तो क्या अब दंगे नहीं होंगे?
December 10, 2009 by प्रभात शुंगलू
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साम्प्रदायिक हिंसा ( निरोधक, रोकथाम और पीड़ित पुनर्वास ) बिल, 2009 को कैबिनेट की मंजूरी मिल गयी। और इसी के साथ इस बिल को सदन तक पहुंचाने और पेश करने की कवायद भी पूरी हो गयी। यदि ये बिल पास हुया और कानून बन गया तो केन्द्र सरकार को उस राज्य में केन्द्रीय बल भेजने की पूरी छूट होगी जहां साम्प्रदायिक दंगों में जान या माल का नुकसान हुया हो। बिल में प्रावधान है कि केन्द्र सरकार बिना राज्य सरकार से पूछे इस कार्यवाई को एकतरफा अंजाम दे सकती है। यानी संविधान की धारा 355 और 356 के अलावा केन्द्र सरकार के हाथ में राज्य सरकार को बर्खास्त करने का एक और हथकंडा होगा।
राज्य सरकारों को इसकी भनक है। शायद यही वजह है कि इस बिल पर पिछले 4 सालों में माथा-पच्ची चलती रही और संसद की स्थायी समिति ने 2005 वाले ओरिजिनल बिल में 59 संशोधन किये जिस पर कैबिनेट ने अपनी मोहर लगा दी। लेकिन नये बिल में भी वो सब कुछ है जिससे की राज्य सरकारें केन्द्र की मंशा को संदेह की नज़रों से देखें। क्योंकि ये बिल संविधान में दिये गये फेडरल सट्रक्चर की ही नींव पर हमला करता है। पुराने बिल में केन्द्र सरकार को साम्प्रदायिक हिंसा में किसी के मारे जाने पर ही उस राज्य में केन्द्रीय बल भेजने का अधिकार था। नये बिल के मुताबिक अब जान-माल किसी का भी नुकसान होने पर केन्द्रीय बल धड़धड़ाते हुए राज्यों में घुसकर इलाके में अपना तंबू गाड़ सकते हैं। Read more
अंग्रेजी अख़बारों में भी खुद को श्रेष्ठ साबित करने की होड़
November 24, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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रीडरशिप सर्वे के नतीजों को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़ कर पेश करने और अपनी पीठ थपथपाने में सिर्फ़ हिंदी अख़बार ही नहीं जुटे हैं। अंग्रेजी अख़बारों का भी यही हाल है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया है कि कैसे बाकी अख़बारों के पाठकों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।
डीएनए का दावा है कि मुंबई में टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और मुंबई मिरर समेत सभी अख़बारों के पाठकों की संख्या में चार से नौ फीसदी की गिरावट हुई है। जबकि डीएनए अकेला ऐसा अख़बार है जिसमें साल-दर-साल के हिसाब से बढ़त देखी गई है। Read more
IRS सर्वे: डींग हांकने में सब अख़बार आगे
November 24, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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इस बार भी रीडरशिप सर्वे में हर किसी के लिए कुछ न कुछ है। दैनिक भास्कर के पाठकों की संख्या में तेज़ गिरावट हो रही है, लेकिन उसका दावा है कि वो नंबर वन समूह है। प्रभात ख़बर का दावा है कि उसने हिंदुस्तान समेत सबको पटक दिया है, लेकिन फीसदी के हिसाब से। उसी तरह एनबीटी का दावा है कि वो नंबर वन के सिंहासन पर जा बैठा है। हिंदुस्तान अपनी तेज़ी पर इतरा रहा है। आंकड़ों के इस खेल ने पाठकों को उलझा दिया है। आप भी इस खेल पर एक नज़र डालिए। - मॉडरेटर
दैनिक भास्कर – लगातार पिट रहे हैं, फिर भी नंबर वन समूह
भास्कर देश का नंबर वन समूह
इंडियन रीडरशिप सर्वे-2009 आर-2 द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भास्कर समूह प्रतिदिन 1.73 करोड़ पाठकों के साथ भारत का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला समाचार पत्र समूह घोषित किया गया है। दूसरे स्थान पर दैनिक जागरण और तीसरे पर टाइम्स ऑफ इंडिया है। समूह का अंग्रेजी अखबार डीएनए मुंबई, पुणो, अहमदाबाद और जयपुर में नंबर दो पर बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि भास्कर अपने सभी क्षेत्रों में अग्रणी अखबार है और लगातार आगे बढ़ रहा है। Read more
हिंदी के टॉप 10 अख़बार
November 23, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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हिंदी अख़बार में कौन कितना बढ़ा और किसे कितना नुकसान हुआ – यह जानने के लिए आप इस चार्ट पर गौर कर सकते हैं। यहां ताज़ा सर्वे के अलावा पिछले दो सर्वे के नतीजे भी दिए हुए हैं।

अंग्रेजी के टॉप 5 अख़बार
November 23, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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अब एक नज़र अंग्रेजी के टॉप 5 अख़बारों के आंकड़ों पर। यहां भी हमने ताज़ा सर्वे के अलावा आखिरी दो सर्वे के आंकड़े पेश किए हैं। ताकि आप अंदाजा लगा सकें कि किस अख़बार को कितनी बढ़त हासिल हुई है और किसे कितना नुकसान उठाना पड़ा।

कौन हिट, कौन फ्लॉप
टेलीविजन न्यूज़ के सितारों का सम्मान
August 27, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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दिल्ली में बुधवार को इंडियन न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग अवार्ड की घोषणा कर दी गयी। हिंदी और अंग्रेजी न्यूज चैनलों के लिए कुल 11 कैटेगरी के अवार्ड के लिए नॉमिनेशन मंगाये गये थे। नॉमिनेट हुए 44 मीडियाकर्मियों में से विजेताओं के नाम का एलान कर दिया गया। कुछ खास कैटेगरीज के लिए नॉमिनेशन नहीं मंगाए गए थे। उनके बारे में फैसला ज्यूरी ने किया।
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आईएनबी अवार्ड, 2009 के लिए जिन पत्रकारों को चुना गया, उनके नाम इस तरह से हैं :
जागरण और टीओआई नंबर वन
May 9, 2009 by जनतंत्र डेस्क
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इंडियन रीडरशिप सर्वे (आर-1, 2009) के आंकड़े आ गए हैं। इसमें कोई उलटफेर नहीं है। मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल (एमआरयूसी) के ताजा सर्वे में इस बार भी हिंदी अख़बारों में दैनिक जागरण और अंग्रेजी में टाइम्स ऑफ इंडिया सबसे आगे हैं।
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