गूगल को चीन का करारा जवाब
January 15, 2010 by जनतंत्र डेस्क
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चीन ने सर्च इंजन गूगल की धमकी का जवाब दे दिया है। चीन ने कहा है कि चीन ने कहा है कि वह कारोबार को बढ़ावा देता है लेकिन चीन में कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों को वहां के कानून मानने ही होंगे। किसी भी विदेशी कंपनी को मनमानी की छूट नहीं जी सकती है।
दो दिन पहले गूगल ने चीन से बाहर निकलने की धमकी दी। गूगल के मुताबिक उसके ग्राहकों के ई-मेल हैक किए जा रहे हैं। ऐसी एक दो नहीं बल्कि दर्जनों शिकायतें हैं जिनमें मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के व्यक्तिगत ई-मेल हैक किए गए और फिर गोपनीय दस्तावेज चुराए गए। यह सब चीन सरकार के इशारे पर हो रहा है ऐसे में या तो चीन हैकिंग को रोकने के लिए कोई ठोस उपाय करे या फिर वो चीन से बाहर चला जाएगा। Read more
गुड बाय गूगल
January 15, 2010 by जनतंत्र डेस्क
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चीन में बीजिंग के गूगल हेडक्वार्टर के बाहर ढेरों ढेर संदेश, फूल और फल गूगल का इस्तेमाल करने वालो ने रखे हैं. गूगल यूज़र्स चीन की वेब सेंसरशिप का विरोध कर रहे थे.
“गुड बाय गूगल. आप दीवार बना सकते हैं लेकिन आप उसे लोगों के दिलों से नहीं निकाल सकते. हम दीवार, चीन के फायरवॉल (दीवार) के दूसरे हिस्से को देखना चाहते हैं.”
गूगल के मुख्यालय के बाहर एक व्यक्ति ने लिखा है, तो दूसरे ने अपने संदेश में कहा है कि “मैं नहीं जानता कि मैं गूगल के बग़ैर क्या करूंगा. मैं यहां गूगल के लिए अपना आदर प्रकट करने यहां आया हूं.” Read more
गूगल लगाएगा मुफ़्त ख़बर पर लगाम
December 2, 2009 by अनवर जमाल अशरफ़
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इंटरनेट पर गूगल की चौपाल बंद होने वाली है. मुफ़्त में कहीं भी, कितनी भी ऑनलाइन ख़बरें पढ़ने के आदी हो चुके लोगों के लिए मुश्किल खड़ी होने वाली है. मीडिया हाउसों के दबाव के बाद गूगल यूज़र के लिए समाचारों को सीमित करेगा.
गूगल ने बताया कि जल्दी ही ऐसी व्यवस्था क़ायम की जाएगी, जिससे इंटरनेट यूज़र ऑनलाइन बेहिसाब ख़बरें नहीं पढ़ पाएगा. उन्हें कुछ सीमित रिपोर्टें पढ़ने का मौक़ा मिल सकेगा. लेकिन इसके बाद उन्हें प्रकाशकों के वेबसाइट पर रजिस्टर करना होगा या फिर इसकी फ़ीस देनी होगी. Read more
इंटरनेट पर किताबों के अधिकार को लेकर कानूनी लड़ाई
November 5, 2009 by जगदीश्वर चतुर्वेदी
