पुलिस ने कहा नक्सली, मीडिया ने कबूल कर लिया
लेखक: आवेश तिवारी | February 8, 2010 | हक़ की आवाज़ | 2 Comments
उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद की पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता सीमा आजाद और उनके पति विश्वविजय को अचानक इलाहाबाद जंक्शन से गिरफ्तार कर लिया गया। वे दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेले से लौट रहे थे। ये घटना बताती है कि उत्तर प्रदेश में मानवाधिकार आहत और लहूलुहान है। जिस एक वजह से सीमा आज़ाद और उनके पति की गिरफ्तारी की गयी, उस एक वजह का यहां हम खुलासा करेंगे।
जिस वक़्त सीमा आजाद को गिरफ्तार किया गया, ठीक उसी वक़्त पूर्वी उत्तर प्रदेश के अति नक्सल सोनभद्र जनपद में सोन नदी के किनारे बालू के अवैध खनन को लेकर सरकार के विधायक विनीत सिंह और उदयभान सिंह उर्फ़ डॉक्टर के समर्थकों के बीच गोलीबारी हो रही थी। इस गोलीबारी से डर कर तमाम आदिवासी अपने घरों से भाग खड़े हुए थे। घटनास्थल पर पुलिस पहुंची। गोली के खोखे भी बरामद किये, लेकिन किसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी। ये घटना कोई नयी नहीं है। समूचे प्रदेश में खनन मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा और उनके कारिंदों के द्वारा अवैध खनन का जाल बिछा कर अरबों रुपये की काली कमाई की जा रही है और इसको अंजाम तक पहुंचाने के लिए प्रदेश के तमाम माफियाओं, हिस्ट्रीशीटरों को बेनामी ठेके दिये जा रहे हैं। निस्संदेह ऐसी स्थिति में आम मजदूर, आदिवासी और किसान का शोषण होना लाजिमी है।
सीमा आजाद इन्हीं मजदूरों के हक़ की लड़ाई लड़ रही थी। अकेले लड़ रही थी। इलाहाबाद-कौशांबी के कछारी क्षेत्र में अवैध वसूली व बालू खनन के खिलाफ संघर्षरत मजदूरों के दमन पर उन्होंने बार-बार लिखा। जबकि किसी भी बड़े अखबार ने हिम्मत नहीं की। नंदा का पुरा गांव में पिछले ही माह जब पुलिस व पीएसी के जवान ग्रामीणों पर बर्बर लाठीचार्ज कर रहे थे, सीमा अकेले उनसे इन बेकसूरों को बख्श देने के लिए हाथ जोड़े खड़ी थी। उस वक़्त भी किसी अखबार ने इस बर्बरता के बारे में एक लाइन खबर नहीं छापी। सीमा की यही जंगजू प्रवृत्ति सरकार को नहीं भायी। खनन माफियाओं को खुश करने और अपनी झोली भरने के लिए सीमा को रास्ते से हटाना जरूरी था। इलाहाबाद के डीआईजी ने ऊपर रिपोर्ट दी कि सीमा माओवादियों का जत्था तैयार कर रही है और अब नतीजा हमारे सामने है।
ऐसा नहीं है कि सरकार समर्थित अवैध खनन के गोरखधंधे को अमली जामा पहनाने के लिए सीमा से पहले फर्जी गिरफ्तारी नहीं की गयी है। कैमूर क्षेत्र मजदूर महिला किसान संघर्ष समिति की रोमा और शांता पर भी इसी तरह से पूर्व में रासुका लगा दिया गया था क्योंकि वो दोनों भी आदिवासियों की जमीन पर माफियाओं के कब्जे और पुलिस एवं वन विभाग के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठा रही थी। हालांकि काफी हो-हल्ला मचने के बाद सरकार ने सारे मुक़दमे उठा लिये। इन गिरफ्तारियों के बाद पुलिस ने सोनभद्र जनपद से ही गोडवाना संघर्ष समिति की शांति किन्नर को भी आदिवासियों को भड़काने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। शांति एक वर्ष बीतने के बाद जैसे तैसे जमानत पर रिहा हुई।

आवेश तिवारी
((आवेश तिवारी बीते सात वर्षों से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद की पर्यावरणीय परिस्थितियों का अध्ययन और उन पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आवेश से awesh29@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।))
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आप भी गिरफ्तार कर लिए जाएंगे… सच बोलने के आरोप में… हिज़रों की जमात हैं हम… न सुधरे थे न सुधरेंगे… बापू नहीं सुधार पाएं तो अब कोई क्या सुधार पाएगा…
आपसे सहमत हूं आवेश