहतर बनाने और कंपनी को एक ग्लोबल ब्रांड के तौर पर विकसित करने में उनके अनुभव से काफी मदद मिलेगी।” Read more

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एनडीटीवी से अलग हुए शिवनाथ ठुकराल

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एनडीटीवी के ग्रुप बिज़नेस एडिटर और एडवाइज़र शिवनाथ ठुकराल ने इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने दो दिन पहले अपने पद से त्यागपत्र दिया। बताया जा रहा है कि उन्हें नया ओहदा रास नहीं आया और इसी वजह से उन्होंने पद छोड़ दिया है।

शिवनाथ ठुकराल बीते 14 साल से एनडीटीवी से जुड़े हैं। और यहां कामयाबी के कई मुकाम उन्होंने तय किए। डेढ़ महीने पहले तक वो एनडीटीवी प्रॉफिट के मैनेजिंग एडिटर रहे और उसके बाद कंपनी के एडवाइजर बने। उन्हें 2007 में मैनेजिंग एडिटर बनाया गया था। लेकिन हाल ही में कुछ कारणों से उन्हें इस हद से प्रमोट करते हुए एनडीटीवी का ग्रुप बिज़नेस एडिटर और एडवाइज़र बना दिया गया। Read more

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क्या सच में एनडीटीवी के प्रमोटर बेचेंगे हिस्सेदारी?

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अगर ये खबर सच निकली तो कुछ दिनों बाद मीडिया सेक्टर की चंद बड़ी कंपनियों में से एक एनडीटीवी के प्रमोटर अपनी कंपनी के 50 फीसदी से कम के मालिक रह जाएंगे। अभी एनडीटीवी का स्टेकहोल्डिंग पैटर्न देखें तो प्रमोटर ग्रुप की कंपनी में हिस्सेदारी-63.1 फीसदी है। विदेशी संस्थाओं की हिस्सेदारी 22.8 फीसदी और पब्लिक की हिस्सेदारी 7.8 फीसदी है। अब पढ़िए वो खबर जो बुधवार को इकनॉमिक टाइम्स के पेज 8 पर “हर्ड ऑन द स्ट्रीट” कॉलम में छपी है। ये ख़बर इकनॉमिक टाइम्स की वेबसाइट पर भी मौजूद है। खबर का शब्दश: अनुवाद करने की कोशिश की गई है। Read more

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एनडीटीवी को 83.4 करोड़ रुपये का घाटा

एनडीटीवी को इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल से जून 2009) में भारी घाटा हुआ है। कंपनी को 130.7  करोड़ रुपये की आमदनी हुई है जबकि खर्च 198 करोड़ रुपये। इसमें ब्याज और दूसरी चीजों को जोड़ने-घटाने के बाद कंपनी को कुल 83.4 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

पिछले साल इसी तिमाही की तुलना में आमदनी में करीब 11.28 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। जबकि खर्च में 20. 2 करोड़ रुपये की कमी आई है। सबसे अधिक कटौती मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और प्रमोशन खर्च में हुई है।  जबकि प्रोडक्शन खर्च और पर्सनल एक्सपेंसेज में मामूली कमी आई है। नतीजों के मुताबिक कंपनी पर ब्याज का बोझ भी बढ़ा है। Read more

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