NBT-जागरण संतुलित, भास्कर-हिंदुस्तान हुड़दंग से नाराज़
लेखक: जनतंत्र डेस्क | March 10, 2010 | पहरेदार | Leave a Comment
राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल का पास होना एक ऐतिहासिक लम्हा है। हालांकि इस बिल की मंजिल अभी बहुत दूर है फिर भी इस लम्हे को भी ऐतिहासिक कहा जा सकता है। और जब भी इतिहास बनता है तो कहीं खुशी के साथ कहीं ग़म की गाढ़ी लकीर भी खिंचती है। इस बिल में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के लिए अलग से प्रावधान नहीं किया गया है और इससे देश के बहुसंख्य तबके में छले जाने का अहसास घर कर रहा है। इस अहसास को जल्द से जल्द दूर किया जाना चाहिए वरना महिला सशक्तिकरण की कोशिशें अधूरी रह जाएंगी। जनतंत्र पर इस मुद्दे पर बहस जारी रहेगी। आप भी अपनी राय देने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। साथ ही महिला आरक्षण बिल पर देश के बड़े अखबारों की क्या राय है – इस पर भी आप एक नज़र डालें। आपकी सहूलियत के लिए हमने कुछ चुनिंदा हिंदी अख़बारों के संपादकीय को सिलसिलेवार ढंग से इकट्ठा किया है। ताकि आप उन अख़बारों की नीति को अच्छे से समझ सकें। - मॉडरेटर Read more
हिंदुस्तान के साथ बिहार की विकास यात्रा पर चलें
लेखक: शशि शेखर | March 9, 2010 | पहरेदार | Leave a Comment
बिहार का जिक्र आते ही जेहन में जैसे दो तस्वीरें बनती हैं। पहली सुनहरे अतीत की, जिसमें महावीर हैं। बुद्ध हैं। सम्राट चंद्रगुप्त हैं। अशोक हैं। चाणक्य हैं। गांधी का चंपारण है। बाबू राजेंद्र प्रसाद हैं। लोकनायक जयप्रकाश नारायण आदि हैं। इसके उलट दूसरा बिंब बदहाली का उभरता है। एक घायल और मदद के लिए पुकारता बिहार। इधर पिछले कुछ दिनों से उत्साहजनक ख़बरें आई हैं कि देश का यह सर्वाधिक संवेदनशील सूबा करवट ले रहा है। अपहरण अब यहां उद्योग नहीं रहा। बड़े-बड़े अपराधी सलाखों के पीछे हैं। सड़कों के गड्ढ़े भर चले हैं और शहरों पर छाई मुर्दनी की कालिख धुल चली है। यहीं सवाल उठता है कि विकास की इस कदमताल को ओलंपिक की फर्राटा सी गति कैसे दी जाए? यहां की तरुणाई को वो जोश और जुनून कैसे दिया जाए कि वेअपनी जमीन पर रहकर उसे और मजबूत करने की कोशिश करें? Read more
बिहार में हिंदुस्तान का जलवा
लेखक: जनतंत्र डेस्क | March 9, 2010 | पहरेदार | 2 Comments
रोशनी की झालर में नहाया दानापुर के शिवाला स्थित हिंदुस्तान का नया परिसर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी से गुलजार हो गया। सोमवार की शाम मुख्यमंत्री ने यहां आते ही बटन दबाकर नई प्रिंटिंग मशीन का उद्घाटन किया। इसके बाद धड़ाधड़ दौड़ने लगीं मशीनें और नए कलेवर व आकर्षक रंगों के साथ छपने लगा आपका प्रिय व शुभचिंतक अख़बार हिंदुस्तान।
यह अत्याधुनिक मशीन 42 हज़ार वर्गफीट इलाके में स्थापित की गई है। यूरोप में प्रयोग में आ रही अत्याधुनिक तकनीक वाली इन मशीनों को हिंदुस्तान के छह एकड़ के नए और विशाल परिसर में बैठाया गया है। यहां दो प्रिंटिंग मशीनें आई हैं जो 90 हज़ार कापी प्रति घंटे छापेंगी। बिहार के लिए हिंदुस्तान का यह योगदान है क्योंकि 100 करोड़ का निवेश करने वाली कुछ कंपनियों में हिंदुस्तान मीडिया वेंचर लिमिटेड (एचएमवीएल) भी शामिल है। हिंदुस्तान की नई मशीन अथ्याधुनिक और अपने आप में स्टेट ऑफ आर्ट है। यह बिहार की सबसे बड़ी प्रेस है। Read more
