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द्वारा लिखित आलेख:
हुसैन, तुम धर्म के ठेकेदारों से माफ़ी मत मांगना
,लेखक: प्रभात शुंगलू | March 2, 2010 | स्पेशल रिपोर्ट | 6 Comments
मकबूल फ़िदा हुसैन को कतर की नागरिकता दिये जाने पर फिर से उन्हें खोने का एहसास हो रहा। लेकिन राजनीति की बिसात पर हुसैन बस मोहरा बन कर रह जाते हैं। आज सेक्यूलरिज़म की दुहाई देने वाले चुप हैं। ये वही लोग हैं जिन्होने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को सरकारी दस्तावेजों के विशाल डम्पिंग ग्राउंड में दफ्न कर दिया है। ये हिम्मत कौन दिखाएगा कि उस रिपोर्ट को बाहर निकाल कर, उसे झाड़ पोंछ कर उस पर सिरे से अमल किया जाए। हुसैन से अलग जस्टिस सच्चर ने जो देश की अक़लियत के विकास का एक्स-रे निकाला उसमें देश की सेक्यूलर छवि तार-तार दिखी। Read more
हीरो जीता, विलेन हारा
,लेखक: प्रभात शुंगलू | February 14, 2010 | देश-दुनिया, ब्लॉग | 8 Comments
ठाकरे जी,
आपको ब्रेकिंग न्यूज दे दें। आप तो “माई नेम इज़ ख़ान” देखने नहीं गए। लेकिन महाशिवरात्रि के दिन जो दर्शक आपके ‘शिवसैनिकों’ का घेरा तोड़कर मल्टीप्लेक्सेज़ में फिल्म देखने गया उसने फिल्म देखते देखते ताली पीटी। आप पूछेंगे कि इसमे कौन सी नई बात है। अपने हीरो को देखकर तो दर्शक ताली और सीटी बजाता ही है। लेकिन फिल्म देख रहे हमारे साथी ने अलग रिपोर्ट दी। सोचा आप को भी कन्वे कर दूं। मेरे साथी ने बताया कि फिल्म के इंटरवेल में दर्शकों ने तालियां पीटीं। और वो इसलिये कि उन्हें ये एहसास हुआ कि उन्होंने क्या अचीव (हासिल) किया है। उन्हें एहसास हुआ कि कैसे आपके तालिबानी हुक्म की धज्जियां उड़ाते, आपकी लुम्पेन बानर सेना को ठेंगा दिखाते हुए, अपने इंडियननेस पर भरोसा रखते हुए, आपकी स्यूडो (छद्म) भारतीयता बेनकाब करते हुए, उन्होंने वो कर दिखाया जो आप हर हाल में रोकना चाहते थे। Read more
अब महानायक पहनेंगे भगवा चश्मा, करेंगे मोदी वंदना
,लेखक: प्रभात शुंगलू | February 4, 2010 | देश-दुनिया, ब्लॉग | 1 Comment
अब सदी का महानायक गुजरात का चेहरा होगा। टूरिस्टों को गुजरात की ओर आकर्षित करने के लिए अमिताभ बच्चन अब मोदी के ब्रैंड अंबैसेडर होंगे। अमिताभ बच्चन ने नरेंद्र मोदी का निमंत्रण स्वीकार करते हुए उन्हें चिठ्ठी लिखका हामी भर दी है। अब गुजरात के दो चेहरे होंगे। नरेंद्र मोदी और अमिताभ बच्चन। दरअसल, ये डील तो उसी दिन पक्की हो गई थी जिस दिन अमिताभ बच्चन अपनी फिल्म “पा” के प्रमोशन के लिए गुजरात पहुंचे और नरेन्द्र मोदी और उनकी पूरी कैबिनेट के लिए फिल्म “पा” की स्पेशल स्क्रीनिंग की। उस दिन “पा” और गुजरात के हिंदुवादी “पा” मोदी की झप्पियां डालते हुए तस्वीर देखकर यूं लगा कि कुंभ के मेले में बिछड़े भाई सालों बाद मिले हों। Read more
माया का नया मंत्र – विश करो, ज़िद करो
