ये दिल्ली सब की है

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शीला दीक्षित ने दिल्ली में काम अच्छा किया होगा कि जनता ने सर आंखो पर बिठाया। और बतौर मुख्यमंत्री उनकी हैट्रिक हुई। मेट्रो रेल, फ्लाईओवर, सबवे, फुटब्रिज, लो फ्लोर बसें सब का बड़ा श्रेय शीला दीक्षित सरकार को जाता है। कॉमनवेल्थ गेम्स करवाना फिलहाल उनकी बड़ी जिम्मदारी होगी। अपनी तीसरी पारी में शीला दिल्ली – एनसीआर के विकास की ओर ध्यान देंगी ऐसी अपेक्षा उनसे जरूर की जा रही थी। लेकिन प्राइवेट मोटर गाड़ियों पर एंट्री टैक्स लगाने का प्रस्ताव देकर एनसीआर के रोडमैप में दिशा-भ्रम पैदा कर दिया।

प्रशासनिक तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में काम करने का शीला का सबसे लंबा एक्सपीरियेंस है। वो इस क्षेत्र को एनसीआर सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बेहतर समझती हैं। अब तो दिल्ली का विकास एनसीआर के विकास से जुड़ गया है। अगर एनसीआर में क्राइम रेट बढ़ेगा तो ये तय है कि उसका असर दिल्ली पर भी पड़ता है। नोएडा या फरीदाबाद में बसों या ऑटोवालों की हड़ताल होती है तो दिल्ली में सरकारी और गैर-सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की हाजिरी देर से लगती है। दिल्ली के 37 ऐसे प्वाइंट्स हैं जहां से प्राइवेट गाड़ियां दिल्ली में घुसती हैं या दिल्ली से बाहर जाती हैं। कहां कहां टोल नाके बिठवायेंगी। और क्या गारंटी की दूसरे राज्य यानी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान भी दिल्ली की देखा देखी मोटर वाहन चालकों पर नया टैक्स न थोप दें। Read more

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राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय के छात्र शशि भूषण की डेंगू से मौत

शशि। हम सब उन्‍हें इसी नाम से पुकारते थे। उस दिन एनएसडी कैंपस में उन्‍हें क्रिकेट खेलते देखा था। लड़के-लड़कियां चिल्‍ला रहे थे, अंकल। जबकि इसी बार उनका सलेक्‍शन हुआ था। फर्स्‍ट ईयर के किसी छात्र के लिए ये संबोधन भले ही एक मज़ाक़ हो, लेकिन इसके पीछे की हकीकत ये है कि राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय में दाखिले से पहले शशिभूषण रंगमंच की दुनिया के लिए पुराने हो चले थे। पंद्रह सालों के अपने रंग इतिहास में ढोलक की बेशुमार थापों और मंच पर अपनी खिलखिलाती अदाओं से उन्‍होंने रंग दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ रखी थी। आज उनके बारे में इतनी औपचारिकता से लिखने का प्रसंग सिर्फ इतना है कि एक निहायत ही मामूली बीमारी और एक निहायत ही गंभीर लापरवाही ने शशिभूषण को हमसे छीन लिया है।

शशिभूषण की पूरी ट्रेनिंग अभियानों और आंदोलनों से जुड़ी रंग-प्रक्रियाओं के बीच हुई थी। जनसंस्‍कृति मंच की पटना ईकाई हिरावल के साथ उनका रंग सफर शुरू हुआ अनिल अंशुमन, जो सीपीआईएमएल के सांस्‍कृतिक कार्यकर्ता हैं, ने ही उन्‍हें नाटकों की पगडंडी दिखायी थी। लिहाजा वे आंदोलनी गीतों के साथ बहुत सहज थे। ऊंचे आलाप के साथ सुनाते थे, सृष्टिबीज का नाश न हो हर मौसम की तैयारी है, कल का गीत लिये होंठों पर आज लड़ाई जारी है। या फिरसमाजवाद बबुआ धीरे धीरे आयी और समय का पहिया चले रे साथी, समय का पहिया चले। थिएटर में धन-धान्‍य से भरे करियर के पीछे भागते हुए रंगकर्मियों पर उन्‍हें हमने कबीरी ठाठ से हंसते हुए देखा था, जबकि वे रंगीन कपड़े पहनने के शौकीन थे। झक लाल या बेहद काली कमीज़ पर गूगल्‍स लगा कर वे अपने अंदर की सादगी से बदला लेने की कोशिश करते थे। Read more

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एनडीटीवी में बड़े पैमाने पर छंटनी

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ndtvindia-logo-200दो दिन पहले हमने आपको बताया था कि एनडीटीवी दिल्ली में बड़े पैमाने पर छंटनी होने वाली है। अब उसकी शुरुआत हो गई है। पहले दौर में एनडीटीवी से 16 लोगों को हटा दिया गया है। Read more

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