मुझे तुम्हारे किसी सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं: विभूति
February 20, 2010 by विभूति नारायण राय
Filed under स्पेशल रिपोर्ट
विभूति नारायण राय दलित विरोधी नहीं हैं। अंकित चोर गुरू नहीं हैं। उनके ख़िलाफ़ यह दुश्मनों की साज़िश है। दलित छात्र राहुल कांबले को नियमों के आधार पर दाखिला नहीं मिला। दलित प्रोफेसर लैला कारुण्यकारा को नोटिस ब्राह्मणों को मां-बहन की गालियां देने की वजह से भेजा गया। विभूति को दलित वादी और धर्मनिरपेक्ष साबित करने के लिए किसी सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में चल रही गड़बड़ियों पर उसके कुलपति विभूति नारायण राय के इंटरव्यू का आज दूसरा हिस्सा। इस हिस्से में और भी बहुत कुछ बातें और कुछ बौखहालटें हैं। आप इस इंटरव्यू को पढ़िये और अपनी प्रतिक्रिया दीजिए। – मॉडरेटर
अनिल चमड़िया को निकाल कर ग़लती सुधार दी: विभूति
February 8, 2010 by विभूति नारायण राय
Filed under स्पेशल रिपोर्ट
विभूति नारायण राय। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति। एक सीनियर आईपीएस अफ़सर। सेकुलर साहित्यकार और जनवादी लेखक। लेकिन अब ये सारी छवियां टूटती नज़र आ रही हैं। बीते कुछ महीनों में उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय में जो कुछ भी घटित हुआ, उससे विभूति नारायण राय पर दलित विरोधी होने का आरोप लगा। एक ईमानदार प्रोफेसर को साज़िशन हटाने और एक दलित प्रोफेसर को मानसिक यंत्रण देने का आरोप लगा। साथ ही जातिवादी ज़हर फैलाने का आरोप भी लगा।
इन सभी आरोपों पर वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल, मोहल्लालाइव के संपादक अविनाश और जनतंत्र की तरफ़ से समरेंद्र ने उनसे बात की। विभूति नारायण राय ने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में तीनों को इंटरव्यू दिया। सभी सवालों का उन्होंने कभी शांत भाव से तो कभी गुस्से में जवाब दिया। बीच-बीच में वो यह भी जताते रहे कि वो किसी को जवाब देना ज़रूरी नहीं समझते हैं। वो दलित विरोधी नहीं हैं। और यह साबित करने के लिए उन्हें किसी के सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं। मगर यह पूछने पर कि उनके कार्यकाल में जितनी भी अस्थाई नियुक्तियां हुईं हैं, क्या उनमें एक भी दलित है… वो कहते हैं कि उन्हें याद नहीं।
इसी बातचीत में उन्होंने बताया कि अनिल चमड़िया बेहद अनैतिक प्रोफेसर हैं। यह भी कि अनिल राय अंकित को चोर गुरू के तौर पर उनके दुश्मनों ने प्रचारित किया है। यह पूछने पर कि क्या अंकित अनैतिक नहीं? वह कहते हैं कि जांच के बाद ही तस्वीर साफ़ होगी। इसी इंटरव्यू में वो यह वादा भी करते हैं कि अगले कुछ दिनों में अंकित की जालसाजियों पर फैसला आ जाएगा। मगर कुछ पलों बाद यह भी दोहराते हैं कि फैसला जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही होगा और कमेटी अभी तक गठित नहीं हुई है।
