लेखक का पन्ना
जनतंत्र डेस्क द्वारा लिखित आलेख:
एक्सप्रेस समूह और द हिंदू के संपादक एन राम में दो-दो हाथ
,लेखक: जनतंत्र डेस्क | March 27, 2010 | पहरेदार | Comments Off
एक्सप्रेस समूह ने द हिंदू के संपादक एन राम के आरोपों को खारिज कर दिया है। समूह की वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि द हिंदू के पारिवारिक झगड़े के बारे में फाइनेंशिअल एक्सप्रेस और द इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट पूरी तरह सही है। उस रिपोर्ट में दर्ज सभी तथ्य पुख्ता हैं। एक्सप्रेस ने पूरी तहकीकात के बाद ही अर्चना शुक्ला की वो रिपोर्ट प्रकाशित की। इसलिए समूह रिपोर्ट और रिपोर्टर दोनों के साथ हैं और एन राम की कानूनी कार्रवाई की धमकी से नहीं डरता। Read more
चोरों ने की थी सत्येंद्र दुबे की हत्या, तीन दोषी करार
,लेखक: जनतंत्र डेस्क | March 22, 2010 | हक़ की आवाज़ | Comments Off

पटना की विशेष अदालत ने सत्येंद्र दुबे हत्याकांड में तीन आरोपियों को दोषी ठहराया है। इन तीनों के नाम हैं मंटू कुमार, उदय कुमार और पिंकू रविदास। अदालत के मुताबिक इन तीनों ने लूट के इरादे से सत्येंद्र दुबे को घेरा और प्रतिरोध करने पर हत्या कर दी। इन तीनों को 27 मार्च को सज़ा सुनाई जाएगी।
सत्येंद्र दुबे ने देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी से इंजीनियरिंग की और उसके बाद नेशनल हाइवे अथॉरिटी से जुड़े। जहां से उनकी पोस्टिंग स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना में की गई। तब केंद्र में बीजेपी की सरकार थी और यह तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का ड्रीम प्रोजेक्ट था। उसी में धांधली को बेनकाब करने के लिए सत्येंद्र दुबे ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी। उसी के तुरंत बाद 27 नवंबर 2003 को गया में सत्येंद्र दुबे की गोली मार कर हत्या कर दी गई। उस वक़्त वो बनारस में एक शादी से शामिल होने के बाद लौट रहे थे। Read more
प्रेस क्लब में पुष्पेंद्र-परवेज पर तानाशाही का आरोप
,लेखक: जनतंत्र डेस्क | February 27, 2010 | पहरेदार | Comments Off
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और अध्यक्ष परवेज अहमद फिर विवादों के घेरे में हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने क्लब की मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य नरेंद्र भल्ला को जबरन उनके अधिकारों से वंचित कर दिया और कमेटी की बैठकों में आने से रोका। यही नहीं उन दोनों पर कई गैरकानूनी गतिविधियों का आरोप भी लगा है।
जनतंत्र के पास मौजूद दस्तावेज के मुताबिक प्रेस क्लब चुनाव में नरेंद्र भल्ला और ललित मोहन जोशी को 216-216 वोट मिले। मुकाबला टाई होने पर चुनाव अधिकारी ने दोनों को जीता हुआ घोषित किया। उसके बाद पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और उनकी टीम ने ललित मोहन जोशी को तमाम बैठकों में आने का न्योता दिया। लेकिन नरेंद्र भल्ला को इसकी जानकारी नहीं दी गई। इतना ही नहीं, सदस्यों को मैनेजमेंट कमेटी के बारे में भेजी गई चिट्ठी से भी नरेंद्र भल्ला का नाम काट दिया गया। Read more
सचिन के रंग में रंगे सभी अख़बार
,लेखक: जनतंत्र डेस्क | February 25, 2010 | पहरेदार | 2 Comments
कुछ मुद्दों पर बहस नहीं की जा सकती। खासकर उन मुद्दों पर जिनसे करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हों। सचिन तेंदुलकर का दोहरा शतक भी उन्हीं में से एक है। कई ज्ञानी कह चुके हैं कि क्रिकेट भारत में एक धर्म की तरह है और अगर क्रिकेट धर्म है तो सचिन तेंदुलकर उस क्रिकेट धर्म को मानने वालों के लिए एक देवता जैसे हैं। यही वजह है कि जब सचिन तेंदुलकर ने वनडे इतिहास का जब पहला दोहरा शतक जमाया तो सभी अख़बार उनके रंग में रंग गए। उनका यह करिश्मा रेल बजट पर भारी पड़ गया।
हालांकि कुछ बुद्धिजीवियों को यह बात पसंद नहीं आएगी। वो कल रात न्यूज़ चैनलों की आलोचना कर रहे होंगे और आज अख़बारों की। एक लिहाज से देखे तो उनकी आलोचना अपनी जगह सही है। रेल में हर रोज करोड़ों लोग सफर करते हैं और उनके हितों से जुड़े मुद्दे को पीछे नहीं ढकेला जा सकता। लेकिन यह भी सही है कि सचिन ने जो करिश्मा किया है वो बार-बार नहीं होता। बीते चालीस साल के वनडे इतिहास में पहला दोहरा शतक बना है और वो भी सचिन के हाथों। इसलिए आज अगर रेल बजट की जगह सचिन पहली ख़बर हैं तो कोई हर्ज नहीं। आप भी एक नज़र डालिए कि किन अख़बारों ने पहले पन्ने पर इन दोनों ख़बरों को किस तरह पेश किया है।

