क्या मुंबई हमले में आईएसआई का हाथ नहीं था?

संसद में शर्म अल-शेख के ज्वाइंट स्टेटमेंट पर जवाब देते हुये प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें विपक्षी पार्टियों से विदेश नीति चलाने का पाठ नहीं पढ़ना है। लेकिन जो पिछले साठ साल में भारत-पाक विदेश नीति में कभी नहीं हुआ, वो गिलानी के साथ चंद मिनटों की मुलाकात में मनमोहन सिंह ने कर दिखाया। 26 नवंबर को मुंबई में आतंकवादी हमले के बाद पहला मौका था जब दोनो देश ज्वाइंट स्टेटमेंट पर राजी हुए। मगर ज्वाइंट स्टेटमेंट के प्रारूप से ये लगा मानो मुंबई पर हमला आईएसआई और मुजाहिद्दीनों की मिलीभगत से नहीं बल्कि रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ ने करवाया हो जिसके लिये प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह गिलानी को सबूत देने शर्म अल-शेख में मिले हों। Read more

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पाठकों को धोखा दे रहा है “हिंदुस्तान”

हिंदुस्तान (17 और 18 जुलाई)

हिंदुस्तान (17 और 18 जुलाई)

“हिंदुस्तान” के कुछ फैसले चौंकाने वाले होते हैं। उन्हें “सामान्य समझ” रखने वाले पाठक नहीं समझ सकेंगे। जैसे मैं नहीं समझ पा रहा हूं। इसके लिए शायद कुछ “ज़्यादा ज्ञान” की जरूरत हो जो मुझमें नहीं है। लेकिन एक पाठक होने के नाते मुझे ये पूरा हक़ है कि अपनी नादानी की वजह से ही जो मेरे मन में सवाल उठ रहे हैं उन्हें सबके सामने जाहिर करूं। बीते दो दिन में हिंदुस्तान ने दो बड़े फ़ैसले लिये। बाकी तमाम हिंदी अख़बारों से अलग फ़ैसले लिए। किस मंशा से… किन वजहों से… सही-सही तो वहां के संपादक ही बता सकेंगे। हम और आप बस एक विश्लेषण कर सकते हैं। Read more

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