विभूति नारायण राय का दावा है कि अनिल चमड़िया को हटाने में उनका कोई हाथ नहीं। मगर वह यह भी कबूल करते हैं कि उन्होंने ईसी के मेम्बरों से कहा था कि यूनिवर्सिटी से एक ग़लती (अनिल चमड़िया की नियुक्ति) हो गई है और वो इस ग़लती को दुरुस्त करना चाहते हैं। विभूति नारायण राय से यह बातचीत काफी लंबी है। करीब 36 मिनट लंबी। उसी के एक हिस्से को हम आज प्रकाशित कर रहे हैं। बाकी हिस्से अगले कुछ दिनों में आपके सामने रख दिए जाएंगे। ताकि आप सही ग़लत का फ़ैसला खुद कर सकें। – मॉडरेटर
सारे नोटिस दलित शिक्षकों को, जवाब दो विभूति
February 6, 2010 by दिलीप मंडल
Filed under स्पेशल रिपोर्ट
अब तक आपने पढ़ा कि किस तरह विभूति नारायण राय ने जब प्रोफेसर डॉक्टर एल करुण्यकारा को डॉ. अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस कार्यक्रम में शामिल होने और नारे लगाने के आरोप में सामंती अंदाज में धमकी दी तो उन्होंने इसका करारा जवाब दिया। उन्होंने विभूति राय को सिखाया कि 6 दिसंबर का क्या मतलब है और साथ ही ये भी बताया कि सेकुलर होकर भी जातिवादी, सामंती और अलोकतात्रिक हुआ जा सकता है बल्कि सेकुलर होकर ये सब होना ज्यादा आसान होता है और ऐसे लोगों के छल को तोड़ना मुश्किल। उन्होंने ग्राम्शी को उद्धृत करते हुए बताया कि दलितों को आंदोलन के लिए क्यों बाध्य होना पड़ता है। अब आगे पढ़िए, जब वो बताते हैं कि जिन नारों को विभूति जातिवादी मानते हैं, वो नारे दरअसल हैं क्या? (अनुवाद: दिलीप मंडल)…
सुनो विभूति, तुम सेकुलर जातिवादी हो…
February 5, 2010 by दिलीप मंडल
Filed under स्पेशल रिपोर्ट
ऐसे समय में जब कई बार छवियों का महत्व वास्तविकता से ज्यादा हो जाता हो, तब ऐसे बच्चे की जरूरत होती है जो कहे कि अरे राजा तू तो नंगा है। ऐसे समय में जब सच कहना सबसे साहसिक कामों में गिना जाता हो, जब हम सलाम करते हैं वर्धा के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर (डॉ) एल करुण्यकारा को। प्रोफेसर को 11 दिसंबर को विभूति नारायण राय का साइन किया हुआ एक नोटिस मिलता है, जिसमें उन पर आरोप लगाया जाता है कि 6 दिसंबर की शाम उन्होंने भड़काऊ जातिवादी नारेबाजी की थी और वो जुलूस में शामिल हुए थे। उन पर ये आरोप भी लगाया गया कि उनके ऐसा करने से कैंपस की शांति और समरसता को खतरा पैदा हुआ। विभूति ने नोटिस में ये धमकी दी कि 7 दिनों में नोटिस का जवाब मुझे नहीं मिला तो एकतरफा कार्रवाई की जाएगी। मवालियों की भाषा में जारी इस नोटिस का जो जवाब प्रोफेसर करुण्यकारा ने दिया है वो प्रतिरोध का शानदार दस्तावेज है। वीसी को भेजी गई चिट्ठी का अनुवाद दिलीप मंडल ने किया है।
राजेंद्र, अरुंधती, उदित राज… बुलंद होती इंसाफ़ की आवाज़
February 3, 2010 by जनतंत्र डेस्क
Filed under स्पेशल रिपोर्ट
महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय की तानाशाही के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद होने लगी है। प्रोफेसर अनिल चमड़िया को क्रूर तरीके से हटाए जाने के ख़िलाफ़ हस्ताक्षर अभियान तेज़ हो गया है। अब तक इस पर बड़ी संख्या में पत्रकारों, साहित्यकारों और प्रबुद्ध लोगों ने अपने हस्ताक्षर किए हैं। इसी कड़ी में जानी-मानी लेखिका, कार्यकर्ता और मानवाधिकारों की पक्षधर अरुंधती रॉय ने भी अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं। मशहूर साहित्यकार और