अज्ञेय की याद में
लेखक: जनतंत्र डेस्क | March 8, 2010 | पहरेदार | Leave a Comment
अज्ञेय की आवाज में उनके काव्य-पाठ के साथ रविवार को यहां अज्ञेय जन्मशती समारोहों की शुरुआत हुई। सात मार्च को अज्ञेय का सौवां साल शुरू हो गया है। लेखकों की ओर से पूरे साल देशभर में उनकी जन्मशती मनाने के लिए कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। Read more
प्रेस क्लब में पुष्पेंद्र-परवेज पर तानाशाही का आरोप
लेखक: जनतंत्र डेस्क | February 27, 2010 | पहरेदार | Leave a Comment
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और अध्यक्ष परवेज अहमद फिर विवादों के घेरे में हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने क्लब की मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य नरेंद्र भल्ला को जबरन उनके अधिकारों से वंचित कर दिया और कमेटी की बैठकों में आने से रोका। यही नहीं उन दोनों पर कई गैरकानूनी गतिविधियों का आरोप भी लगा है।
जनतंत्र के पास मौजूद दस्तावेज के मुताबिक प्रेस क्लब चुनाव में नरेंद्र भल्ला और ललित मोहन जोशी को 216-216 वोट मिले। मुकाबला टाई होने पर चुनाव अधिकारी ने दोनों को जीता हुआ घोषित किया। उसके बाद पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और उनकी टीम ने ललित मोहन जोशी को तमाम बैठकों में आने का न्योता दिया। लेकिन नरेंद्र भल्ला को इसकी जानकारी नहीं दी गई। इतना ही नहीं, सदस्यों को मैनेजमेंट कमेटी के बारे में भेजी गई चिट्ठी से भी नरेंद्र भल्ला का नाम काट दिया गया। Read more
सचिन या रेल बजट – मैं तो सचिन के साथ हूं और आप?
लेखक: समरेंद्र | February 25, 2010 | पहरेदार | 4 Comments
ममता बनर्जी के रेल बजट पर सचिन की डबल सेंचुरी भारी पड़ गई। न्यूज़ चैनलों और अख़बारों ने डबल सेंचुरी को ज़्यादा तरजीह दी। बहुत से लोग मीडिया के रवैये से नाराज़ हैं। उनके मुताबिक रेल बजट जैसे गंभीर मुद्दे की जगह सचिन की डबल सेंचुरी को दिखा कर न्यूज़ चैनलों ने जनता के हितों के साथ साथ भद्दा मजाक किया है। लेकिन क्या यह सोच एकतरफा नहीं है? क्या ममता बनर्जी ने जो कहा वो सभी कुछ इतना अहम था कि उससे थोड़ी देर के लिए दूर हट कर न्यूज़ चैनलों ने कोई बहुत बड़ा गुनाह कर दिया है? Read more
सचिन के रंग में रंगे सभी अख़बार
लेखक: जनतंत्र डेस्क | February 25, 2010 | पहरेदार | 2 Comments
कुछ मुद्दों पर बहस नहीं की जा सकती। खासकर उन मुद्दों पर जिनसे करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हों। सचिन तेंदुलकर का दोहरा शतक भी उन्हीं में से एक है। कई ज्ञानी कह चुके हैं कि क्रिकेट भारत में एक धर्म की तरह है और अगर क्रिकेट धर्म है तो सचिन तेंदुलकर उस क्रिकेट धर्म को मानने वालों के लिए एक देवता जैसे हैं। यही वजह है कि जब सचिन तेंदुलकर ने वनडे इतिहास का जब पहला दोहरा शतक जमाया तो सभी अख़बार उनके रंग में रंग गए। उनका यह करिश्मा रेल बजट पर भारी पड़ गया।
