ये संपादक तो बड़ा ख़तरनाक है
August 3, 2009 by जनतंत्र डेस्क
Filed under मुद्दा, स्पेशल रिपोर्ट

जागरण में छपी तस्वीर
क्या किसी पत्रकार को ये हक़ है कि वो निजी खुन्नस निकालने में अपने संस्थान का इस्तेमाल करे? इस सवाल का सीधा जवाब है – नहीं। किसी भी पत्रकार को ऐसा नहीं करना चाहिए और ना ही उसे ये हक़ दिया जाना चाहिए। इसी सिलसिले में दिल्ली के एक मीडिया संस्थान का एक वाकया ध्यान आ रहा है। वहां के एक कर्मचारी ने किसी इंस्टीट्यूट को डराने के लिए संस्थान का बेजा इस्तेमाल कर दिया था। इंस्टीट्यूट की तरफ से शिकायत मिलने पर उस कर्मचारी को नौकरी छोड़नी पड़ी। लेकिन आप हर कंपनी से ऐसी आचार संहिता की उम्मीद नहीं कर सकते। खासकर जब वो कंपनी अपने कर्मचारियों का इस्तेमाल अनैतिक तरीके से धन जुटाने में करती हो। Read more
जागरण और टीओआई नंबर वन
May 9, 2009 by जनतंत्र डेस्क
Filed under पहरेदार
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इंडियन रीडरशिप सर्वे (आर-1, 2009) के आंकड़े आ गए हैं। इसमें कोई उलटफेर नहीं है। मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल (एमआरयूसी) के ताजा सर्वे में इस बार भी हिंदी अख़बारों में दैनिक जागरण और अंग्रेजी में टाइम्स ऑफ इंडिया सबसे आगे हैं।
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