सब प्रो. कृष्ण कुमार वगैरह ने किया, वीएन राय पाक साफ!

लेखक: दिलीप मंडल  |  January 30, 2010  |  स्पेशल रिपोर्ट   |   2 Comments

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर विभूति नारायण राय की मानें तो प्रोफेसर अनिल चमड़िया की नियुक्ति निरस्त करने का फैसला प्रोफेसर कृष्ण कुमार, मृणाल पांडे, गंगा प्रसाद विमल और एक्जिक्यूटिव कौंसिल के बाकी सदस्यों का था। उनका इस फैसले से कोई लेना देना नहीं है और वो तो दरअसल अनिल चमड़िया को लेकर आए थे और उनके हाथ में होता तो वो अनिल चमड़िया को कतई न हटाते।

वीएन राय के इस भोलेपन पर कौन न फिदा हो जाए। लेकिन वी एन राय, क्या आप ये बताएंगे कि

1. दिल्ली में 13 जनवरी को हुई यूनिवर्सिटी की एक्जिक्यूटिव कौंसिल की बैठक में कौंसिल के सदस्यों से आपने अनिल चमड़िया की नियुक्ति के संदर्भ में क्या कहा था?

2. क्या आपने ये कहा था कि मैंने अनिल चमड़िया की नियुक्ति की थी और अब उसे कन्फर्म किया जाना है?

3. या फिर आपने ये कहा था कि अनिल चमड़िया की नियुक्ति करते मैंने गलती कर दी और अब उसे सुधार करना है। या फिर आपने कुछ और कहा था? ये काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि तभी ये पता चल सकता है कि कौंसिल के सदस्यों ने ये फैसला किस पृष्ठभूमि में किया।

4. क्या आपको नहीं लगता कि किसी की नियुक्ति निरस्त करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का कम से कम एक मौका दिया जाना चाहिए?

5. क्या प्रोफेसर अनिल चमड़िया को ये मौका दिया गया, और अगर नहीं तो इसकी वजह क्या थी?

6. आपका ये कहना सही है कि एक्जिक्यूटिव कौंसिल सबसे ताकतवर संस्था है, लेकिन उसके सामने फैसला करने के लिए तथ्य कौन रखता है?

7. आप कहते हैं कि ईसी ने हटा दिया मैं क्या करूं, लेकिन आपने क्या ईसी को ये जानकारी दी थी कि अनिल चमड़िया की नियुक्ति का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है?

8. क्या आपने एक्जिक्यूटिव कौंसिल की बैठक में बताया कि किन नियमों के तहत आपने अनिल चमड़िया की नियुक्ति की थी?

9. आप कहते हैं कि “अगर ईसी ने अनिल चमड़िया की नियुक्ति को मानकों के हिसाब से नहीं पाया तो इसमें मेरा दोष क्या है.” ईसी ने अगर प्रोफेसर नियुक्त करने के आपके तरीके पर इतना बड़ा सवाल खड़ा कर दिया तो आपको इस्तीफा नहीं देना चाहिए। प्रोफेसर की नियुक्ति कोई तमाशा नहीं है कि आपने मानकों को ध्यान में रखे बगैर नियुक्ति कर दी। छात्रों के भविष्य और एकेडमिक शुचिता के साथ आप इतना बड़ा खिलवाड़ कैसे कर सकते हैं? और ये सब करके आप अपने पद पर कैसे बने रह सकते हैं?

10. जब ईसी अनिल चमडिया की नियुक्ति के आपके फैसले को मानकों के हिसाब से खारिज कर रही थी, तो आपका डिफेंस क्या था? या आपने अपना दोष कबूल कर लिया? ऐसी हालत में आप पर गलत नियुक्ति करने के लिए मुकदमा क्यों नहीं चलाया जाना चाहिए?

दरअसल इस मामले में सारी जिम्मेदारी प्रोफेसर कृष्ण कुमार, मृणाल पांडे, गंगा प्रसाद विमल और कौंसिल के दूसरे सदस्यों पर डालकर वीएन राय अपने लिए बचाव का पक्ष तैयार कर रहे हैं। ईसी के सदस्य खामोश रहकर इस अन्याय का समर्थन कर रहे हैं। उन्हें मुखर होकर सामने आना चाहिए।

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Comments

2 Responses to “सब प्रो. कृष्ण कुमार वगैरह ने किया, वीएन राय पाक साफ!”
  1. bntripathi says:

    University ko saaf Suthara rakhne ka adhikar sabhi VC ko hona hi chahiye. V.N.Rai ne bahut thik kiya.

  2. ratnabhanu says:

    Ruk sa gaya hai dimag
    Bina baterye wali ghadi ki tarah.
    Koi chahal pahal nahin, koi sugbugahat nahin.
    Ek hi jagah par sthir
    Chalna chah raha hun
    Par badhayen bahut hain
    Gidhhon ka ek bada hujum samne khada hai
    Jo batna chah raha hai botiyan!
    Zubaan pe tala laga diya gaya hai
    Haath aur pair main badiyan.
    Chah kar bhi hil nahin pa raha hun
    Soch kar bhi chal nahin pa raha hun.
    Mudde to itne hain ki ek dharamgranth taiyaar ho jaye
    Par pawandiyan itni hai ki chand lainoon ka ka lekhan bhi kathin hai.
    Udne ki chatpatahat baichain karti hai
    Par ek pankh kaat liye gaye hai.
    Chakraweuh se nikalna hai
    Par kaise? Kuch malum nahin.
    Jang zari hai
    Kabhi apne aap se, kabhi samaaj se.
    Anekanek prayog aur bina Bimari ke
    Awasaad ki goliyan kha kha ke thak sa gaya hun.
    Par umeed kayam hai
    Viswaas adig hai
    Hope aane wala kal hamara hoga!