हिंदुस्तान-अमर उजाला में समझौता नहीं, एफ़आईआर दर्ज

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बरेली में हिंदुस्तान और अमर उजाला के बीच कोई सुलह-सफाई नहीं हो सकी। जिसके बाद दोनों पक्षों ने इज्जत नगर थाने में एक दूसरे के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करा दी है। सूत्रों के मुताबिक हिंदुस्तान ने अमर उजाला के सात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया है जबकि अमर उजाला की तरफ से भी छह लोग नामजद कराए गए हैं। हिंदुस्तान की शिकायत पर आईपीसी की धारा 397 और 395 के तहत घायल करके लूटपाट करने का मामला दर्ज हुआ है। जबकि अमर उजाला की तरफ से लूटपाट की शिकायत की गई है। दोनों ही पक्षों ने एक दूसरे के प्रसार मैनेजर को आरोपी बनाया है। Read more

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हिंदुस्तान और अमर उजाला की सर्कुलेशन टीमों में हिंसक झड़प

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उत्तर प्रदेश के बरेली में हिंदुस्तान और अमर उजाला की सर्कुलेशन टीमों के बीच हिंसक झड़प हुई है। इस मारपीट में छह लोग घायल हैं। जिनमें से पांच को ज़्यादा चोटें आई हैं। उन्हें बरेली के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बरेली में दो महीने पहले ही, नौ अक्टूबर को हिंदुस्तान ने अपना संस्करण लॉन्च किया था। हिंदुस्तान ने रुहेलखंड इलाके के पांच जिलों – बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखिमपुर और बदायूं, को ध्यान में रख कर यह संस्करण शुरू किया। बरेली संस्करण लॉन्च करने से पहले अख़बार की बुकिंग के लिए एक स्कीम शुरू की। जिन लोगों ने बुकिंग कराई उन्हें एक कूपन दिया गया और ये वादा किया गया कि उन्हें एक साल तक हिंदुस्तान पचास फीसदी कम कीमत पर मिलेगा। Read more

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कई मायनों में खास रहा हिंदुस्तान का “समागम”

हिंदुस्तान ने अक्टूबर में एक बेहतरीन काम किया है। हिंदुस्तान “समागम” नाम से पटना और लखनऊ दो शहरों में आयोजन किए। पटना का आयोजन शानदार रहा। थोड़े अंतराल पर ही सही दोनों ने एक ही कार्यक्रम में नीतीश कुमार और लालू यादव – दोनों ने हिस्सा लिया। बिहार की बेहतरी पर लोगों के सामने अपनी राय रखी। वर्तमान में ये दोनों ही बिहार की सियासत की धूरी हैं। नीतीश सत्ता पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हैं और एक बड़े तबके की यह धारणा है कि उनका यकीन ओछी सियासत से ज़्यादा विकास की राजनीति में है। दूसरी तरफ करीब डेढ़ दशक तक बिहार में एकछत्र राज करने वाले लालू यादव इस वक़्त विपक्ष में हैं। उनके बारे में धारणा यह है कि वो विकास की राजनीति में यकीन नहीं रखते।

हिंदुस्तान समागम में दोनों ही नेताओं ने बिहार की बेहतरी पर चर्चा की। आपसी रंजिश भुला कर केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाए। दोनों ने कहा कि सियासत का लक्ष्य राज्य का विकास होना चाहिए। ऐसा बहुत कम होता है जब दो धुर्र विरोधी आगे-पीछे ही सही एक कार्यक्रम में हिस्सा लें और आपसी रंजिश का जिक्र नहीं हो। इनके अलावा उस कार्यक्रम में कई ऐसी हस्तियां शामिल हुईं जिनका बिहार में काफी दखल रहा है। दीपांकर भट्टाचार्य, शकील अहमद, शत्रुघ्न सिन्हा, शिवानंद तिवारी, एनके सिंह समेत यह फेहरिस्त काफी लंबी है। Read more

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एक दिन में “हिंदुस्तान” की कई ग़लतियां

20 अक्टूबर को हिंदुस्तान में डेस्क ने एक साथ कई बड़ी ग़लतियां की। सातवें और आठवें पन्ने पर एक ही ख़बर दो अलग-अलग शीर्षक के साथ प्रकाशित की गई। जबकि एक ख़बर का ऐसा हश्र हुआ है कि आप पढ़ कर कुछ भी नहीं समझ सकेंगे।

पहले पन्ने पर पीएफ घोटाले के मुख्य आरोपी आशुतोष अस्थाना की मौत से जुड़ी ख़बर प्रकाशित की गई है। बताया गया है कि डासना जेल में रहस्यमई हालत में हुई मौत की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इसी मामले में एक और ख़बर सातवें पन्ने पर छापी गई है। उसका शीर्षक है “अस्थाना कांड में जेल प्रशासन को क्लीन चिट”। चार कॉलम में छपी उस ख़बर में कई सबहेडिंग हैं। यही ख़बर आठवें पन्ने पर बदले हुए शीर्षक के साथ हू-ब-हू छापी गई है। यहां शीर्षक है “हार्टअटैक से हुई अस्थाना की मौत”Read more