—————————————

—————————————

—————————————

सचिन के नाम पर न्यूज़ चैनलों के इस जश्न में शामिल हों
,लेखक: जनतंत्र डेस्क | February 24, 2010 | पहरेदार | Comments Off
आज सुबह संसद में ममता बनर्जी की रेल खूब तेज रफ़्तार से दौड़ी। सुबह से ही न्यूज़ चैनलों पर ममता बनर्जी छाई हुईं थी। लेकिन शाम होते-होते सबकुछ बदल गया। ग्वालियर से सचिन एक्सप्रेस इतनी तेजी से दिल्ली की ओर दौड़ी कि ममता एक्सप्रेस पटरी से उतर गई। न्यूज़ चैनलों पर सिवाय सचिन तेंदुलकर के किसी और की चर्चा नहीं थी। शायद देर रात भी बाकी ख़बरों को बहुत थोड़ा स्पेस मिले। सचिन तेंदुलकर के गुणगान में न्यूज़ चैनल कुछ ऐसा डूबे कि रेल बजट की झलकियां गायब हो गईं।
आज तक हो या फिर ज़ी न्यूज़ – सभी चैनलों पर सचिन गाथा शुरू गई। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बधाई संदेश चलाए जाने लगे। सभी शहरों में ओबी अप करा दी गई। लोगों की प्रतिक्रियाएं दिखाई जाने लगीं। भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड… जहां का क्रिकेट खिलाड़ी मिला उसी से बातचीत हो गई। शोएब अख़्तर से लेकर शेन वॉर्न तक सभी सचिन के सामने अपनी गेंदबाजी के डरावने अनुभव को बयां करने लगे। लता मंगेशकर और अभिजीत जो भी गायक मिला उसी से सचिन पर चर्चा हो गई। कुछ ने अपने गाये गीत उन्हें समर्पित भी कर दिए। Read more
यह रिकॉर्ड भी क्रिकेट के भगवान के नाम
,लेखक: जनतंत्र डेस्क | February 24, 2010 | देश-दुनिया | Comments Off
क्रिकेट प्रेमियों को आज की शाम हमेशा याद रहेगी। जिन लोगों ने भी स्टेडियम में या फिर टेलीविजन पर महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को खेलते देखा है वो इन पलों को शायद ही कभी भुला सकें। जिन्होंने रेडियो पर तालियों की गड़गड़ाहट सुनी होगी, उनके कानों में वो गूंज शायद ही धीमी पड़े। मास्टर ब्लास्टर ने वो करिश्मा कर दिया है जो दुनिया का कोई बल्लेबाज नहीं कर सका। विवियन रिचर्ड्स, सुनिल गावस्कर, ब्रायन लारा, रिकी पॉन्टिंग… कोई भी नहीं। भविष्य में अगर कोई उनके इस रिकॉर्ड को तोड़ेगा तो शायद उसे भी इसलिए याद रखा जाए कि उसने सचिन का रिकॉर्ड तोड़ा है। Read more
रेल बजट से पहले ज़ी न्यूज़ की “सबसे बड़ी” शर्म
,लेखक: जनतंत्र डेस्क | February 24, 2010 | स्पेशल रिपोर्ट | Comments Off
“सबसे बड़ी शर्म” और “पर्दाफाश” जैसे जुमलों के साथ ज़ी न्यूज़ ने रेल बजट से ठीक पहले एक स्टिंग ऑपरेशन दिखाया। इसमें बताया गया कि चंद रुपये में “ट्रेन बिक जाती” है और महज “तीन हज़ार रुपये” में “प्लैटफॉर्म तक का सौदा” हो जाता है। यह भी खुलासा किया गया कि ट्रेन में सफ़र करते वक़्त आप जो खाना खाते हैं वो गंदे पानी से बना होता है और यह यात्रियों की सेहत के साथ बहुत बड़ा धोखा है।
रेल बजट से ठीक पहले इस स्टिंग ऑपरेशन के ज़रिये ज़ी न्यूज़ ने सबसे आगे निकलने की कोशिश की। आज सुबह भी टुकड़ों-टुकड़ों में उस स्टिंग ऑपरेशन को दिखाया गया। दर्शकों को रेलवे के ख़ौफ़नाक सच से रू-ब-रू कराने की कोशिश की गई। और यह ताल भी ठोंकी गई कि ज़ी न्यूज़ के इस ऐतिहासिक खुलासे के बाद रेलवे के बाबुओं पर ममता का डंडा चल सकता है। हो सकता है कि टीआरपी दौड़ में शायद उसे कुछ फायदा भी मिले। Read more