हालांकि कुछ बुद्धिजीवियों को यह बात पसंद नहीं आएगी। वो कल रात न्यूज़ चैनलों की आलोचना कर रहे होंगे और आज अख़बारों की। एक लिहाज से देखे तो उनकी आलोचना अपनी जगह सही है। रेल में हर रोज करोड़ों लोग सफर करते हैं और उनके हितों से जुड़े मुद्दे को पीछे नहीं ढकेला जा सकता। लेकिन यह भी सही है कि सचिन ने जो करिश्मा किया है वो बार-बार नहीं होता। बीते चालीस साल के वनडे इतिहास में पहला दोहरा शतक बना है और वो भी सचिन के हाथों। इसलिए आज अगर रेल बजट की जगह सचिन पहली ख़बर हैं तो कोई हर्ज नहीं। आप भी एक नज़र डालिए कि किन अख़बारों ने पहले पन्ने पर इन दोनों ख़बरों को किस तरह पेश किया है।

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सचिन के नाम पर न्यूज़ चैनलों के इस जश्न में शामिल हों
लेखक: जनतंत्र डेस्क | February 24, 2010 | पहरेदार | Leave a Comment
आज सुबह संसद में ममता बनर्जी की रेल खूब तेज रफ़्तार से दौड़ी। सुबह से ही न्यूज़ चैनलों पर ममता बनर्जी छाई हुईं थी। लेकिन शाम होते-होते सबकुछ बदल गया। ग्वालियर से सचिन एक्सप्रेस इतनी तेजी से दिल्ली की ओर दौड़ी कि ममता एक्सप्रेस पटरी से उतर गई। न्यूज़ चैनलों पर सिवाय सचिन तेंदुलकर के किसी और की चर्चा नहीं थी। शायद देर रात भी बाकी ख़बरों को बहुत थोड़ा स्पेस मिले। सचिन तेंदुलकर के गुणगान में न्यूज़ चैनल कुछ ऐसा डूबे कि रेल बजट की झलकियां गायब हो गईं।
आज तक हो या फिर ज़ी न्यूज़ – सभी चैनलों पर सचिन गाथा शुरू गई। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बधाई संदेश चलाए जाने लगे। सभी शहरों में ओबी अप करा दी गई। लोगों की प्रतिक्रियाएं दिखाई जाने लगीं। भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड… जहां का क्रिकेट खिलाड़ी मिला उसी से बातचीत हो गई। शोएब अख़्तर से लेकर शेन वॉर्न तक सभी सचिन के सामने अपनी गेंदबाजी के डरावने अनुभव को बयां करने लगे। लता मंगेशकर और अभिजीत जो भी गायक मिला उसी से सचिन पर चर्चा हो गई। कुछ ने अपने गाये गीत उन्हें समर्पित भी कर दिए। Read more
“मौत का पिंजरा”
लेखक: विनीत कुमार | February 20, 2010 | पहरेदार | 3 Comments
आजतक पर ‘मौत का पिंजरा’ स्टोरी देखकर मैं अपने को रोक नहीं पाया। मैंने तुरंत शम्स ताहिर खान को एसएमएस किया, “ये जबरदस्त स्टोरी है सर,इसमें सरोकार है,मैं रिकार्ड कर रहा हूं।” एसएमएस करने के मिनट भर बाद ही उनका फोन आया और उनकी पहली ही लाइन- “सच कहूं,मन बहुत कचोटता है। टेलीविजन पर ऐसी स्टोरी की गुंजाइश बहुत ही कम रह गयी है। बहुत मुश्किल है यहां ये सब करना।”
शम्स जब ऐसा बोल रहे थे तो मुझे लगा कि उनके भीतर से आशा किरण होम में हर दो दिन में मर रहे बच्चे का दर्द और टेलीविजन के भीतर इस तरह की मर रही खबरों का दर्द दोनों एक साथ निकल रहे हों। ऐसा लगा कि एक संवेदनशील इंसान और सरोकारी टेलीविजन पत्रकार की चिंता घुलकर एक एब्सर्ड स्थिति की तरफ इशारा कर रहे हों। फोन पर मैं भी भावुक-सा हो जाता हूं और कहता हूं- आप बिल्कुल सही कह रहे हैं सर। मन ही मन सोचता हूं कि इस स्टोरी का प्रोमो पिछले एक घंटे से देख रहा हूं और इस बीच दीपिका पादुकोणे की लालपरी बनने की कथा से लेकर जावेद अख्तर-आमिर खान विवाद, खान ही सुपर है… और भी दुनियाभर की स्टोरी इस चैनल पर देखता रहा। मैं आगे कहा- ऐसी स्टोरी पर लगातार नजर बनाए हुए हूं सर, मैं इनकी लगातार रिकॉर्डिंग कर रहा हूं। आगे चलकर इस पर कुछ करुंगा। कुछ गंभीर तरीके से लिखने की कोशिश करुंगा। उन्होंने कहा- आप जरुर लिखिए, लिखने के क्रम में कभी भी किसी तरह की जरुरत हो, आप बताइएगा… हमारी बात यहीं पर ख़त्म होती है। Read more
