क्या बचेगी हिंदी? जानिए संपादकों की राय

नई दिल्ली, 24 सितंबर।

हिंदी के भविष्य को लेकर देश के कुछ संपादक चिंतित हैं तो कुछ उम्मीदों से भरे हुए हैं. संपादकों की राय में हिंदी के भविष्य को लेकर रुदन करने के बजाय उन चुनौतियों से निपटने और मौजूदा समय की ज़रूरतों के अनुसार हिंदी को तैयार करने की आवश्यकता है. ये राय भारतीय जनसंचार संस्थान के हिंदी पत्रकारिता विभाग में ‘हिंदी का भविष्य बनाम भविष्य की हिंदी’ विषय पर हुई गोष्ठी में सामने आई. गोष्ठी में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के वरिष्ठ संपादकों ने हिस्सा लिया.

गोष्ठी का बीज वक्तव्य रखते हुए सीएनईबी के सीईओ और प्रधान संपादक राहुल देव ने हिंदी समेत सभी भारतीय भाषाओं के भविष्य को लेकर गहरी चिंता जताई। उनका कहना था कि 2050 तक सारा भारत लिखने, पढ़ने जैसे सारे गंभीर काम अंग्रेज़ी में कर रहा होगा। इससे देसी भाषाओं का अस्तित्व ख़तरे में पड़ जाएगा और भारत की सांस्कृतिक पहचान भी नहीं बचेगी. राहुल देव के मुताबिक़ ऐसे हालात में हम सिर्फ़ अमेरिकन क्लोन बनकर रह जाएंगे. Read more

  • Share/Save/Bookmark