“मौत का पिंजरा”
February 20, 2010 by विनीत कुमार
Filed under पहरेदार
आजतक पर ‘मौत का पिंजरा’ स्टोरी देखकर मैं अपने को रोक नहीं पाया। मैंने तुरंत शम्स ताहिर खान को एसएमएस किया, “ये जबरदस्त स्टोरी है सर,इसमें सरोकार है,मैं रिकार्ड कर रहा हूं।” एसएमएस करने के मिनट भर बाद ही उनका फोन आया और उनकी पहली ही लाइन- “सच कहूं,मन बहुत कचोटता है। टेलीविजन पर ऐसी स्टोरी की गुंजाइश बहुत ही कम रह गयी है। बहुत मुश्किल है यहां ये सब करना।”
शम्स जब ऐसा बोल रहे थे तो मुझे लगा कि उनके भीतर से आशा किरण होम में हर दो दिन में मर रहे बच्चे का दर्द और टेलीविजन के भीतर इस तरह की मर रही खबरों का दर्द दोनों एक साथ निकल रहे हों। ऐसा लगा कि एक संवेदनशील इंसान और सरोकारी टेलीविजन पत्रकार की चिंता घुलकर एक एब्सर्ड स्थिति की तरफ इशारा कर रहे हों। फोन पर मैं भी भावुक-सा हो जाता हूं और कहता हूं- आप बिल्कुल सही कह रहे हैं सर। मन ही मन सोचता हूं कि इस स्टोरी का प्रोमो पिछले एक घंटे से देख रहा हूं और इस बीच दीपिका पादुकोणे की लालपरी बनने की कथा से लेकर जावेद अख्तर-आमिर खान विवाद, खान ही सुपर है… और भी दुनियाभर की स्टोरी इस चैनल पर देखता रहा। मैं आगे कहा- ऐसी स्टोरी पर लगातार नजर बनाए हुए हूं सर, मैं इनकी लगातार रिकॉर्डिंग कर रहा हूं। आगे चलकर इस पर कुछ करुंगा। कुछ गंभीर तरीके से लिखने की कोशिश करुंगा। उन्होंने कहा- आप जरुर लिखिए, लिखने के क्रम में कभी भी किसी तरह की जरुरत हो, आप बताइएगा… हमारी बात यहीं पर ख़त्म होती है। Read more
अगर वो ख़बरें सच निकलती, तो ज़िंदा होते वाईएसआर
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएसआर रेड्डी के लापता होने की ख़बर आने के बाद करोड़ों निगाहें टेलीविजन न्यूज़ चैनलों पर अटक गईं। हर कोई जानना चाहता था कि वाईएसआर कहां हैं और किस हाल में हैं? अनहोनी की आशंका के बीच एक उम्मीद की मजबूत डोर भी थी कि वो ज़िंदा होंगे। यह और बात है कि एक दिन बाद ख़ौफ़नाक सच ने एक झटके में वो डोर तोड़ दी। हम सबको अहसास करा दिया कि ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं। हादसे कभी भी और किसी के साथ भी हो सकते हैं। लेकिन बीते दो दिन से चैनल पर नज़रें टिकाएं करोड़ों लोगों को न्यूज़ चैनलों ने तीन-चार मौकों पर दिलासा जरूर दिया। Read more




