यहां मुखौटे बिकते हैं
December 1, 2009 by प्रभात शुंगलू
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लिब्रहान कमीशन पर सरकार की एटीआर में एक प्रस्ताव ये भी है कि राजनीतिक दल अगर धर्म का इस्तेमाल करेंगे तो उन पर पाबंदी लगनी चाहिए। इशारा ज़रूर बीजेपी और संघ परिवार की ओर था। लेकिन फिर इतिहास में कांग्रेस पर भी धर्म का राजनीतिक फायदे के लिये इस्तेमाल करने का आरोप लगेगा। क्योंकि बाबरी विध्वंस की नींव तो उसी दिन पड़ गयी थी जब 1986 में एक दिन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने विवादस्पद ढांचे पर लगा चालीस साल पुराना ताला खुलवाया था और राम लला की पूजा करवायी थी। तब तक वहां साल में एक बार ही राम लला की पूजा होती थी। लेकिन ताला खुलवाते समय राजीव गांधी अचानक हिंदू नेता हो गये। क्योंकि शाह बानो मामले में वो कट्टरपंथी मुसलमानों के चक्कर में पड़ चुके थे। शाह बानो मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की काट में नया कानून ला चुके थे। हिंदू वोटर नाराज़ था। चुनांचे उसे भी खुश करना था। राजनीति चमकाने के लिये धर्म का ये चोगा उन्होंने अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों तक ओढ़े रखा और 1989 में उन्होंने उस विवादास्पद भूमि पर शिलान्यास करा कर आडवाणी से पहले ही हिंदू हृदय सम्राट की उपाधि अर्जित कर ली। लेकिन इस फेर में उन्होंने हिंदू कट्टरपंथियों को वो करने का मौका दिया जो उन्होंने 6 दिसंबर 1992 को किया। Read more
वाजपेयी “देवतुल्य” हैं, अंगुली उठाओगे तो पाप लगेगा!
November 27, 2009 by विचित्र मणि
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लिब्रहान आयोग की रपट को लेकर हंगामा मचा हुआ है। सारे राजनीतिक दल अपनी सुविधा के मुताबिक उसका खंडन-मंडन कर रहे हैं। लेकिन लिब्रहान आयोग में एक अदद नाम ने भी पूरे राजनीतिक वातावरण में कम लुत्ती नहीं लगायी है। आयोग ने जिन लोगों को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए जिम्मेदार ठहराया है, उनमें एक नाम अटल बिहारी वाजपेयी का भी है। वाजपेयी का नाम आया तो पूरी भाजपा ही नहीं, संघ परिवार को भी मिर्ची लग गयी। और तो और, वाजपेयी को कल तक पानी पी पीकर कोसने वाले कल्याण सिंह ने भी सप्तम स्वर में कोसना शुरू किया कि कांग्रेस वालों की बेशर्मी तो देखो, बेचारे अटल बिहारी वाजपेयी जैसे संतपुरुष का नाम अयोध्या विवाद से जोड़ दिया। मोम से भी कमतर बीजेपी के लौहपुरुष लालकृष्ण आडवाणी ने भी अपनी फटी आवाज में चीखना शुरु किया कि मेरा नाम लिया तो लिया, वाजपेयी का नाम कैसे जिम्मेदारों की सूची में ठहरा दिया। वैसे आडवाणी मानते हैं कि 6 दिसंबर 1992 उनकी जिंदगी का सबसे दुखद दिन है। यानी अयोध्या प्रकरण में सारे धत्कर्म करके भी आडवाणी खुद को पाक-साफ मानते हैं। वाणी और बुद्धि की बलिहारी है! Read more




