हादसे में पत्रकार अक्षय कुमार समेत तीन की मृत्यु

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भोपाल से उज्जैन के रास्ते में खजूरी के पास एक दुर्घटना में हिंदुस्तान टाइम्स रांची के प्रभारी अक्षय कुमार की मृत्यु हो गई है। इस हादसे में उनकी पत्नी अनिता और उनके मित्र उमेश सिंह का भी निधन हो गया। दुर्घटना में उमेश सिंह की पत्नी अभिलाषा सिंह और पुत्र सुभांकित घायल हो गए। उनका उपचार एक निजी अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक दोनों ख़तरे से बाहर हैं।

अक्षय कुमार और उनके मित्र उमेश सिंह रांची के रहने वाले थे। मध्यप्रदेश शासन ने उनके पार्थिव शरीर को रांची भिजवाने की व्यवस्था की। भोपाल के पत्रकारों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

((स्रोत – एमपी पोस्ट))

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पैंट पहने के “जुर्म” में कोड़ों से राहत, पर जाना होगा जेल

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पत्रकार लुबना अहमद अल हुसैन की हिम्मत और हौसलों से अदालत भी डर गई। तभी तो सूडान की अदालत ने दोषी ठहराने के बाद भी उन्हें कोड़ों की सज़ा से मुक्त कर दिया। अदालत ने लुबना से 200 डॉलर का जुर्माना भर कर घर जाने को कहा। लेकिन महिलाओं के हक़ की लड़ाई लड़ रही लुबना ने अदालत से कह दिया कि वो एक दमड़ी भी नहीं देंगी। जिसके बाद उन्हें एक महीने कैद की सज़ा सुनाई गई।

34 साल की पत्रकार लुबना को जुलाई में एक रेस्त्रां से 12 दूसरी महिलाओं के साथ गिरफ़्तार किया गया था। उस दिन वो सभी एक संगीत कार्यक्रम का लुत्फ उठा रही थीं और उन्होंने पैंट पहन रखी थी। सूडान में महिलाओं को पैंट पहनने की इजाजत नहीं है। वहां पैंट पहनना अभद्र बर्ताब के दायरे में आता है। गिरफ़्तार की गई 13 महिलाओं और लड़कियों में 10 ने गुनाह कबूल कर लिया। जिसके बाद थाने में उन सभी पर 10-10 कोड़े बरसाए गए और 250 सूडानी पाउंड का जुर्माना लगाया गया और फिर रिहा कर दिया गया। लेकिन लुबना और दो दूसरी महिलाओं ने गुनाह नहीं कबूल किया। Read more

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“40 हज़ार कोड़े सह सकती हूं, अपमान नहीं”

लुबना हुसैन, पत्रकार, सूडान

लुबना हुसैन, पत्रकार, सूडान

“मैं इस मामले को ऊपरी अदालत तक ले जाऊंगी। अगर जरूरत पड़ी तो संविधान पीठ तक। अगर वहां भी मुझे गुनहगार ठहराया गया तो मैं चालीस कोड़े खाने को तैयार हूं। सिर्फ चालीस क्यों, मैं चालीस हज़ार कोड़े खाने को तैयार हूं। अगर सभी महिलाएं सिर्फ पहनावे को लेकर कोड़े खाने की हक़दार हैं तो मुझ पर भी चालीस हज़ार कोड़े बरसाए जाएं।” Read more

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इंसाफ़ की आस में असम बंद असरदार

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उधार - असम टाइम्स

उधार - असम टाइम्स

असम में पत्रकार पराग दास हत्याकांड के आरोपी को रिहा करने के ख़िलाफ़ मानवाधिकार संगठनों और पत्रकार संगठनों के बंद का व्यापक असर देखा गया। पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता पराग दास की हत्या 13 साल पहले कर दी गई थी। मृदुल फूकन को उनकी हत्या का आरोपी बनाया गया था। लेकिन सेंशन्स कोर्ट ने अपने फ़ैसले में उसे बेकसूर ठहराते हुए बरी कर दिया। मानवाधिकार संगठनों में इस बात को लेकर काफी रोस है। उसी के ख़िलाफ़ उन्होंने बंद का एलान किया था। Read more

