पुरुष पंडितों ने सभा की, पंडित प्रभाष जोशी को याद किया
दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में प्रभाष जोशी पर लिखी गयी पुस्तक का लोकार्पण हुआ (लोकार्पण समारोह की रपट के लिए यहां क्लिक करें : “दिग्गजों की मौजूदगी में प्रभाष जोशी पर पुस्तक का लोकार्पण”)। इसे आप महज संयोग कहेंगे या क्या कहेंगे कि उस लोकार्पण में जितने लोगों ने प्रभाष जोशी के बारे में अपनी राय रखी, उनमें से एक को छोड़ कर कोई भी गैर ब्राह्मण नहीं था। जो अकेला शख्स गैरब्राह्मण था, वो भी एक ऐसी जाति से ताल्लुक रखता था जो खुद को ब्राह्मण होने का दावा करती रही है। यहां तक कि हद से अनहद गये का प्रकाशक भी ब्राह्मण ही है। इसे भी आप महज संयोग कहेंगे या फिर क्या कहेंगे कि मंच पर आकर प्रभाष जोशी को महान बताने वालों में एक भी महिला नहीं थी। Read more
दिग्गजों की मौजूदगी में प्रभाष जोशी पर पुस्तक का लोकार्पण
गुरुवार को दिल्ली ने हिंदी पत्रकारिता के युगपुरुष प्रभाष जोशी को एक बार फिर दिल से याद किया। मौका था प्रभाष जोशी पर लिखे गए किताब हद से अनहद गए के लोकार्पण का और जगह थी गांधी शांति प्रतिष्ठान का सभागार। इस किताब का लोकार्पण कुलदीप नैय्यर ने किया जबकि समारोह की अध्यक्षता की जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने। इस मौके पर नित्यानंद तिवारी, मंगलेश डबराल, अशोक वाजपेयी, अनुपम मिश्र, पुण्य प्रसून वाजपेयी, पुष्पराज और प्रभाष जोशी के बेटे सोपान जोशी ने प्रभाष जोशी के बारे में अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन किया रवीन्द्र त्रिपाठी ने। Read more




