“फिर मिलेंगे क्योंकि शो अभी जारी है”

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जहां किसी ने चंद लम्हे बिताए हों उस जगह से खुद-ब-खुद एक रिश्ता कायम हो जाता है। फिर शशि शेखर ने तो अमर उजाला में सात साल बिताए हैं। उस संस्थान से उनका रिश्ता कितना मजबूत होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। हिंदुस्तान में नई पारी शुरू करने से पहले अमर उजाला के समूह संपादक ने साथियों को विदाई संदेश भेजा। दिल को छू लेने वाला विदाई संदेश। आप सब वो संदेश पढ़िए। इस संदेश का सार यही है कि ज़िंदगी सूदखोर महाजन की तरह है। वो बिना कीमत वसूले किसी को कुछ नहीं देती।
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छंटनी पसंद नहीं, कोशिश होगी सब साथ चलें- शशि शेखर

September 3, 2009 by Samrendra  
Filed under स्पेशल रिपोर्ट

अमर उजाला के समूह संपादक शशि शेखर शुक्रवार से हिंदुस्तान की ज़िम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। अमर उजाला ने उनकी अगुवाई में एक लंबा सफ़र तय किया। कई मौकों पर आदर्श भी प्रस्तुत किया है। हाल ही में चुनाव के दौरान जब बहुत से मीडिया संस्थान नेताओं के आगे-पीछे घूम रहे थे और पैकेज का खेल खेल रहे थे तो अमर उजाला ने इस राह पर चलने से इनकार कर दिया। यह एक साहसिक फ़ैसला रहा और इसके लिए अमर उजाला की तारीफ़ की जाती है। हिंदुस्तान में एडिटर इन चीफ की जिम्मेदारी संभाले से ठीक पहले शशि शेखर ने जनतंत्र से तमाम मुद्दों पर खुल कर बात की। अमर उजाला में मिले अनुभव साझा किये। अपनी ज़िंदगी और अपने डर पर बात की। इन सबके बीच जो सबसे अहम बात निकल कर आई वो यह कि हिंदुस्तान से कोई निकाला नहीं जाएगा। शशि शेखर हिंदुस्तान अकेले जा रहे हैं और फिलहाल कोई नई टीम ले जाने का इरादा नहीं है। आप उनका इंटरव्यू पढ़िए और अपनी प्रतिक्रिया दीजिए। Read more

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हिंदुस्तान में डरे हुए हैं मृणाल समर्थक

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हिंदुस्तान से मृणाल पांडे की विदाई हो गई है। उनकी विदाई के बाद वहां पर उनके करीबी कर्मचारियों में डर का माहौल है। हिंदुस्तान के सूत्र बताते हैं कि मृणाल पांडे की सत्ता में मलाई खाने वाले कई कर्मचारी उनकी फेयरवेल पार्टी से गायब थे। शायद वो अभी से अपने दामन पर लगे मृणाल पांडे के लेबल को हटाने की कोशिश में जुट गए हैं।

हिंदुस्तान के सूत्रों ने बताया कि मृणाल पांडे ने विदाई भाषण में कर्मचारियों से गुजारिश की है कि वो इस्तीफा नहीं दें। लेकिन यह सवाल तो तब उठता जब कोई मृणाल समर्थक शशि शेखर की नियुक्ति का विरोध करते हुए उनके साथ इस्तीफ़ा दे देता। सच तो यही है कि किसी ने अभी तक इस्तीफ़े की पेशकश नहीं की है। Read more

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“अपनी गलतियों के कारण हुई मृणाल पांडे की विदाई”

“मेरे इस्तीफे की तात्कालिक वजह हिंदुस्तान में एक जूनियर मोस्ट कर्मचारी को प्रमोशन देकर कई सीनियर संवादाताओं से ऊपर बिठा देना है। ये प्रमोशन एक क्षेत्र विशेष को ध्यान में रख कर दिया गया है और मैं इसका विरोध करता हूं।”

हिंदुस्तान से इस्तीफ़ा देते वक़्त अनूप भटनागर ने कुछ ऐसी ही पंक्तियां लिखीं थी। अनूप इस वक़्त नई दुनिया में लीगल एडिटर हैं। उससे पहले वो हिंदुस्तान में ही सीनियर स्पेशल करस्पॉन्डेंट के तौर पर काम कर चुके हैं। लेकिन जब मृणाल पांडे ने उनसे जूनियर उमाकांत लखेड़ा को उनसे ऊपर बिठाया तो वो बर्दाश्त नहीं कर सके। अनूप बताते हैं कि उसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान से इस्तीफ़ा दे दिया। जाने से पहले उनका एग्जिट इंटरव्यू हुआ और उसी इंटरव्यू में मैनेजमेंट के सामने अनूप भटनागर ने ये बात रखी थी। Read more

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हिंदुस्तान से मृणाल पांडे की विदाई

हिंदुस्तान से प्रमुख संपादक मृणाल पांडे की विदाई हो गई है। अमर उजाला के समूह संपादक शशि शेखर अब हिंदुस्तान के प्रमुख संपादक का कार्यभार संभालेंगे। मृणाल पांडे के इस्तीफ़े की वजह भी शशि शेखर की नियुक्ति बताई जा रही है। शशि शेखर की नियुक्ति मृणाल पांडे को बताए बगैर की गई है, जिससे नाराज़ होकर उन्होंने अपना इस्तीफ़ा मैनेजमेंट को सौंप दिया। बताया जा रहा है कि उनका इस्तीफ़ा मंजूर कर लिया गया है। Read more

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राज्यसभा की रेस में हैं कई दिग्गज पत्रकार!

राज्यसभा से बीते हफ़्ते मनोनीत सदस्यों की विदाई हो गई। विदा होने वालों में चंदन मित्रा भी रहे। राज्यसभा से जिस दिन विदाई हुई बताया जाता है कि चंदन मित्रा भावुक हो गए। सत्ता और भावुकता के बीच रिश्ता ही कुछ ऐसा है। जो कोई भी सत्ता से जाता है वो भावुक हो जाता है। लेकिन यहां मुद्दा भावुकता का नहीं है। मुद्दा है कि फिर से कुछ नामी गिरामी चेहरे राज्यसभा के लिए मनोनीत होने वाले हैं। चंदन मित्रा के जाने से जो स्थान खाली हुआ है उसे भरने के लिए कई बड़े पत्रकारों के नाम चर्चा में हैं। सत्ता के गलियारों से छन छन कर जो ख़बर आ रही है, उसके मुताबिक शेखर गुप्ता, आलोक मेहता, वीर सांघवी, विनोद मेहता , पंकज वोहरा और मृणाल पांडे राज्यसभा की रेस में हैं। Read more

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