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हिंदुस्तान में डरे हुए हैं मृणाल समर्थक

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हिंदुस्तान से मृणाल पांडे की विदाई हो गई है। उनकी विदाई के बाद वहां पर उनके करीबी कर्मचारियों में डर का माहौल है। हिंदुस्तान के सूत्र बताते हैं कि मृणाल पांडे की सत्ता में मलाई खाने वाले कई कर्मचारी उनकी फेयरवेल पार्टी से गायब थे। शायद वो अभी से अपने दामन पर लगे मृणाल पांडे के लेबल को हटाने की कोशिश में जुट गए हैं।

हिंदुस्तान के सूत्रों ने बताया कि मृणाल पांडे ने विदाई भाषण में कर्मचारियों से गुजारिश की है कि वो इस्तीफा नहीं दें। लेकिन यह सवाल तो तब उठता जब कोई मृणाल समर्थक शशि शेखर की नियुक्ति का विरोध करते हुए उनके साथ इस्तीफ़ा दे देता। सच तो यही है कि किसी ने अभी तक इस्तीफ़े की पेशकश नहीं की है। Read more

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स्वाइन फ्लू से सरकार के बचाव में जुटा “हिंदुस्तान”

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हिंदुस्तान में हर रोज फ्रंट पेज पर दो टूक छपता है। पहले पन्ने पर संपादकीय देने का ये तरीका हिंदुस्तान ने शुरू किया है। कई बार उसमें बहुत ही बेतुकी बातें लिखी होती हैं। बिना सिर पैर की बातें। उनका सिर्फ़ एक ही मक़सद होता है कि किसी भी तरह से सरकार का बचाव किया जाए। मेट्रो हादसा हो, एनसीआर में बढ़ते अपराध हों या फिर कोई ऐसा मामला जिसमें सरकार घिरती नज़र आती है तो दो टूक में उसका समर्थन किया जाता है।

अभी स्वाइन फ्लू पर सरकार घिरी है। स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद बेतुके बयानों से उसकी फजीहत हो रही है। हिंदुस्तान को भी चाहिए कि उसके लिए सरकार को आड़े हाथों ले, लेकिन हिंदुस्तान में जनहित की पत्रकारिता को ताक पर रख कर सरकार का बचाव किया जा रहा है। आगे बढ़ने से पहले आप दो दिन के दो टूक पढ़िए। Read more

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जिन्ने “हिंदुस्तान” नई वेख्या …

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हिलेरी क्लिंटन और मनमोहन

हिलेरी क्लिंटन और मनमोहन


अमेरिका से एंड यूजर मॉनीटरिंग एग्रीमेंट (एयूएमए) से जुड़ी ख़बर अंग्रेजी अख़बारों में तो पहले पन्ने पर है ही, हिंदी के ज़्यादातर अख़बारों ने भी इसे पहले पन्ने पर छापा है। विपक्ष के आरोप और उन पर सरकार की सफाई दोनों छापी गई है। कुछ ने तो कांग्रेस के भीतर उभर रहे विरोध के सुरों को भी जगह दी है। Read more

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ये अख़बार और ये पत्रकार … धन्य हैं

कुछ अख़बारों में छपी ख़बरों को पढ़ने के साथ ही आप समझ जाएंगे कि उसके पीछे क्या खेल है। अब मैं आज कुछ अख़बारों में छपी ख़बरों का नमूना पेश कर रहा हूं। आप इन्हें पढ़िये और सोचिए कि क्या इसी को रिपोर्टिंग कहते हैं?
हिंदुस्तान, 17 जून 2009 पेज नंबर – 8 (देश)
झंडा ढोने वाले गेस्ट, भाषण देने वाले होस्ट
पटना (हिं. ब्यू.) – मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सरकारी आवास, एक अणे मार्ग। चुनाव के दौरान झंडा ढोने वाले पंगत में बैठकर भोजन कर रहे हैं और मंच से भाषण देने वाले परोसकर खिला रहे हैं। चुनाव में जीत की खुशियां बांटने का नीतीश कुमार का यह है नायाब अंदाज। वे खुद होस्ट की भूमिका में हैं। कोई छूट न जाए इसके लिए वे सबसे खुद मिल रहे हैं।
लजीज भोजन, ऊपर से नेता से मिला सम्मान। सबके चेहरे के भाव के साथ उनकी भंगिमा बता रही है कि खुशी छुपाना उनके वश का नहीं रहा। दूसरी पंगत में बैठा एक कार्यकर्ता बगल वाले से कहता है “ओह! चुनाव के थकान आजे नु मिटल”, जवाब में दूसरा कहता है – “अब कहहीं के बा, सही में भाई जनता के मलिक बुझे वाला इहे (नीतीश कुमार) नेता बा।”

