पाक के ख़िलाफ़ जेहाद का आगाज़ भारत की ओर से हो!
लेखक: प्रभात शुंगलू | January 22, 2010 | देश-दुनिया, ब्लॉग | 2 Comments
विशाल भारद्वाज की जल्द रिलीज होने वाली नई फिल्म इश्कियां में पाकिस्तान के मशहूर सूफी गायक मरहूम नुसरत फतेह अली खान के भतीजे राहत फतेह अली खां का गाया गाना इस समय हिंदुस्तान के फिल्म संगीत प्रेमियों का नेशनल ऐंथम हो गया है। गुलज़ार के लिखे इस गीत ‘दिल तो बच्चा है’ को गाकर राहत ने बच्चे, बूढ़े़ सब के दिलों में अपनी जगह बना ली है। संगीत प्रेमियों में राहत कोई नया नाम नहीं हैं। इससे पहले भी वो कई हिंदी फिल्मी हिट गाने गा चुके हैं। राहत पाकिस्तानी हैं और जब वो अपनी आवाज़ का जादू बिखेरते हैं तो सारा हिंदुस्तान उसे सुनता है। राहत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान की फरीदा खानम हों या नुसरत, मेहदी हसन हो या गुलाम अली, पाकिस्तान का रॉक बैंड जुनून हो या नए युवा गायक आतिफ असलम। भारत ने पाकिस्तानी टैलेंट की हमेशा कद्र की और सर आंखों पर बिठाया। अमन का कोई भी सिपाही 26\11 हमले के लिए पाकिस्तान की कारस्तानियों को माफ तो नहीं कर सकता। लेकिन इसका गुस्सा फनकारों पर निकालने का इल्ज़ाम भी अपने ऊपर नहीं लेना चाहता। Read more
अब वो अमर हो जाएंगे
लेखक: प्रभात शुंगलू | January 21, 2010 | देश-दुनिया, ब्लॉग | Comments Off
अमर सिंह कहते हैं मैं समाजवादी बनूंगा मुलायमवादी नहीं। मुलायम के नाम से इतनी बेरूखी। वो तो आपके नेताजी हैं। आप उनके राइट हैंड, लेफ्ट हैंड, उनकी नाक, नाक के बाल, कान, उनकी लाज, उनकी साख, उनके धन, उनकी सम्पदा दिल, दिमाग, मन, मस्तिष्क, उनके सैफेई सब कुछ थे। मुलायम तो केवल नाम के मुलायम सिंह यादव रह गए थे असली समाजवादी तो आप थे। पार्टी की साइकिल तो आप ही थे। जिसके आगे अमिताभ और जया बच्चन थे, पीछे कैरियर पर संजय दत्त थे, हैंडल पर जया प्रदा भाभी थीं, अनिल अंबानी की घंटी थी। पीछे मेडगार्ड में गोदरेज की लाइट। आप खुद साइकिल की चेन, उसका पहिया और उसके पहिये में डलने वाले मोबिल ऑयल। वो अलग बात है कि साइकिल मुलायमवादी अमर सिंह की समाजवादी पार्टी का बस चुनाव निशान थी। बाकी … आप तो कभी एसयूवी से नीचे चले नहीं। नेताजी को भी उसकी खूब सवारी करवायी। Read more
बाउंड्री भी नहीं लगा पाया आईपीएल
लेखक: अनवर जमाल अशरफ़ | January 20, 2010 | देश-दुनिया, ब्लॉग | 2 Comments
दो साल पहले आईपीएल का बाज़ार सजा और क्रिकेटरों को ख़रीदा बेचा गया. क्रिकेट चाहने वाले तो तभी बेचैन हो उठे, लेकिन इस बार बाज़ार में पेश किए गए खिलाड़ी जब नहीं बिके, तो बेचैनी और बढ़ गई.
