सारे नोटिस दलित शिक्षकों को, जवाब दो विभूति
लेखक: दिलीप मंडल | February 6, 2010 | स्पेशल रिपोर्ट | 3 Comments
अब तक आपने पढ़ा कि किस तरह विभूति नारायण राय ने जब प्रोफेसर डॉक्टर एल करुण्यकारा को डॉ. अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस कार्यक्रम में शामिल होने और नारे लगाने के आरोप में सामंती अंदाज में धमकी दी तो उन्होंने इसका करारा जवाब दिया। उन्होंने विभूति राय को सिखाया कि 6 दिसंबर का क्या मतलब है और साथ ही ये भी बताया कि सेकुलर होकर भी जातिवादी, सामंती और अलोकतात्रिक हुआ जा सकता है बल्कि सेकुलर होकर ये सब होना ज्यादा आसान होता है और ऐसे लोगों के छल को तोड़ना मुश्किल। उन्होंने ग्राम्शी को उद्धृत करते हुए बताया कि दलितों को आंदोलन के लिए क्यों बाध्य होना पड़ता है। अब आगे पढ़िए, जब वो बताते हैं कि जिन नारों को विभूति जातिवादी मानते हैं, वो नारे दरअसल हैं क्या? (अनुवाद: दिलीप मंडल)…
6 दिसंबर 2009 को बाबा साहेब परिनिर्वाण दिवस पर अंबेडकर स्टूडेंट फोरम की ओर से आयोजित मोमबत्ती जुलूस में मेरे शामिल होने के इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। आयोजकों ने बताया कि उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए आप समेत विश्वविद्यालय के ज्यादातर कर्मचारियों को बुलाया था। इसमें शामिल होना या न होना किसी व्यक्ति पर निर्भर करता है। मैंने इस जुलूस में शामिल होने का फैसला किया क्योंकि ये जुलूस जाति विरोधी था।
दलित छात्रों द्वारा आयोजित महापरिनिर्वाण दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने का मुझे गर्व और अभिमान है। मैं ये देखकर काफी खुश हुआ कि अलग अलग जाति के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने जुलूस में शिरकत की और जातिवाद के खिलाफ नारे लगाए। किसी के भी द्वारा आयोजित इस तरह के अंबेडकरवादी कार्यक्रमों में शामिल होने से मुझे खुशी होती है। किसी भी स्वाभिमानी दलित के लिए ये एक मौका होता है जब वो इतिहास पर अपनी दावेदारी जताता है और बिना किसी भय के जातिवाद से संघर्ष के अपने इरादे का इजहार करता है।
प्रतीक और नारे संस्कृति का हिस्सा हैं। जाति विरोध की संस्कृति में, जाहिर है, जातिवाद के खिलाफ नारे लगाए जाते हैं। इस जुलूस में अन्य सहभागियों के साथ मेरे द्वारा नारे लगाए जाने को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
ज्यादातर नारे हिंदी में लगाए गए और वो इस तरह है: 6 दिसंबर किसके नाम-बाबा साहब, बाबा साहब, ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद, मनुवाद मुर्दाबाद, जातिवाद मुर्दाबाद, मनुवाद का क्या जवाब, अंबेडकरवाद-अंबेडकरवाद, ब्राह्मणवादी संस्कृति को एक टक्कर और दो, बोल रे साथी जय भीम, हम भी बोले जय भीम, तुम भी बोलो जय भीम। ये नारे जातिवादी नहीं हैं, जैसा कि आपने नोटिस में लिखा है, बल्कि ये जातिवाद विरोधी नारे हैं। इन नारों से कैंपस की शांति और सद्भावना को कोई खतरा नहीं है, जैसा कि आपने नोटिस में लिखा है, बल्कि इन नारों से न्याय और सद्भाव के साथ शांति का माहौल मजबूत होता है। ये नारे जातिवादी संस्कृति के खिलाफ हैं।
