अब महानायक पहनेंगे भगवा चश्मा, करेंगे मोदी वंदना

अब सदी का महानायक गुजरात का चेहरा होगा। टूरिस्टों को गुजरात की ओर आकर्षित करने के लिए अमिताभ बच्चन अब मोदी के ब्रैंड अंबैसेडर होंगे। अमिताभ बच्चन ने नरेंद्र मोदी का निमंत्रण स्वीकार करते हुए उन्हें चिठ्ठी लिखका हामी भर दी है। अब गुजरात के दो चेहरे होंगे। नरेंद्र मोदी और अमिताभ बच्चन। दरअसल, ये डील तो उसी दिन पक्की हो गई थी जिस दिन अमिताभ बच्चन अपनी फिल्म “पा” के प्रमोशन के लिए गुजरात पहुंचे और नरेन्द्र मोदी और उनकी पूरी कैबिनेट के लिए फिल्म “पा” की स्पेशल स्क्रीनिंग की। उस दिन “पा” और गुजरात के हिंदुवादी “पा” मोदी की झप्पियां डालते हुए तस्वीर देखकर यूं लगा कि कुंभ के मेले में बिछड़े भाई सालों बाद मिले हों। Read more

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डरे हुए मोदी जनता की हर सांस पर पहरा बिठाना चाहते हैं

गुजरात विधानसभा में नगरपालिका चुनावों में कम्पल्सरी (अनिवार्य) वोटिंग का बिल ध्वनिमत से पास हुआ। वोटिंग होती भी तो सदन में ये बिल पास कराना सरकार के लिए मुश्किल नहीं था। लेकिन सवाल ये है कि आखिर कम्पल्सरी वोटिंग से क्या हासिल करना चाहती है मोदी सरकार? क्या दूसरी राज्य सरकारें या केन्द्र भी इस तरह का कानून लाएगा इस पर बहस छिड़ गयी है।

ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और स्विट्जरलैंट जैसे देशों में अनिवार्य वोटिंग का कानून है। ऑस्ट्रेलिया में ये लगभग सौ साल पुराना कानून है जिसकी कहानी भी दिलचस्प है। पहली बार ऑस्ट्रेलिया में ये कानून 1914 में बना जब लिबरल पार्टी की सरकार थी। और ये कानून इसलिए बना क्योंकि उस साल क्वीन्सलैंड राज्य में चुनाव का वोट प्रतिशत 75 फीसदी था। और अगले साल यानि 1915 में देश में चुनाव होने वाले थे। लिबरल पार्टी को ये डर था कहीं लेबर पार्टी बाजी न मार ले जाए क्योंकि लेबर पार्टी के वोटर ज्यादा संगठित थे। इस कारण लिबरल पार्टी ने ये कानून बनाया मगर अगले साल के चुनाव में वो लेबर पार्टी से हार ही गयी। कहीं ऐसा तो नहीं कि लोक सभा में हार झेलने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अब बीजेपी के शहरी वोटर के दरकने का ख़तरा नज़र आ रहा है। Read more

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नरेंद्र मोदी और राज ठाकरे से कम नहीं हैं शीला दीक्षित

November 19, 2009 by अरविंद शेष  
Filed under पहरेदार

राज ठाकरे और उनके गुर्गों के बर्ताव और पागलपन से बहुत सारे लोगों को दुख हो रहा होगा। लेकिन क्या कभी इस ओर भी ध्यान गया है कि लोकतंत्र की चादर ओढ़े कांग्रेसी सरकार दिल्ली को क्या बनाने की योजना पर काम कर रही है?  राज ठाकरे की उछल-कूद महज तात्कालिक ज्वार है, जिससे अगर ‘स्टेट’ नहीं निपट सका तो ‘जनता’ निपट लेगी। लेकिन दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार जिस रणनीति पर काम कर रही है, वह राज ठाकरे टाइप राजनीति नहीं है, जो सामने से दिख जाए। असर के स्तर पर वही होगा, जो राज ठाकरे टाइप राजनीति का मकसद है। बल्कि और भी स्थायी नतीजों के साथ होगा। और बुरा भी नहीं लगेगा। बुरा या अच्छा लगना सिर्फ उनका मायने रखता है, जो ‘सभ्य’ और ‘संभ्रांत’ हैं। Read more