विश्व चैंपियन पाकिस्तान के खिलाड़ियों को आईपीएल की किसी टीम ने नहीं ख़रीदा. यह सही है कि वेस्ट इंडीज़ के रामनरेश सरवन और डेरेन गंगा जैसे खिलाड़ियों को भी ख़रीदार नहीं मिला और इंग्लैंड के ग्रेम स्वैन और श्रीलंकाई ओपनर उपुल तरंगा को भी नहीं. लेकिन इन बड़े नामों ने ट्वेन्टी 20 क्रिकेट में कोई बड़ा धमाल नहीं मचाया है. Read more
गूगल को चीन का करारा जवाब
लेखक: जनतंत्र डेस्क | January 15, 2010 | देश-दुनिया | Comments Off
चीन ने सर्च इंजन गूगल की धमकी का जवाब दे दिया है। चीन ने कहा है कि चीन ने कहा है कि वह कारोबार को बढ़ावा देता है लेकिन चीन में कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों को वहां के कानून मानने ही होंगे। किसी भी विदेशी कंपनी को मनमानी की छूट नहीं जी सकती है।
दो दिन पहले गूगल ने चीन से बाहर निकलने की धमकी दी। गूगल के मुताबिक उसके ग्राहकों के ई-मेल हैक किए जा रहे हैं। ऐसी एक दो नहीं बल्कि दर्जनों शिकायतें हैं जिनमें मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के व्यक्तिगत ई-मेल हैक किए गए और फिर गोपनीय दस्तावेज चुराए गए। यह सब चीन सरकार के इशारे पर हो रहा है ऐसे में या तो चीन हैकिंग को रोकने के लिए कोई ठोस उपाय करे या फिर वो चीन से बाहर चला जाएगा। Read more
गुड बाय गूगल
लेखक: जनतंत्र डेस्क | January 15, 2010 | देश-दुनिया | Comments Off
चीन में बीजिंग के गूगल हेडक्वार्टर के बाहर ढेरों ढेर संदेश, फूल और फल गूगल का इस्तेमाल करने वालो ने रखे हैं. गूगल यूज़र्स चीन की वेब सेंसरशिप का विरोध कर रहे थे.
“गुड बाय गूगल. आप दीवार बना सकते हैं लेकिन आप उसे लोगों के दिलों से नहीं निकाल सकते. हम दीवार, चीन के फायरवॉल (दीवार) के दूसरे हिस्से को देखना चाहते हैं.”
गूगल के मुख्यालय के बाहर एक व्यक्ति ने लिखा है, तो दूसरे ने अपने संदेश में कहा है कि “मैं नहीं जानता कि मैं गूगल के बग़ैर क्या करूंगा. मैं यहां गूगल के लिए अपना आदर प्रकट करने यहां आया हूं.” Read more
ये सिस्टम ही सबसे बड़ा इडियट है
लेखक: प्रभात शुंगलू | January 6, 2010 | देश-दुनिया, ब्लॉग | 5 Comments
फिल्म 3 इडियट्स में स्वानंद किरकिरे का ये गीत हमारे बचपन की याद ताजा कर देता है।
कंधों को किताबों के बोझ ने झुकाया
रिश्वत देना खुद पापा ने सिखाया
99 परसेन्ट मार्क्स लाओगे तो घड़ी
वर्ना छड़ी
बचपन में तो हमें पता भी नहीं लग पाया कि रिश्वत के कितने रूप होते हैं। जो हम नहीं पूछ पाए आज के नौजवान ज़रूर पूछते होंगे। मुंबई के तीन अलग-अलग इलाकों में रहने वाली नेहा सावंत, भजनप्रीत और सुशांत ने भी खुदकुशी करने से पहले अपने मां-पापा से जरूर पूछा होगा कि पढ़ाई में अच्छे नंबर नहीं आए तो क्या वो उन्हें अपनी बेटी या बेटा मानना छोड़ देंगे। तो क्या आप मेरा तिरस्कार कर देंगे। इनके अभिभावक अपने बच्चों को शायद तर्कसंगत जवाब नहीं दे पाए। मां-पापा उनका तिरस्कार करते इससे पहले बच्चों ने ही ज़िंदगी का तिरस्कार कर दिया। Read more
मेरा भारत महान! होप 2010
लेखक: प्रभात शुंगलू | January 4, 2010 | देश-दुनिया | Comments Off
फिरोजशाह कोटला मैदान में श्रीलंकाई बल्लेबाज़ों पर बॉल बिल्कुल बॉडीलाइन सीरीज के अंदाज में आ रही थी। बस डगलस जार्डीन कहीं नहीं दिख रहा था। थोड़ी देर बाद राज़ खुला। कोटला की पिच ने जार्डीन के खूंखार तेवर अपनाए हुए थे। पिच इतनी ऊबड़-खाबड़ थी कि गेंद कभी दस-दस फिट उछलती, कभी सुर्री होकर बल्लेबाज और विकेटकीपर धोनी को चकमा देकर निकल जाती। यही कारण था कि 400 रन बनाने वाले श्रीलंकाई खिलाड़ी तड़ातड़ आउट होते चले गए। 85 रन पर पांच विकेट हो चुके थे जब संदेह गहराता देख मैच रेफरी ने वनडे सीरीज का पांचवा और आखिरी मैच रद्द कर दिया।
इसी पिच पर 13 महीने बाद वर्ल्ड कप खेला जाना है। बात इतनी छोटी नहीं थी। ये अंतर्राष्ट्रीय मैच था। ये मैच विश्व क्रिकेट की सबसे ताकतवर और सबसे अमीर बॉडी यानी बीसीसीआई के झंडे तले हुआ था। और होस्ट कंट्री विश्व की नम्बर वन टेस्ट टीम है। ये हिंदुस्तान में ही हो सकता है। जिस कोटला मैदान में गावस्कर ने सर डॉन ब्रैडमैन के 29 शतक की बराबरी की थी वो आज अपनी कमेंट्री में ये कहे बिना नहीं रह पाए कि पिच का हाल ऐसा था मानो गंजी खोपड़ी पर किसी ने कृत्रिम रूप से जगह जगह बाल उगवा लिए हों। जिस पिच पर कुंबले ने परफेक्ट टेन लेकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था वहां मैच इसलिए नहीं खेला जा सका क्योंकि पिच ठीक से बनायी ही नहीं गयी थी। Read more
