प्रणब का बजट और मीडिया की तल्खी

प्रणब मुखर्जी के बजट को मीडिया ने आड़े हाथों लिया है। कुछ अख़बारों ने बड़ी तीखी प्रतिक्रिया दी है। बजट की आलोचना में कुछ पत्रकार तो व्यक्तिगत हो गए हैं। देश के बड़े-बड़े कारोबारी, जिन्हें धंधा करना है, वो बजट की आलोचना संतुलित तरीके से कर रहे हैं लेकिन पत्रकार कुछ ज़्यादा ही इमोशनल हो गए। आगे बढ़ने से पहले एक नज़र कुछ उदाहरणों पर।

दैनिक हिंदुस्तान ((पृष्ट संख्या – एक))
हेडर – बाबू मोशाय का इंद्रजाल
सब हेडर – वित्त मंत्री ने नापा नौ गज, फाड़ा दो गज
इंट्रो – यूपीए सरकार की दूसरी पारी का पहला बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कमाल कर दिया। उन्होंने बंगाल के विश्वप्रसिद्ध जादूगर पी सी सरकार जैसी बाजीगरी दिखाई। चुनावी वादों और सरकार के 100 दिन के अजेंडा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वोटर को हंसाया तो जरूर, लेकिन थमाया कुछ खास नहीं। गुड़ कम दिया, गुड़ सी मीठी बातें ज़्यादा कीं। बजट भाषण में बजट कम था भाषण ज्यादा। घोषणाएं ज़्यादा थीं, क्रियान्वयन की ठोस योजनाएं कम। Read more

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