हंस के संपादक राजेंद्र यादव और फिल्मकार संजय काक ने दस्तख़त किए हैं। दलितों के हक़ के लिए लड़ने वाले उदित राज ने भी अनिल चमड़िया की बर्खास्तगी का विरोध किया है। ख़बरें यह भी आ रही हैं कि बजट सत्र के दौरान संसद में यह मुद्दा उठाने की तैयारी है। न केवल प्रोफेसर अनिल चमड़िया की बर्खास्तगी का मसला बल्कि महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में दलित छात्रों के उत्पीड़न का मसला भी उठाने की तैयारी है। अगर ऐसा हुआ तो यह एक बड़ी कोशिश होगी। Read more
‘ये तुम्हारे गले में किसकी आवाज है …….’*
February 2, 2010 by जनतंत्र डेस्क
Filed under स्पेशल रिपोर्ट
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से प्रोफेसर अनिल चमड़िया को “क्रूर तरीके” से हटाए जाने के मुद्दे पर इन दिनों ढेरों ई-मेल पहुंच रहे हैं। ऐसी ही एक चिट्टी तीन दिन पहले हमारे पास पहुंची। लिखने वाले ने नाम-पता गोपनीय रखने की गुजारिश की है। उनकी मजबूरी को समझते हुए, हम इस अपील को मान रहे हैं और उनकी बातों को आपसे साझा कर रहे हैं। इसलिए कि इसमें दो ऐसे व्यक्तियों का जिक्र है जिनके बारे में हम और आप बहुत से लोग जानते हैं। उन दोनों व्यक्तियों में एक शख़्स हैं कृष्ण कुमार। बहुचर्चित शिक्षाविद कृष्ण कुमार इन दिनों एनसीईआरटी के कर्ता-धर्ता हैं। दस-बारह साल पहले उनकी एक पुस्तक आई थी “विचार का डर”। वह पुस्तक लाजवाब है। उससे कृष्ण कुमार की गहराई का पता चलता है। लेकिन ताज़ा प्रकरण से उनकी चतुराई का भी पता चल रहा है। वह भी उन दिग्गजों में से एक हैं जिन्होंने मिल कर अनिल चमड़िया को यूनिवर्सिटी से बाहर किया है। कृष्ण कुमार भी विभूति नारायण राय की इस साज़िश में बराबर के गुनहगार हैं। इसलिए जरूरत है कि अब बहस का दायरा बढ़ाया जाए। हर उस व्यक्ति से सवाल किया जाए जो विभूति नारायण राय का या तो समर्थन कर रहा है या फिर विरोध करने से बच रहा है। – मॉडरेटर
“पुलिसिया अंदाज में मुझे अपराधी साबित कर रहे हैं वीसी”
January 30, 2010 by अनिल चमड़िया
Filed under स्पेशल रिपोर्ट
Comments Off
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अनिल चमड़िया ने अपनी बर्खास्तगी की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। उन्होंने साफ़ किया है कि वो दलित हितों की वकालत करते हैं लेकिन इस पूरे मामले को उनके दलितवादी होने की तरफ़ मोड़ देने के पीछे एक बड़ा प्रोपोगैंडा है। यह यूनिवर्सिटी के कुलपति विभूति नारायण राय की साज़िश है। अनिल चमड़िया पूछते हैं कि जब उनकी नियुक्ति उनकी जाति के आधार पर नहीं हुई थी फिर जाति का सवाल क्यों? जनतंत्र और मोहल्लालाइव की तरफ़ से भेजे गए सवालों के जवाब में अनिल चमड़िया ने जो जवाब भेजे हैं वो सोचने पर मजबूर करते हैं। अगर ये सभी बातें सही हैं तो विभूति नारायण राय जैसे व्यक्ति को कुलपति जैसे अहम ओहदे से तुरंत हटाया जाना चाहिए। इतना ही नहीं प्रोफेसर और छात्रों को मानसिक यंत्रणा देने के मामले में उनके ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। - मॉडरेटर Read more
सब प्रो. कृष्ण कुमार वगैरह ने किया, वीएन राय पाक साफ!