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“हथेली पर फसल उगाने लगे हैं नरेंद्र मोदी”

गुजरात से सारे गांवों का नामोनिशान मिटा दिया गया है। अब वहां एक भी गांव नहीं है। ये हम नहीं कह रहे और न ही गुजरात की बीजेपी सरकार के किसी विरोधी ने ऐसा आरोप लगाया है। ये जानकारी तो खुद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी है। वो भी देश के तमाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की साझा बैठक में। देश भर के गांवों में ग्रामीण न्यायालय बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मोदी ने दावा किया कि उनके गुजरात में तो एक भी गांव नहीं है, लिहाजा ग्रामीण न्यायालयों की कोई ज़रूरत ही नहीं है। अगर आपको यकीन नहीं आ रहा, तो आप सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर बैठक की कार्यवाही देखने के लिए यहां क्लिक  कर सकते हैं। Read more

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“मोदी”गान के जरिए आलोक मेहता बना रहे हैं “नई दुनिया”!

बड़ा पत्रकार होने के लिए बड़ा दिल चाहिए। आलोक मेहता के जितना बड़ा दिल। वो एक ही साथ कांग्रेस और बीजेपी दोनों की तारीफ कर सकते हैं। प्रतिभा पाटिल की शान में कसीदे पढ़ने के साथ नरेंद्र मोदी को भी साध सकते हैं। यह बहुत बड़ा हुनर हैं। और आलोक मेहता जैसे कई बड़े पत्रकार इस हुनर में माहिर हैं। आलोक मेहता ने अपने इसी हुनर का ताज़ा उदाहरण एक दिन पहले दिया है। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को उदारवादी और अल्पसंख्यक प्रेमी करार दिया है।

रविवार को नई दुनिया में छपे अपने स्तंभ में आलोक मेहता ने बताया है कि हाल में गुजरात विधानसभा की सात सीटों पर हुए उपचुनाव में पांच पर बीजेपी को कामयाबी नरेंद्र मोदी की उदार नीतियों के कारण मिली है। उनके अल्पसंख्यक प्रेम ने उनकी छवि बदल दी है और अब गुजरात के मुसलमान भी नए नरेंद्र मोदी को गले लगा रहे हैं। आगे बढ़ने से पहले आप आलोक मेहता उवाच पर एक नज़र डालें। – Read more

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गुजरात दंगों में मोदी की भूमिका की जांच शुरू

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित विशेष जांच दल (एसआइटी) ने गुजरात दंगों के सिलसिले में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों और अन्य आला अफसरों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। एसआईटी ने इस दौरान मोदी से पूछताछ किए जाने से इनकार नहीं किया है।

एसआईटी के प्रमुख आर के राघवन ने गांधीनगर में पत्रकारों को बताया कि गुजरात के कुछ बड़े राजनेताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर ज़ाकिया जाफरी की अर्जी पर जांच शुरू हो चुकी है।

दंगों के दौरान अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में मारे गए पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी ज़ाकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि गुजरात दंगों के दौरान मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 63 लोगों की भूमिका की जांच की जाए।

राघवन ने बताया कि एसआईटी ने दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसायटी में हुए कत्लेआम पर शिकायतकर्ता ज़ाकिया जाफरी का पक्ष सुन लिया है। अब आगे की जांच पूरे निष्पक्ष ढंग से की जाएगी। गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसायटी में एहसान जाफरी समेत तीन दर्जन से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी गयी थी।

इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने दंगे के मुकदमों से जुड़े 96 चश्मदीद गवाहों को केंद्रीय बलों की सुरक्षा दिए जाने की मांग की है। तीस्ता के मुताबिक एसआईटी चीफ राघवन ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि गवाहों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

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