संपादकों ने टीवी 5 पर कड़ी कार्रवाई की मांग की

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ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन (बीईए) ने आंध्र प्रदेश के न्यूज़ चैनल टीवी 5 के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग की है। टीवी 5 की एक ग़लत और बेबुनियाद ख़बर की वजह से बीती रात आंध्र प्रदेश में हिंसक वारदात हुई। चैनल ने बताया था कि राजशेखर रेड्डी की मृत्यु हेलीकॉप्टर हादसे में नहीं एक साज़िश की वजह से हुई है और इसके पीछे एक ख़ास शख़्स का हाथ हैं। राजशेखर रेड्डी आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री थे और उनके ही नेतृत्व में राज्य में कांग्रेस को लगातार दूसरी बात सत्ता नसीब हुई थी। इस मामले में पुलिस भी टीवी 5 के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर चुकी है। Read more

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क्यों न दर्ज हो तिवारी के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा?

किसी बड़े बुद्धिजीवी की उक्ति है- हम कई औरतों से इसलिए प्रेम करते हैं क्योंकि दुनिया में बुद्धिमान लोगों की भारी कमी है…और ईश्वर ने हमें इस विशेष काम के लिए भेजा है कि बुद्धिमान लोगों की आपूर्ति बनी रहे। एन डी तिवारी को बुद्धिजीवी के खांचे में रखने से बहुतों को एतराज होगा लेकिन एन डी ने इस उम्र में युवाओं को जरूर चुनौती दे दी है। वे उनकी उर्जा और प्रतिभा का मुकाबला करें। यूं हमारी जनता शासक वर्ग के ऐसे मामलों को ‘देवलोक’ का मामला मानती रही है और उनके किसी कृत्य के लिए किसी ‘खाप’ पंचायत का इंतजाम अभी तक नहीं किया गया है। लेकिन सवाल ये है कि क्या एन डी तिवारी को महज उम्र और ‘सार्वजनिक जीवन’ में उनके ‘योगदान’(!) की वजह से छोड़ देना चाहिए? Read more

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आंध्र प्रदेश और मीडिया की विभाजनकारी भूमिका

ग्लोबल टेलीविजन ने विभाजनकारी भूमिका आरंभ कर दी है। तेलंगाना के सवाल पर जिस तरह का कवरेज आया है वह चिंता की बात है। उससे तीन सवाल पैदा हुए हैं। पहला – क्या तेलंगाना आंदोलन पर जिम्मेदार टीवी कवरेज आया ? दूसरा – कांग्रेस और बीजेपी टेलीविजन के दबाव में आकर राजनीतिक फैसले क्यों लेते हैं? और तीसरा सवाल यह कि राजनीतिक फैसले, खासकर विभाजनकारी मसलों को प्रभावित करने में ग्बोबल मीडिया किस तरह की भूमिका निभाता है?

टीवी कवरेज ने विभाजनकारी तेलंगाना विवाद को वैध बनाया। तेलंगाना के आंदोलन में निहित अतार्किक समझ को वैध बनाया। यह भ्रम पैदा किया तुरंत फैसला करो। बगैर सोचे फैसला करो। केन्द्र सरकार ने अपनी राजनीतिक समझ को चैनलों के कवरेज के आधार वैध बनाया। सच यह है कि तेलंगाना राज्य बन नहीं सकता। यह मसला वर्चुअल मीडिया ने बनाया और इसके ही आधार पर कांग्रेस और भाजपा ने इसके पक्ष में फैसला लिया। ग्लोबल मीडिया आमतौर पर इस तरह के मसलों पर सारी दुनिया में विभाजनकारी भूमिका अदा करता रहा है। भारत में भी वह यही कर रहा है। Read more

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