,लेखक: प्रभात शुंगलू | February 3, 2010 | देश-दुनिया, ब्लॉग | 1 Comment
उनके साथ ब्लैक कैट रक्षक क्या कम थे कि मायावती ने अपनी मूर्तियों की सुरक्षा के लिये भी ‘रक्षक’ ढूंढ़ने की ठान ली। स्पेशल ज़ोन सिक्यूरिटी फोर्स बिल विधानसभा में पेश हो चुका है। बीएसपी का दोनों सदनों में बहुमत है। इसलिए बिल आसानी से पास भी हो जाएगा। सदन में बिल पर चर्चा तो बस फॉर्मेलिटी भर है। बिल के दायरे में 13 मॉल एवेन्यू भी है जहां मायावती खुद रहती हैं। मूर्तियों में जान फूंक दी जाए तो वो भगवान का दर्जा पा लेती है। लेकिन माया तो खुद देवी हैं जिनके एक इशारे पर पूरा सरकारी तंत्र उनकी और उनकी मूर्तियों की सेवा में दिन-रात एक कर सकता है। उनका रक्षक बन सकता है। Read more
पाक के ख़िलाफ़ जेहाद का आगाज़ भारत की ओर से हो!
,लेखक: प्रभात शुंगलू | January 22, 2010 | देश-दुनिया, ब्लॉग | 2 Comments
विशाल भारद्वाज की जल्द रिलीज होने वाली नई फिल्म इश्कियां में पाकिस्तान के मशहूर सूफी गायक मरहूम नुसरत फतेह अली खान के भतीजे राहत फतेह अली खां का गाया गाना इस समय हिंदुस्तान के फिल्म संगीत प्रेमियों का नेशनल ऐंथम हो गया है। गुलज़ार के लिखे इस गीत ‘दिल तो बच्चा है’ को गाकर राहत ने बच्चे, बूढ़े़ सब के दिलों में अपनी जगह बना ली है। संगीत प्रेमियों में राहत कोई नया नाम नहीं हैं। इससे पहले भी वो कई हिंदी फिल्मी हिट गाने गा चुके हैं। राहत पाकिस्तानी हैं और जब वो अपनी आवाज़ का जादू बिखेरते हैं तो सारा हिंदुस्तान उसे सुनता है। राहत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान की फरीदा खानम हों या नुसरत, मेहदी हसन हो या गुलाम अली, पाकिस्तान का रॉक बैंड जुनून हो या नए युवा गायक आतिफ असलम। भारत ने पाकिस्तानी टैलेंट की हमेशा कद्र की और सर आंखों पर बिठाया। अमन का कोई भी सिपाही 26\11 हमले के लिए पाकिस्तान की कारस्तानियों को माफ तो नहीं कर सकता। लेकिन इसका गुस्सा फनकारों पर निकालने का इल्ज़ाम भी अपने ऊपर नहीं लेना चाहता। Read more
अब वो अमर हो जाएंगे
,लेखक: प्रभात शुंगलू | January 21, 2010 | देश-दुनिया, ब्लॉग | Comments Off
अमर सिंह कहते हैं मैं समाजवादी बनूंगा मुलायमवादी नहीं। मुलायम के नाम से इतनी बेरूखी। वो तो आपके नेताजी हैं। आप उनके राइट हैंड, लेफ्ट हैंड, उनकी नाक, नाक के बाल, कान, उनकी लाज, उनकी साख, उनके धन, उनकी सम्पदा दिल, दिमाग, मन, मस्तिष्क, उनके सैफेई सब कुछ थे। मुलायम तो केवल नाम के मुलायम सिंह यादव रह गए थे असली समाजवादी तो आप थे। पार्टी की साइकिल तो आप ही थे। जिसके आगे अमिताभ और जया बच्चन थे, पीछे कैरियर पर संजय दत्त थे, हैंडल पर जया प्रदा भाभी थीं, अनिल अंबानी की घंटी थी। पीछे मेडगार्ड में गोदरेज की लाइट। आप खुद साइकिल की चेन, उसका पहिया और उसके पहिये में डलने वाले मोबिल ऑयल। वो अलग बात है कि साइकिल मुलायमवादी अमर सिंह की समाजवादी पार्टी का बस चुनाव निशान थी। बाकी … आप तो कभी एसयूवी से नीचे चले नहीं। नेताजी को भी उसकी खूब सवारी करवायी। Read more