यहां ये बात गौर करना महत्वपूर्ण है कि जब से आप वीसी बने हैं तब से आपने जहां तक मेरी जानकारी है चार नोटिस जारी किए हैं और चारों नोटिस दलित शिक्षकों को ( दो मुझे, एक श्री कठेरिया और एक सुश्री शीला बोदरा को) जारी किए गए हैं। आपने अब तक दो एकेडेमिक सेशन के लिए छात्रों का एडमिशन किया है और दोनों ही बार दलित और आदिवासी छात्र धरने पर बैठे हैं। आपने एसिस्टेंट और टाइपिस्ट पदों पर कई अस्थायी नियुक्तियां की हैं, लेकिन उनमें से एक भी दलित या आदिवासी नहीं है। मैंने आपके सामने कई बार ये मामला उठाया है।
बाबा साहेब आंबेडकर ने कहा था- “हर देश में बुद्धिजीवी वर्ग अगर सत्ताधारी वर्ग न हो तो भी सबसे प्रभावशाली वर्ग होता है। बुद्धिजीवी वर्ग दूरदर्शी होता है, यह वर्ग सलाह दे सकता है और नेतृत्व कर सकता है। किसी भी देश में आम जनता बौद्धिक काम और विचारों का निर्वहण नहीं करती, आम जनता आम तौर पर बुद्धिजीवी वर्ग के नक्शेकदम पर चलती है। ये कहने में अतिश्योक्ति नहीं है कि किसी देश की नियति उसके बौद्धिक वर्ग से तय होती है। अगर बुद्धिजीवी वर्ग निष्पक्ष और ईमानदार हो तो वो संकट के समय में देश का बेहतर नेतृत्व कर सकता है। ये सच है कि बौद्धिकता अपने आप में कोई गुण नहीं है। ये सिर्फ एक साधन है और साधन का इस्तेमाल साध्य और साधन को इस्तेमाल करने वाले बुद्धिजीवी पर निर्भर करता है। एक बुद्धिजीवी अच्छा आदमी हो सकता है, लेकिन साथ ही वो फरेबी और समाज विरोधी भी हो सकता है। उसी तरह एक बुद्धिजीवी वर्ग अच्छी नीयत वाला, परोपकारी और लोगों को रास्ता दिखाने वालों का समूह हो सकता है और वो गुंडों का गिरोह या अपने पिछलग्गुओं के हितों को पूरा करने वाला समूह भी हो सकता है।”
आज मैं जो कुछ भी हूं, वह बाबा साहब अंबेडकर की वजह से ही हूं। एक शिक्षित दलित होने की वजह से मैं न्याय की हर लड़ाई में साथ हूं। एक अंबेडकरवादी होने के नाते मेरा मानना है कि जातिवाद विरोधी संघर्ष में शामिल होना और अंबेडकर से संबंधित किसी भी जुलूस में शामिल होना मेरा अधिकार है।
मेरे महापरिनिर्वाण दिवस कार्यक्रम को लेकर आपने जिस तरह से नोटिस जारी किया है, वह अपमानजनक है। नोटिस में आपने सिर्फ सुनी सुनाई बातों के आधार पर मेरे आचरण पर सवाल उठाए हैं। एकेडेमिक्स से जुड़ा हुआ व्यक्ति होने के नाते मुझे अधिकार है कि मैं राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने वाली किसी भी विचारधारा को सार्वजनिक रूप से अमल में लाऊं। अंबेडकरवाद और अंबेडकरवादी संस्कृति जातपात विरोधी है और सामाजिक न्याय के पक्ष में है। ये दूसरी बार है जब आपने तथ्यों का पता लगाए बगैर मुझे नोटिस जारी किया है। ये इस बात का प्रमाण है कि आप मुझे नुकसान पहुंचाने पर तुले हुए हैं।
मुझे लगता है कि बाबा साहेब अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस पर कार्यक्रम में शामिल होने और नारे लगाने के लिए आपने मुझे जो नोटिस जारी किया है वो आपका मेरे प्रति जातिवादी पूर्वग्रह है और इसका मकसद विश्वविद्यालय के एकमात्र दलित प्रोफेसर को अपमानित करना और मानसिक उत्पीड़न करना है।
एल करुण्यकारा
17-12-09
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Mandal Ji
congratulations for such a wonderful piece of writing..