भड़ास और विस्फोट के बाद अब समाचार4मीडिया
लेखक: जनतंत्र डेस्क | February 19, 2010 | पहरेदार | 1 Comment
मीडिया से जुड़ी ख़बरों के लिए सबसे प्रतिष्ठित वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया (ई4एम) का अब हिंदी संस्करण भी लॉन्च हो गया है। इस वेबसाइट का नाम है समाचार4मीडिया। अब यह वेबसाइट शुरुआती दौर में और इसमें बहुत कुछ करने की ज़रूरत है। लेकिन तब भी इस पर आपको मीडिया जगत की तमाम हलचलें और कुछ बड़ी ख़बरें पढ़ने को मिल सकती हैं।
ई4एम समूह के सीईओ अनुराग बत्रा का कहना है हिंदी मीडिया की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए पाठकों, मीडिया संस्थानों और बाज़ार के बीच तालमेल बिठाने के लिए इसे लॉन्च किया गया है। जनतंत्र से बातचीत में उन्होंने कहा कि “हिंदी पत्रकारिता का दायरा काफी बढ़ गया है। इसके लिए एक हिंदी की साइट की जरूरत थी और हमने उस कमी को भरने की कोशिश की है। हमें लगता है कि अपनी कोशिश से अगर हम भाषाई मीडिया की बेहतरी में थोड़ा सा भी योगदान कर सकेंगे तो यह बड़ी बात होगी।”
अनुराग बत्रा ने यह भी कहा कि अपनी हिंदी वेबसाइट के जरिये उनकी कोशिश हिंदी मीडिया कम्युनिटी को जुटाने की होगी। अख़बार, पत्रिकाएं, टीवी चैनल, विज्ञापन एजेंसियां और कंपनियों को इकट्ठा लाने की कोशिश होगी। उन्होंने कहा कि “अगर आप देखें तो हिंदी अख़बारों का सर्कुलेशन अंग्रेजी मीडिया की तुलना में काफी ज़्यादा है। उसके पाठकों भी सम्पन्न हैं। लेकिन अब भी हिंदी अख़बारों को अंग्रेजी अख़बारों के मुकाबले कम विज्ञापन मिलता है। अगर हमारे प्रयासों से यह पैसा बढ़ेगा तो यह हमारा योगदान होगा।”
हिंदी के बाज़ार में खुद को स्थापित करने के लिए समाचार4मीडिया ने एक दिन पहले दिल्ली के इंडिया इस्लामिक सेंटर में गोलमेज सम्मेलन भी किया। जिसमें हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर, दिल्ली प्रेस के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ़ परेश नाथ, आउटलुक ग्रुप के प्रकाशक एवं प्रेसिडेंट महेश्वर पेरी, दैनिक भास्कर के समूह संपादक श्रवण गर्ग, भारती एयरटेल के मीडिया प्रमुख अरुण शर्मा, जेनिथ-ऑप्टीमीडिया के सीईओ सत्यजीत सेन, एनडीटीवी इंडिया के प्रबंध संपादक अनिंदो चक्रवर्ती तथा एनडीटीवी इंडिया के सीईओ समीर कपूर ने हिस्सा लिया।
उस मौके पर शशि शेखर ने कहा कि “समाचार4मीडिया से हमें काफी उम्मींदे हैं। 1828 के आसपास जो भी अखबार निकले, वे सारे आज के ब्लॉग की तरह थे। तब अखबार भी अभद्र भाषा से शुरू हो कर अभद्र भाषा पर खत्म हो जाते थे। भारत का पहला समाचारपत्र हिक्की गजट भी एक अंग्रेज ने तत्कालीन गवर्नर वारेन हेस्टिंग्स से नाराज होकर निकाला था। उस अखबार का उद्देश्य जनता को शिक्षित-सूचित करना नहीं था। आज अभी ब्लॉग उसी दौर से गुजर रहे है। कुछ ब्लॉग जो अभी चल रहे हैं उनकी भाषा में सिर्फ गालियों का ही इस्तेमाल होता है। समय के साथ उनमें बदलाव आएगा। समाचार4मीडिया इस परिवर्तन का नेतृत्व करेगा।”
जाहिर है, समाचार4मीडिया से हिंदी मीडिया के दिग्गजों को बहुत उम्मीद है। ई4एम समूह के सीईओ का कहना है कि उनकी टीम इन उम्मीदों पर ख़रा उतरने की पूरी कोशिश करेगी। आप भी अब हिंदी मीडिया की हलचलों को जानने के लिए समाचार4मीडिया पर जा सकते हैं। (ब्यूरो रिपोर्ट)



