नरेंद्र मोदी और राज ठाकरे से कम नहीं हैं शीला दीक्षित
November 19, 2009 by अरविंद शेष
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राज ठाकरे और उनके गुर्गों के बर्ताव और पागलपन से बहुत सारे लोगों को दुख हो रहा होगा। लेकिन क्या कभी इस ओर भी ध्यान गया है कि लोकतंत्र की चादर ओढ़े कांग्रेसी सरकार दिल्ली को क्या बनाने की योजना पर काम कर रही है? राज ठाकरे की उछल-कूद महज तात्कालिक ज्वार है, जिससे अगर ‘स्टेट’ नहीं निपट सका तो ‘जनता’ निपट लेगी। लेकिन दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार जिस रणनीति पर काम कर रही है, वह राज ठाकरे टाइप राजनीति नहीं है, जो सामने से दिख जाए। असर के स्तर पर वही होगा, जो राज ठाकरे टाइप राजनीति का मकसद है। बल्कि और भी स्थायी नतीजों के साथ होगा। और बुरा भी नहीं लगेगा। बुरा या अच्छा लगना सिर्फ उनका मायने रखता है, जो ‘सभ्य’ और ‘संभ्रांत’ हैं। Read more
यहां “शहाबुद्दीन”, “बजाज” और “ये पत्रकार” एक जैसे हैं!
August 15, 2009 by अरविंद शेष
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राज्य (राज) सभा में जाने लायक जितने भी नाम आपने गिनाए हैं, वे सभी शायद एक “मनोनीत” पद के लिए हैं। विडंबना यह है कि इन सबके अलावा भी जो संभावित नाम हो सकते हैं, उनमें से कोई ऐसा नहीं, जो बिना सर्वश्रेष्ठ “भक्ति” साबित किए “राष्ट्रपति” की कृपा पा सकने में सक्षम हों। अपनी क्षमता भर सबने ऐसा किया ही है, या कर रहे हैं। हां, रूप-स्वरूप अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन “यह किए जाने” को हम इस तर्क से जस्टीफाई कर सकते हैं कि अगर हमारे “लोकतंत्र” के साठ से ज्यादा सालों का हासिल यही है कि देश के सबसे “पाक-साफ मंदिर” में जगह पाना है तो तमाम धतकर्मों में अपनी कुशलता दर्शानी होगी, तो वहां जाने की इच्छा रखने वालों का क्या गुनाह…! Read more
जिसकी जैसी मार्केटिंग, उसको वैसा वोट
June 18, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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जनसत्ता में आज वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शेष का लेख छपा है। बिहार के सीतामढ़ी जिले के रहने वाले अरविंद पटना में लंबे समय तक पत्रकारिता कर चुके हैं और वो बिहार की पत्रकारिता के बारे में काफी गहराई से जानते हैं। जनसत्ता में आज के लेख में उन्होंने बिहार की ज़मीनी हक़ीक़त और मीडिया के जरिये मार्केटिंग के बीच के अंतर को बयां किया है। साथ ही देश में मीडिया की मौजूदा भूमिका का विश्लेषण किया है। उन्होंने बताया है कि कैसे मीडिया मैनेजमेंट ने आम चुनाव के नतीजों पर असर डाला। हम अरविंद शेष का ये लेख जनसत्ता से साभार जनतंत्र पर छाप रहे हैं। आप भी पढ़ें और अपना नज़रिया पेश करें।
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