अदभुत जवाबी- पत्र है। प्रेरक और उदात्त। प्रो करुण्यकारा किस विषय पर लिखते हैं ? इनका परिचय देते तो अच्छा होता। ऐसे साहसी व्यक्ति अकैडमिक दुनिया में कम ही बचे हैं।
rashtr12 said:
इसे आप प्रश्नोत्तर शैली में पढ़ें
1.सबसे पहले मैं आपको भारतीय इतिहास में 6 दिसंबर की तारीख का महत्व बता दूं।
उत्तर . जैसे इतिहास यही पढ़े है और कोई नहीं.
2. इस तारीख को भारतीय संविधान के रचयिता बाबा साहेब अंबेडकर का निधन हुआ था और इतिहास इस दिन को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाता है।
उत्तर . किसी के जन्मदिन पर किसी को क्या आपत्ति.
3. सांप्रदायिक ताकतों ने बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए जानबूझ कर इस दिन को चुना।
उत्तर . दरअसल आप तब इतने बड़े बुद्धिजीवी नहीं बने थे अन्यथा लोग आपसे नव दलित ब्राहमण से तिथि तय करते.
4. जाति की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए जब कोई सेकुलर व्यक्ति कुछ काम करता है, तो मैं उसे सेकुलर जातिवाद कहता हूं। और ऐसा करने वाले को मैं सेकुलर जातिवादी कहता हूं।
उत्तर . आप से बड़ा जातिवादी कौन है . जो कि वि वि में सिर्फ दलित अध्यापको से बात चीत करता है सामाजिक न्याय का दुश्मन आपसे बड़ा कौन है जो दलित -२ तो कहता है पर आजतक किसी विद्यार्थी को शोध नहीं करा रहा है. नहीं तो इसके पीछे क्या कारन हो सकते है.
5. वह दिखावे के लिए उदार और प्रगतिशील हो सकता है,
उत्तर . यह तो आप है ही.
5. मैंने इस जुलूस में शामिल होने का फैसला किया, क्योंकि ये जुलूस जाति विरोधी था।
उत्तर . अर्थात जो आप करेंगे जातिविरोधी और दूसरे करे तो जातीवादी हा हा हा
6. मैं ये देखकर काफी खुश हुआ कि अलग अलग जाति के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने जुलूस में शिरकत की और जातिवाद के खिलाफ नारे लगाये।
उत्तर . जब कभी शिक्षक संघ की बैठक हुई तब आप कभी नहीं आयी . क्यों क्योकि आप जातीय ग्रंथि से पीडीत है . जबकि वि वि के अन्य सभी लोग शिरकत करते है,..
ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद। मनुवाद मुर्दाबाद। जातिवाद मुर्दाबाद।
ब्राह्मणवादी संस्कृति को एक टक्कर और दो।
बोल रे साथी जय भीम। हम भी बोले जय भीम। तुम भी बोलो जय भीम।
7.ये नारे जातिवादी नहीं हैं. ये कैसे कह सकते है .
उत्तर . एक जाती के खिलाफ खुला नारा है. किसी मनु या किसी ब्राह्मण का क्या दोष . कोई जय भीम कहे तो जातिविरोधी और एनी पर जाती का तोहमत .
8. आज मैं जो कुछ भी हूं, वह बाबा साहब अंबेडकर की वजह से ही हूं।
उत्तर . क्यों पुराने धर्म को क्यों भूल गए. अंबेडकर ने यह नहीं कहा था कि मुफ्त का पाओ माल उडाओ नहीं तो दलित. कितने दलितों की सहायता कि है आपने .
9. एकेडेमिक्स से जुड़ा हुआ व्यक्ति होने के नाते मुझे अधिकार है कि मैं राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने वाली किसी भी विचारधारा को सार्वजनिक रूप से अमल में लाऊं।
उत्तर .और कभी किसी भी शिक्षक बैठक में न जाऊ, पर दलित नाम का लाभ उठाने के लिए हर जगह जाऊ. किसी दलित को शोध न कराऊ, पर गलत मेडिकल मेडिकल बिल भुनाऊ. और बिना छुट के हैदराबाद जरूर जाऊ