January 30, 2010 by दिलीप मंडल
Filed under स्पेशल रिपोर्ट
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर विभूति नारायण राय की मानें तो प्रोफेसर अनिल चमड़िया की नियुक्ति निरस्त करने का फैसला प्रोफेसर कृष्ण कुमार, मृणाल पांडे, गंगा प्रसाद विमल और एक्जिक्यूटिव कौंसिल के बाकी सदस्यों का था। उनका इस फैसले से कोई लेना देना नहीं है और वो तो दरअसल अनिल चमड़िया को लेकर आए थे और उनके हाथ में होता तो वो अनिल चमड़िया को कतई न हटाते। Read more
क्या अनिल चमड़िया का टर्मिनेशन अवैध है?
January 29, 2010 by दिलीप मंडल
Filed under स्पेशल रिपोर्ट

जवाब दो!
सवाल 1 : क्या दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 13 जनवरी को हुई एक्जिक्यूटिव कौंसिल की बैठक के मीनिट्स (मीटिंग में हुई बातचीत का ब्यौरा) लिए गए थे?
सवाल 2: क्या मीटिंग का ये ब्यौरा एक्जिक्यूटिव कौंसिल के सदस्यों को मंजूरी के लिए भेजा गया? नियमों के तहत ये जरूरी है ताकि बैठक में शामिल सदस्यों को इस बात की विधिवत जानकारी मिल सके कि बैठक में क्या फैसले किए गए? Read more
इस तरह का अलगाववाद बहुत ख़तरनाक है
January 14, 2010 by दिलीप मंडल
Filed under ब्लॉग
उन्हें इस देश की सड़कें नापसंद हैं। वो ज्यादातर सफर हवाई जहाज से करते हैं और हो सके तो हवाई जहाज से सिटी सेंटर तक आने के लिए हेलिकॉप्टर का इस्तमाल करते हैं। भारत में दुनिया के लगभग सारे लक्जरी ब्रांड मिलने लगे हैं लेकिन वो शॉपिंग के लिए लंदन, पेरिस और न्यूयॉर्क से लेकर सिंगापुर, दुबई तक का सफर करते हैं। दुनिया के काफी लोग सैरसपाटे के लिए भारत आते हैं पर वो अपनी हर छुट्टी ससेल्स, दक्षिण अफ्रीका, बहामास, मोनैको, बाली या अलास्का में बिताना चाहते हैं। भारत बेशक यूरोप और अमेरिका के गरीब और मध्यवर्गीय लोगों के लिए इलाज कराने का बड़ा ठिकाना बन गया है लेकिन वो इलाज के लिए यूरोप या अमेरिका ही जाते हैं। उनके बच्चे या तो विदेश में पढ़ते हैं या भारत में रहकर ही स्कूली सर्टिफिकेट किसी विदेशी स्कूल बोर्ड का ही लेते हैं ताकि हायर एजुकेशन के लिए विदेश जाने में दिक्कत न हो। उनकी सुविधा के लिए अब देश में ही कई इंटरनेशनल स्कूल खुल गए हैं जो विदेशी स्कूल बोर्ड का एक्जाम लेकर वहीं का सर्टिफिकेट देते हैँ। वो सिर्फ अपने नौकर चाकर से भारतीय भाषाओं में बात करते हैं। उनके घर विदेशों में भी हैं, जहां वो अक्सर छुट्टियां बिताने के दौरान जाते हैं। वो विदेशी पहनते हैं, विदेशी शराब पीते हैं, विदेशी ख्वाब जीते हैं। Read more


इन सभी आरोपों पर वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल, मोहल्लालाइव के संपादक अविनाश और जनतंत्र की तरफ़ से समरेंद्र ने उनसे बात की। विभूति नारायण राय ने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में तीनों को इंटरव्यू दिया। सभी सवालों का उन्होंने कभी शांत भाव से तो कभी गुस्से में जवाब दिया। बीच-बीच में वो यह भी जताते रहे कि वो किसी को जवाब देना ज़रूरी नहीं समझते हैं। वो दलित विरोधी नहीं हैं। और यह साबित करने के लिए उन्हें किसी के सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं। मगर यह पूछने पर कि उनके कार्यकाल में जितनी भी अस्थाई नियुक्तियां हुईं हैं, क्या उनमें एक भी दलित है… वो कहते हैं कि उन्हें याद नहीं। 