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मीडिया की आधी आबादी का सच

“अंग्रेजी पत्रकार की जिन बातों को हिंदी पत्रकार उसके गुण बताते, उन्हीं बातों को वे अपनी सहकर्मी के चरित्र हनन का औजार बना लेते। मसलन, अंग्रेजी पत्रकार बोले तो तेज-तर्रार और अपनी सहकर्मी बोले तो बदतमीज। अंग्रेजी पत्रकार अपने हकों के लिए लड़े तो जुझारू और हिंदी पत्रकार का आवाज़ उठाना शोशेबाजी। इस तरह की अनेक त्रासदियां महिला पत्रकार को जाने-अनजाने झेलनी पड़ती। महिला पत्रकार के साथ एक कप चाय पीकर धन्य हो जाने वाले साथी उसके प्रमोशन की बात उठते ही बैरी बन जाते हैं।” – वरिष्ठ पत्रकार इरा झा ने अपनी ज़िंदगी के कुछ अनछुए पन्नों को सामने रख कर कई बड़े सवाल उठाए हैं। ये सिर्फ़ उनका सच नहीं बल्कि हिंदी पत्रकारिता से जुड़ी तमाम महिलाओं का है जिन्हें हर रोज मर्दों की बनाई इस दुनिया में अपने हक़ की लड़ाई लड़नी पड़ती है। ये वो सच है जिससे हम और आप नज़रें तो चुरा सकते हैं, लेकिन उसे झुठला नहीं सकते। इरा झा की ये दास्तान सामयिक वार्ता के मीडिया विशेषांक से साभार आपके सामने है… आप पढ़िए और बताइए कि क्या ये सच नहीं है?

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अमेरिकी पत्रकार रुक्साना रिहा

ईरान में गिरफ़्तार पत्रकार रुक्साना साबेरी को रिहा कर दिया गया है। ईरानी मूल की रुक्साना को अमेरिकी नागरिकता भी हासिल है। ईरान में उन्हें जासूसी के आरोप में अदालत ने आठ साल कैद की सज़ा सुनाई थी। लेकिन अब अपील कोर्ट ने सज़ा घटा कर दो साल कर दी है और उस पर अमल को पांच साल के लिए निलंबित कर दिया है। इस फैसले से अब रुक्साना अमेरिका लौट सकेंगी। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस फैसले का स्वागत किया है। Read more

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श्रीलंका में चैनल-4 की टीम गिरफ़्तार

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ltte-bodies-200ब्रिटेन के “चैनल-4” की न्यूज़ टीम को श्रीलंका में गिरफ्तार कर लिया गया। उसके बाद पूरी टीम को श्रीलंका से बाहर जाने का हुक्म दे दिया गया है। राजपक्षे सरकार ने चैनल-4 पर प्रसारित एक ख़बर के बाद उसकी टीम को ये फरमान सुनाया है। चैनल-4 की ख़बर में तमिल शरणार्थी शिविरों में हो रहे जुल्म का ब्योरा दिया गया था।

चैनल-4 की वेबसाइट पर छपी ख़बर के मुताबिक रिपोर्टर निक पाटॉन, कैमरामैन मैट जैस्पर और प्रोड्यूसर बेसी ड्यू की टीम 19 अप्रैल से श्रीलंका के युद्धक्षेत्र से ख़बरें भेज रही थी।
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पत्रकार बनना चाहते हैं अमिताभ

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amitabh-200बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन पत्रकार बनना चाहते हैं। अमिताभ बच्चन का कहना है कि 70 के दशक में उन्होंने कई इंटरव्यू में कहा था कि वो अगले जन्म में पत्रकार बनना चाहते हैं। अमिताभ बच्चन का मीडिया से प्यार और नफ़रत दोनों रिश्ता रहा है। वो कई बार अपने ब्लाग पर मीडिया की आलोचना कर चुके हैं। लेकिन इस बार अमिताभ का कहना है कि पत्रकारिता एक बेहद मुश्किल काम है और कई बार आप अपनी सोच के ख़िलाफ़ जा कर काम कर करते हैं। अमिताभ बच्चन ने ये बात अपनी अगली फिल्म रण के प्रचार के दौरान कही। भारतीय मीडिया पर बनी इस फिल्म में अमिताभ बच्चन एक न्यूज चैनल के हेड की भूमिका निभा रहे हैं। इसके निर्देशक हैं राम गोपाल वर्मा।

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पाकिस्तान में पत्रकार ख़तरे में

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taliban-2001पाकिस्तान में पत्रकारों पर ख़तरा मंडरा रहा है। बीते दो महीने में वहां तीन पत्रकारों की हत्या हो चुकी है और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सलाहकार रहमान मलिक के मुताबिक आतंकवादी और कई पत्रकारों की हत्या की साज़िश रच रहे हैं। Read more

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