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इस ख़बर की मंशा दूसरे पैराग्राफ की आखिरी लाइन में छिपी है। अरे भई किसी पार्टी का कार्यकर्ता अपने नेता के घर पर दावत उड़ाने के बाद और क्या कहेगा? ये तो वही बात हुई कि मां की ममता साबित करने के लिए उसके चहेते बेटे से गवाही ले ली जाए। इस एक कॉलम और दो पैराग्राफ की ख़बर के बगल में नीतीश कुमार और शरद यादव की तीन कॉलम तस्वीर छपी है। उसका कैप्शन लिखा है – जीत का स्वाद।


दैनिक भास्कर, 11 जून 2009


जीत की खुशी में सोनिया ने दिया पत्रकारों को भोज

वेजीटेबिल मोमोज, वोनटोन्स, कटहल बिरयानी, पुलाव, जाते जूस, गरमागरम जलेबी। दक्षिण भारत और उत्तर भारत के सभी मशहूर पकवान और साथ में लजीज इटैलियन पाश्ता। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जीत के बाद दिल्ली के अशोक होटल में पहली बार पत्रकारों को पार्टी की ओर से भोजन पर बुलाया तो खाने के टेबल पर खानपान संस्कृति की झलक देखने को मिली।

नेताओं की दावत और उसकी रिपोर्टिंग से जुड़ा एक और वाकया। ये वाकया भी इसी महीने का है। 10 जून को सोनिया गांधी ने जीत की खुशी में दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में कांग्रेस कवर करने वाले पत्रकारों को दावत दी। पहले से ही मना कर दिया गया था कि यहां की बातचीत पर वो रिपोर्ट तैयार नहीं करेंगे। लेकिन पत्रकारों को देश के सबसे ताकतवर शख़्स ने खाने पर बुलाया था। ये उनके लिए बड़ा सम्मान था। इस सम्मान का बोझ उतारने के लिए कुछ पत्रकार दिल खोल कर लिखना चाहते थे। सोनिया गांधी से हुई बातचीत का ब्योरा देना चाहते थे। बताना चाहते थे कि कांग्रेस आलाकमान उन्हें पहचानती हैं। लेकिन पहले ही मना कर दिया गया था तब क्या लिखें? इस धर्मसंकट को दूर करने के लिए उन्होंने दावत में परोसे गए व्यंजनों पर ही रिपोर्ट छाप दी। उस रिपोर्ट में व्यंजनों की तारीफ़ के अलावा कुछ नहीं था। उदाहरण के लिए 11 जून का दैनिक भास्कर के फ्रंट पेज पर छपी रिपोर्ट का मुखड़ा पढ़िये। ये मुखड़ा बॉक्स में दिया हुआ है।

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भई पत्रकारिता हो तो ऐसी और पत्रकार हों तो ऐसे। अब रिपोर्टिंग का दूसरा नायाब नमूना। ये नमूना दैनिक भास्कर में आज ही देखने को मिला। इस अख़बार के दिल्ली संस्करण में नियमित तौर पर एक पन्ना राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पर समर्पित होता है। उस पन्ने पर मैं छत्तीसगढ़ में आम जनता से जुड़ी… सरोकार वाली ख़बरें पढ़ने के लिए तरस जाता हूं। वहां से मुख्यमंत्री रमण सिंह की तारीफ और उनकी योजनाओं के अलावा सिर्फ़ नक्सलियों की क्रूरता की ख़बरें ही छपती हैं। सलवा जुडुम की क्रूरता और राज्य और केंद्र सरकार की तरफ से प्रायोजित हिंसा के बारे में कुछ नहीं छपेगा। आज भी एक ऐसी ही ख़बर छपी है। ख़बर देने वाले रिपोर्टर का नाम नहीं लिखा गया है। आप ख़बर पढ़ कर अंदाजा लगा सकते हैं कि ख़बरें प्लांट कैसे की जाती हैं? इस ख़बर में आपको किसी घटना का जिक्र नहीं मिलेगा। कोई सबूत नहीं मिलेगा। स्रोत के नाम पर “नक्सली मामलों के विशेषज्ञ अफसरों” जैसे वाक्य मिलेंगे
दैनिक भास्कर, 17 जून 2009
ख़बर – छत्तीसगढ़ में क्रूरता पर उतरे नक्सली
भास्कर न्यूज़। रायपुर