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अमेरिका के लेखक गिल्ड का मुकदमा इन दिनों न्यूयॉर्क जिले के दक्षिण में स्थित एक अदालत में चल रहा है। यह मुकदमा किताब का भविष्य तय करने वाला है। भविष्य में किताब किसकी होगी, खासकर नेट पर उपलब्ध होने वाली डिजिटल किताब का अंतत: मालिक कौन होगा, उसका विश्व जनमत और लेखक के कॉपीराइट पर क्या असर होगा। आज सभी बौद्धिकों के सामने यह गंभीर समस्या आ खडी हुई है। यह सुनवाई 7 अक्टूबर 2009 को होने वाली थी जिसे लेखक संघ के अनुरोध पर स्थगित कर दिया गया था अब यह सुनवाई आगामी 6 नबम्वर 2009 को होने जा रही है। जिला जज डेनी चिन से डिजिटल किताब समझौते के विरोधियों ने मांग की है कि इस समझौते को रद्द किया जाए। उल्लेखनीय है यह केस सन् 2005 से चल रहा है और इसमें प्रकाशकों, लेखकों और गूगल के बीच में एक समझौता भी हो गया है जिसे कई लोगों ने अदालत में जनहित का मामला बनाकर चुनौती दी है। Read more
ख़बर चाहिए तो पैसे दो
October 10, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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न्यूज़ कॉर्प के मालिक रुपर्ट मर्डोक और एसोसिएटेड प्रेस के चीफ टॉम कर्ले ने इंटरनेट पर कंटेंट के लिए पैसे वसूलने की मुहिम तेज कर दी है। इसके लिए उन्होंने गूगल जैसे सर्च इंजनों पर दबाव बढ़ा दिया है। बीजिंग में वर्ल्ड मीडिया सम्मेलन में उन्होंने आक्रामक ढंग से अपनी बात रखी। ख़बरों के मुताबिक सम्मेलन में रुपर्ट मर्डोक और एसोसिएटेड प्रेस के चीफ टॉम कर्ले ने कहा कि गूगल जैसे एग्रीगेटरों और उनके कंटेंट की नकल करने वाली कंपनियों को जल्दी ही उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
रुपर्ट मर्डोक ने सम्मेलन में मौजूद सभी लोगों से कहा कि वक़्त आ गया है जब इंटरनेट पर मौजूद कंटेंट के लिए पैसे वसूले जाएं। अगर यह तय नहीं किया गया तो इसकी कीमत न्यूज़ कॉर्प जैसी कंपनियां चुकाएंगी जबकि चोर मौज करेंगे। एसोसिएटेड प्रेस के चीफ टॉम कर्ले ने कहा कि अब यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता कि वो पैसे लगा कर और मेहनत के जरिए लोगों के लिए सूचना जमा करे और दूसरे उनकी मेहनत और पैसे के बल पर मुनाफा कमाएं। Read more
गूगल के “G” बन गए गांधी
October 2, 2009 by कबीर
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आज दो अक्टूबर है और आधी रात से गूगल पर महात्मा गांधी नज़र आने लगे हैं। गूगल ने उन्हें अपना “जी” (google – का पहला g) बना दिया है। टेलीविजन चैनलों पर भी आज महात्मा गांधी को सजाया और बेचा जाएगा। कहीं गांधी पर फिल्में दिखाई जाएंगी। तो न्यूज़ चैनलों उनके जीवन पर विशेष बनाएंगे। अख़बारों में तो एक दिन पहले से ही उन्हें याद किया जाने लगा है। एक दिन के लिए बुजुर्ग गांधीवादियों की डिमांड बढ़ गई है। मेरे पास भी एक दो फोन आ चुके हैं कि कोई गांधीवादी जान-पहचान का हो तो बताना। उन्हें स्टूडियो बुलाना है। भोर होने के साथ ही देखिएगा नेता लोग राजघाट जाकर उनकी समाधि पर फूल चढ़ा आएंगे। इस रस्मअदायगी में कोई भी पीछे नहीं रहेगा। Read more
“गूगल के गणराज्य” में प्रभाष जोशी के महानायकत्व का अंत!