ये महाभारत अनंत है… आप अपना रोल चुनिए
,लेखक: प्रभात शुंगलू | January 12, 2010 | स्पेशल रिपोर्ट | 2 Comments
चैनलों पर ब्रेकिंग न्यूज़ अब ध्यान नहीं खींचती। लेकिन शुक्रवार को तिरुनेलवेल्ली शहर से जो ब्रेकिंग न्यूज़ के साथ विजुअल्स चले उसने दिल दहला दिया। ख़ून में सना एक वर्दीदार पुलिसकर्मी सड़क पर पड़ा था। वो तड़प रहा था। बार-बार उठने की कोशिश कर रहा था। हाथ के इशारे से आने-जाने वालों से मदद की गुहार कर रहा था। मगर कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया। उसी सड़क से दो- दो मंत्रियों की कारों का काफिला गुजरा। भीड़ ने तमाशा देखा। मगर उस पुलिसकर्मी की मदद को कोई हाथ आगे नहीं बढ़ा। उस पुलिसवाले को बदमाशों ने बम मार कर लहू-लुहान कर दिया था। उसके शरीर के अंग में गहरे घाव हो चुके थे। एक बार तो हिम्मत करके उसने बैठने की कोशिश की मगर हिम्मत जवाब दे गयी। वो फिर सड़क पर गिरा मानो बिजली का तार टूट के गिरा हो। उस विजुअल को देखकर शरीर में करंट दौड़ गयी। उसकी लाचारी पर आंसू भर आए। जनता की नपुंसकता पर गुस्सा आया। करीब आधे घंटे बाद जब वो अपनी आखिरी सांसे ले रहा था तब किसी ने उसके पास जाकर उसे उठाया और गाड़ी में लेकर अस्पताल पहुंचाया। क्या पता वो उस पुलिसकर्मी को नहीं उसकी लाश को अस्पताल ले जा रहे थे? क्योंकि सब-इंस्पेक्टर आर वेत्रीवल अस्पताल ज़िंदा नहीं पहुंचे। Read more
ये सिस्टम ही सबसे बड़ा इडियट है
,लेखक: प्रभात शुंगलू | January 6, 2010 | देश-दुनिया, ब्लॉग | 5 Comments
फिल्म 3 इडियट्स में स्वानंद किरकिरे का ये गीत हमारे बचपन की याद ताजा कर देता है।
कंधों को किताबों के बोझ ने झुकाया
रिश्वत देना खुद पापा ने सिखाया
99 परसेन्ट मार्क्स लाओगे तो घड़ी
वर्ना छड़ी
बचपन में तो हमें पता भी नहीं लग पाया कि रिश्वत के कितने रूप होते हैं। जो हम नहीं पूछ पाए आज के नौजवान ज़रूर पूछते होंगे। मुंबई के तीन अलग-अलग इलाकों में रहने वाली नेहा सावंत, भजनप्रीत और सुशांत ने भी खुदकुशी करने से पहले अपने मां-पापा से जरूर पूछा होगा कि पढ़ाई में अच्छे नंबर नहीं आए तो क्या वो उन्हें अपनी बेटी या बेटा मानना छोड़ देंगे। तो क्या आप मेरा तिरस्कार कर देंगे। इनके अभिभावक अपने बच्चों को शायद तर्कसंगत जवाब नहीं दे पाए। मां-पापा उनका तिरस्कार करते इससे पहले बच्चों ने ही ज़िंदगी का तिरस्कार कर दिया। Read more
मेरा भारत महान! होप 2010
,लेखक: प्रभात शुंगलू | January 4, 2010 | देश-दुनिया | Comments Off