राज्य सरकार से शांति वार्ता का प्रस्ताव रख रहे नक्सलियों के आचरण से तो कम से कम ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि उनकी रुचि इसमें है। पुलिस पार्टियों पर लगातार हमले हो रहे हैं। पुलिस का साथ देने के नाम पर लोगों का गला काटा जा रहा है। अब नक्सलियों ने पुलिस जवानों को गंभीर रूप से घायल करने के लिए प्रेशर बमों के अलावा लोहे के सरियों और बांस के नुकीले टुकड़ों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
कई जवानों के चोटिल होने के बाद पुलिस की सर्च टीम के लिए अलग दिशा-निर्देश जारी किये गए हैं। पुलिस पार्टियों पर हमला करने के लिए नक्सली हर छह-आठ महीनों में नए तरीके ईजाद कर रहे हैं। नक्सली मामलों के विशेषज्ञ अफसरों का कहना है कि एंटी नक्सल ग्रे हाउंड्स फोर्स के दबाव के बाद हार्डकोर नक्सलियों ने पलायन कर अबूझमाड़ और उड़ीसा के सीमाई इलाकों में अपने अड्डे बना लिये हैं। वहां लड़ाकों को सेना या अर्धसैनिक बलों की तरह कमांडो ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग की कुछ सीडी भी पुलिस ने जब्त की है। कुछ दिन पहले दिल्ली में गिरफ़्तार दो महिला नक्सलियों के पास भी पुलिस को ट्रेनिंग की सीडी मिली थी। पुलिस की असल मुसीबत नक्सलियों की रिसर्च टीम है, जो हर हमले के बाद उसकी बारीकी से पड़ताल कर उसकी सारी खामियों को ध्यान में रखकर रणनीति बदलती है।

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“टीम इंडिया” की तरह “हिंदुस्तान” भी फिसड्डी

आज सुबह नींद खुली तो मैच का नतीजा जानने के लिए अख़बार उठाया। बीती रात भारत और इंग्लैंड के बीच बड़ा मैच था। धोनी ने टॉस जीत कर इंग्लैंड को बल्लेबाजी का न्यौता दिया और टीम इंडिया के गेंदबाजों ने उसके खिलाड़ियों को 153 रन पर रोक दिया। मैं ये मान कर सो गया कि अब भारत की जीत तय है और उसे सेमीफाइनल में पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। सुबह उठने पर नतीजा जानने की बेचैनी थी। सबसे पहले “हिंदुस्तान” हाथ लगा। उसके फ्रंट पेज पर पीटरसन और बोपारा की बड़ी सी तस्वीर थी। इस फोटो के नीचे लिखा था – “रविवार को भारत के साथ टी-20 वर्ल्ड कप के महत्वपूर्ण मुक़ाबले के दौरान एक्शन में पीटरसन“। साथ ही कुछ और कैप्शन भी दिये गए थे। जैसे “टॉस जीताइंग्लैंड से मैच जीतने की जद्दोजहद में जुटी इंडिया“… “टीम इंडिया में इरफान पठान और प्रज्ञान ओझा की जगह आर. पी. सिंह और रविंदर जडेजा शामिल”। उसके बाद मैं हिंदुस्तान के खेल पेज पर गया। वहां आधे पन्ने में छपी ख़बर का शीर्षक है … अंतिम ओवर में चला भज्जी का जादूअगर किसी को ये नहीं मालूम हो कि भारत ने पहले गेंदबाजी की है तो इस शीर्षक से यही अंदाजा लगाएगा कि भज्जी ने आखिरी ओवर में टीम इंडिया को जीत दिला दी है। Read more

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“कुंज बिहारी” को कैसे मिलेगी स्कॉलरशिप?

तीन दिन पहले हिंदुस्तान में एक छात्र कुंज बिहारी की कहानी छपी। बिहार के बिक्रमगंज में रहने वाले कुंज बिहारी ने दसवीं की परीक्षा में अपनी मेहनत से 85 फीसदी अंक हासिल किये। अखबार में होनहार कुंज बिहारी की दिक्कतों को पूरा ब्योरा दिया गया है। कैसे उस छात्र ने गोल-गप्पे बेच कर पढ़ाई की। कुंज ने हिंदुस्तान के रिपोर्टर को बताया कि “उसने मैट्रिक तक की पढ़ाई काफी दिक्कतों में पूरी की। खाने-पीने व पढ़ने के लिए पैसे का इंतजाम उसके पिता काफी मुश्किल से कर पाते थे।” उस रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि “गुदड़ी के लाल की तमन्ना इंजीनियर बनने की है। वह किसी शीर्ष संस्थान से इंटर करना चाहता है पर घर की परिस्थितियां इसकी इजाजत नहीं दे रहीं। तीन छोटे भाई व दो बहनों के पालन-पोषण करने में अक्षम उसके पिता शिवजी सेठ उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने में अपने को असमर्थ पा रहे हैं।” Read more

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