26/11 पर राम प्रधान कमेटी की रिपोर्ट पेश, कठघरे में गफूर
लेखक: जनतंत्र डेस्क | December 21, 2009 | देश-दुनिया | Comments Off
मुंबई में 26/11 के हमले के दौरान पुलिस की भूमिका की जांच के लिए बनी राम प्रधान कमेटी की रिपोर्ट आज महाराष्ट्र विधानसभा में रख दी गई। इस रिपोर्ट में कई खामियों की तरफ़ ध्यान खींचा गया है। तब के मुंबई पुलिस कमिश्नर हसन गफूर की जमकर खिंचाई की गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गफूर पूरे ऑपरेशन के दौरान अपनी टीम का सही ढंग से नेतृत्व नहीं कर सके। वो ऑपरेशन के दौरान ट्राईडेंट होटल के बाहर जमे रहे और कंट्रोल रूम में नहीं गए, जो ग़लत था। यहां तक कि उन्होंने हमले के बाद सभी संबंधित लोगों को इसकी ठीक से जानकारी भी नहीं दी।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में मंत्रालय, सचिवालय और पुलिस के बीच तालमेल की कई कमियों को भी उजागर किया है। हालांकि इसी रिपोर्ट में ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया की खुल तारीफ की गयी है। दिलचस्प बात ये है कि मारिया को पुलिस कंट्रोल रूम का जिम्मा सौंपने का फैसला हसन गफूर ने ही किया था। वरना उस वक्त कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी ज्वाइंट कमिश्नर के एल प्रसाद की थी। Read more
आखिर कौन है “मुन्नी मोबाइल”?
लेखक: जनतंत्र डेस्क | December 21, 2009 | देश-दुनिया | Comments Off
मुन्नी मोबाइल की सबसे बड़ी खासियत उसकी भाषा और शिल्प है, जो इसकी विषय वस्तु को पाठकों के सामने लाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इस उपन्यास के केंद्र में दो पात्र हैं – आनंद भारती जो पत्रकार हैं और मुन्नी मोबाइल। पाठक भारती की नज़र से मुन्नी मोबाइल नाम की इस महिला की ज़िंदगी से रूबरू होता है, जिसका सफर एक सीधी-सादी नौकरानी के रूप में शुरू होकर वेश्यावृत्ति करवाने वाली महिला के रूप में अंत हुआ। इस यात्रा के दौरान लेखक बदलते मूल्यों, शहरी परिवेश, आधुनिक उपनिवेशवाद, आर्थिक मंदी, व्यवस्था की खामियों, मध्यमवर्ग के आदर्शवादी युवाओं की कुंठाओं को उजागर करता है। Read more
“कोपेनहेगन एकॉर्ड” पर एक नज़र
लेखक: जनतंत्र डेस्क | December 20, 2009 | Fact File, देश-दुनिया | Comments Off
धरती की रक्षा के लिए चल रहा कोपेनहेगन सम्मेलन बिना किसी ठोस समझौते के खत्म हो गया। अमीर देशों की मनमानी के आगे धरती को और गर्म होने से बचाने की कोशिशों ने दम तोड़ दिया। आखिरी दौर में अमेरिका, भारत, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर कोपेनहेगन एकॉर्ड नाम से एक ढीले-ढाले समझौते का मसौदा जरूर तैयार किया। लेकिन इसे बाकी देशों की मंजूरी हासिल नहीं हो सकी। यही नहीं गरीब देश अब विकसित और विकासशील देशों पर विश्वासघात का आरोप लगा रहे हैं। इस एकॉर्ड की सबसे बड़ी खामी यह है कि इसमें दर्ज किसी भी बात को मानना कानूनी तौर पर ज़रूरी नहीं है। आप भी इस समझौते पर एक नज़र डालिए। – मॉडरेटर
Copenhagen Accord
The Heads of State, Heads of Government, Ministers, and other heads of delegation present at the United Nations Climate Change Conference 2009 in Copenhagen, In pursuit of the ultimate objective of the Convention as stated in its Article 2, Being guided by the principles and provisions of the Convention, Noting the results of work done by the two Ad hoc Working Groups, Endorsing decision x/CP.15 on the Ad hoc Working Group on Long-term Cooperative Action and decision x/CMP.5 that requests the Ad hoc Working Group on Further Commitments of Annex I Parties under the Kyoto Protocol to continue its work, Have agreed on this Copenhagen Accord which is operational immediately. Read more