फिरोजशाह कोटला मैदान में श्रीलंकाई बल्लेबाज़ों पर बॉल बिल्कुल बॉडीलाइन सीरीज के अंदाज में आ रही थी। बस डगलस जार्डीन कहीं नहीं दिख रहा था। थोड़ी देर बाद राज़ खुला। कोटला की पिच ने जार्डीन के खूंखार तेवर अपनाए हुए थे। पिच इतनी ऊबड़-खाबड़ थी कि गेंद कभी दस-दस फिट उछलती, कभी सुर्री होकर बल्लेबाज और विकेटकीपर धोनी को चकमा देकर निकल जाती। यही कारण था कि 400 रन बनाने वाले श्रीलंकाई खिलाड़ी तड़ातड़ आउट होते चले गए। 85 रन पर पांच विकेट हो चुके थे जब संदेह गहराता देख मैच रेफरी ने वनडे सीरीज का पांचवा और आखिरी मैच रद्द कर दिया।
इसी पिच पर 13 महीने बाद वर्ल्ड कप खेला जाना है। बात इतनी छोटी नहीं थी। ये अंतर्राष्ट्रीय मैच था। ये मैच विश्व क्रिकेट की सबसे ताकतवर और सबसे अमीर बॉडी यानी बीसीसीआई के झंडे तले हुआ था। और होस्ट कंट्री विश्व की नम्बर वन टेस्ट टीम है। ये हिंदुस्तान में ही हो सकता है। जिस कोटला मैदान में गावस्कर ने सर डॉन ब्रैडमैन के 29 शतक की बराबरी की थी वो आज अपनी कमेंट्री में ये कहे बिना नहीं रह पाए कि पिच का हाल ऐसा था मानो गंजी खोपड़ी पर किसी ने कृत्रिम रूप से जगह जगह बाल उगवा लिए हों। जिस पिच पर कुंबले ने परफेक्ट टेन लेकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था वहां मैच इसलिए नहीं खेला जा सका क्योंकि पिच ठीक से बनायी ही नहीं गयी थी। Read more
ये दिल्ली सब की है
,लेखक: प्रभात शुंगलू | January 2, 2010 | हक़ की आवाज़ | Comments Off
शीला दीक्षित ने दिल्ली में काम अच्छा किया होगा कि जनता ने सर आंखो पर बिठाया। और बतौर मुख्यमंत्री उनकी हैट्रिक हुई। मेट्रो रेल, फ्लाईओवर, सबवे, फुटब्रिज, लो फ्लोर बसें सब का बड़ा श्रेय शीला दीक्षित सरकार को जाता है। कॉमनवेल्थ गेम्स करवाना फिलहाल उनकी बड़ी जिम्मदारी होगी। अपनी तीसरी पारी में शीला दिल्ली – एनसीआर के विकास की ओर ध्यान देंगी ऐसी अपेक्षा उनसे जरूर की जा रही थी। लेकिन प्राइवेट मोटर गाड़ियों पर एंट्री टैक्स लगाने का प्रस्ताव देकर एनसीआर के रोडमैप में दिशा-भ्रम पैदा कर दिया।
प्रशासनिक तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में काम करने का शीला का सबसे लंबा एक्सपीरियेंस है। वो इस क्षेत्र को एनसीआर सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बेहतर समझती हैं। अब तो दिल्ली का विकास एनसीआर के विकास से जुड़ गया है। अगर एनसीआर में क्राइम रेट बढ़ेगा तो ये तय है कि उसका असर दिल्ली पर भी पड़ता है। नोएडा या फरीदाबाद में बसों या ऑटोवालों की हड़ताल होती है तो दिल्ली में सरकारी और गैर-सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की हाजिरी देर से लगती है। दिल्ली के 37 ऐसे प्वाइंट्स हैं जहां से प्राइवेट गाड़ियां दिल्ली में घुसती हैं या दिल्ली से बाहर जाती हैं। कहां कहां टोल नाके बिठवायेंगी। और क्या गारंटी की दूसरे राज्य यानी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान भी दिल्ली की देखा देखी मोटर वाहन चालकों पर नया टैक्स न थोप दें। Read more