September 10, 2009 by दिलीप मंडल
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आप कह सकते हैं कि क्या फर्क पड़ता है। लेकिन फर्क पड़ता है। और खूब पड़ता है। क्या आपको ये बात चौंकाती है कि गूगल पर “प्रभाष” सर्च करने पर पहले 20 रिजल्ट में 12 रिजल्ट उनके ब्राह्मणवाद और सती के समर्थन में किए गए लेखन और उसपर आई प्रतिक्रिया से जुड़े हैं। ये सर्च 9 सितंबर 2009 बुधवार को दोपहर बाद एक बजे किया गया था। आप भी सर्च करके देखिए इससे मिलते जुलते नतीजे आएंगे।
20 में से 12 यानी 60 फ़ीसदी। तो ये है असर इंटरनेट पर एक मुद्दे को उठाने का। आज दुनिया के किसी भी कोने में बैठा आदमी प्रभाष जी के बारे में जानने की कोशिश करेगा तो उसके पास सबसे प्रभावी औजार गूगल ही है। और गूगल पर जब वो जाएगा, तो उसे प्रभाष जोशी की एक खंडित प्रतिमा मिलेगा। उसे एक ऐसे विवाद की भी जानकारी मिलेगी, जिस पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। इस विवाद के कवरेज से उसे प्रभाष जोशी के बारे में एक और पक्ष का पता चलेगा। आप कह सकते हैं कि इस विवाद के नेट पर आने के साथ ही सर्वमान्य महानायक प्रभाष जोशी की सर्वमान्यता और महानायकत्व का अंत हो गया है। Read more
गूगल का नया सर्च इंजन और फेसबुक की ललकार
August 12, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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गूगल का नया सर्च इंजन “कैफीन”

गूगल ने एक बड़े राज़ से पर्दा उठा दिया है। गूगल की टीम पिछले कई महीने से एक नए सर्च इंजन पर काम कर रही है। एक ऐसा सर्च इंजन जो नई पीढ़ी की जरूरत के हिसाब से हो। इसके लिए गूगल ने चुपके से फीडबैक मंगाने शुरू कर दिया है। वेबसर्च के इस नए सिस्टम का नाम कैफीन रखा गया है। Read more
इंटरनेट पर भी ख़बरों के लिए चुकाने पड़ेंगे पैसे!
August 8, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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पैसा दो, ख़बर लो
फाइनेंशियल टाइम्स ने एलान किया है कि उसकी वेबसाइट पर अगले साल की गर्मियों तक पे-पर-व्यू (हर ख़बर के लिए कीमत) की योजना पूरी तरह से लागू हो जाएगी। कंपनी के मुताबिक इस पर विचार किया जा रहा है कि क्या ग्राहकों को कोई भी कंटेंट मुफ़्त दिया जाए या नहीं। अभी फाइनेंशियल टाइम्स के रजिस्टर्ड यूजर हर महीने 20 ख़बरों को मुफ़्त में हासिल कर सकते हैं। ऐसे रजिस्टर्ड यूजर्स की संख्या करीब 14 लाख है। अगर कोई बीस ख़बरों से अधिक जानकारी चाहता है तो उसके लिए उसे पैसे चुकाने पड़ते हैं। अभी अख़बार पर दो दरें लागू हैं। सालाना 150 डॉलर और 199 डॉलर। 199 डॉलर चुकाने वाले ग्राहकों को कुछ ऐसी एक्सक्लूसिव जानकारियां दी जाती हैं जो उनका निवेश और कारोबार बढ़ा सकें। Read more
अब गूगल की खैर नहीं!
July 29, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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याहू और माइक्रोसॉफ्ट की यारी
साइबर स्पेस में अब लड़ाई और रोमांचक हो गई है। गूगल को चुनौती देने के लिए दो धुरंधरों माइक्रोसॉफ्ट और याहू ने हाथ मिला लिया है। बुधवार को हुए करार के मुताबिक दोनों मिल कर ऑनलाइन सर्च में गूगल को टक्कर देंगे।
दस साल के लिए हुए इस समझौते में याहू.कॉम अब माइक्रोसॉफ्ट के नए सर्च इंजन बिंग का इस्तेमाल करेगा। दोनों को उम्मीद है कि इससे याहू पर विज्ञापन क्षेत्र की बड़ी कंपनियां आकर्षित होंगी। इस करार से जो भी आमदनी होगी माइक्रोसॉफ्ट उसमें से 88 फीसदी याहू को दे देगा। Read more