मृणाल पांडे का इस्तीफ़ा
,लेखक: जनतंत्र डेस्क | February 24, 2010 | स्पेशल रिपोर्ट | 1 Comment
ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि वरिष्ठ पत्रकार मृणाल पांडे ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की एक्जीक्यूटिव कौंसिल से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक मृणाल पांडे ने इस्तीफ़े का आधिकारिक आधार अपनी व्यस्तताओं को बनाया है। वो हाल ही में प्रसार भारती की चेयरमैन चुनी गईं हैं। लेकिन सूत्र यह भी बता रहे हैं कि मृणाल पांडे अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय को लेकर चल रहे विवादों की वजह से नाखुश थीं।
हाल के दिनों में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय को लेकर एक के बाद एक कई विवाद उभरे हैं। वहां के कुलपति विभूति नारायण राय पर दलित उत्पीड़न और जातिवादी ज़हर फैलाने का आरोप लगा है। साथ ही प्रोफेसर अनिल चमड़िया को अनैतिक तरीके से निकालने का भी आरोप है। कुछ ख़बरें तो और भी चौंकाने वाली हैं। 327 छात्रों वाले इस विश्वविद्यालय में सम्मेलनों के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया गया है। Read more
दबाव में झुके वीएन राय, अंकित के ख़िलाफ़ जांच का आदेश
,लेखक: जनतंत्र डेस्क | February 21, 2010 | स्पेशल रिपोर्ट | 3 Comments
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल राय अंकित के ख़िलाफ़ जांच का आदेश दे दिया गया है। अनिल राय अंकित पर आरोप है कि उन्होंने दूसरों की किताबों से कंटेंट चुरा कर अपनी किताबें प्रकाशित करवाई हैं। जांच का काम प्रोफेसर सुरेंद्र सिंह कुशवाहा को सौंपा गया है। सुरेंद्र सिंह कुशवाहा रांची युनिवर्सिटी और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति रह चुके हैं। Read more
महात्मा गांधी के नाम पर यह हिंदी की अंतरराष्ट्रीय ऐशगाह है
,लेखक: जनतंत्र डेस्क | February 21, 2010 | स्पेशल रिपोर्ट | 1 Comment
कुछ समय पहले की बात है। संसद में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार के पास एक भी केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए पैसे नहीं हैं। उनके इस बयान में यह बात छिपी थी कि शिक्षा पर देश का बजट बहुत ही कम है और उतने में कोई क्रांतिकारी बदलावों की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।
अब हम आपके सामने इसी तस्वीर का एक दूसरा पहलू पेश करने जा रहे हैं। महात्मा गांधी हिंदी अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुछ आंकड़े प्रस्तुत करने जा रहे हैं जो आपको चौंका सकते हैं। यहां हर एक छात्र पर करीब-करीब एक कर्मचारी तैनात है। आप इस यूनिवर्सिटी के आंकड़ों पर गौर कीजिए और सोचिए कि जिस देश के पास एक भी केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने के पैसे नहीं हों, उस देश में शिक्षा के नाम पर इस फिजूलखर्ची को क्या कहना चाहिए? Read more




