क्या अनिल चमड़िया का टर्मिनेशन अवैध है?
लेखक: दिलीप मंडल | January 29, 2010 | स्पेशल रिपोर्ट | 1 Comment

जवाब दो!
सवाल 1 : क्या दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 13 जनवरी को हुई एक्जिक्यूटिव कौंसिल की बैठक के मीनिट्स (मीटिंग में हुई बातचीत का ब्यौरा) लिए गए थे?
सवाल 2: क्या मीटिंग का ये ब्यौरा एक्जिक्यूटिव कौंसिल के सदस्यों को मंजूरी के लिए भेजा गया? नियमों के तहत ये जरूरी है ताकि बैठक में शामिल सदस्यों को इस बात की विधिवत जानकारी मिल सके कि बैठक में क्या फैसले किए गए?
सवाल 3: क्या एक्जिक्यूटिव कौंसिल की बैठक में शामिल सभी सदस्यों ने मीटिंग का ब्यौरा अपनी मंजूरी या एतराज के साथ वापस कर दिया है?
(नोट- लगभग दो दशक की पत्रकारीय साख को दांव पर रखकर मैं ये कह रहा हूं कि मीटिंग में शामिल सभी सदस्यों ने मिनिट्स पर अपनी सहमति की मुहर नहीं लगाई है। कम से कम 28 जनवरी की रात 9.30 बजे तक की स्थिति तो यही है।)
सवाल 4: एक्जिक्यूटिव कौंसिल विश्वविद्यालय से जुड़े फैसले करने वाली, सबसे बड़ी संस्था है। ऐसे में इसकी बैठक में शामिल सदस्यों द्वारा मीटिंग के ब्यौरे को मंजूर किए जाने से पहले क्या अनिल चमड़िया की नियुक्ति निरस्त करने का आदेश विश्वविद्यालय जारी कर सकता है?
सवाल 5: क्या ये विधि के विपरीत नहीं है? क्या ये एक्जिक्यूटिव कौंसिल को बाइपास करना नहीं है?
सवाल 6: एक्जिक्यूटिव कौंसिल की बैठक में मौजूद सदस्यों द्वारा मिनिट्स को मंजूर किए बगैर विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या अनिल चमड़िया को निकालने का फैसला कर दिया और उसे तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया?
सवाल 7: क्या विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में किसी तरह की हड़बड़ी में है? अगर हां तो इसकी वजह क्या है?
सवाल 8: प्रोफेसर चमड़िया की नियुक्ति का मामला जब सेलेक्शन कमेटी के सामने आया था तो क्या विश्वविद्यालय प्रशासन को उन मानकों की जानकारी नहीं थी, जिसके आधार पर प्रोफेसर की नियुक्ति होती है? ऐसी हालत में एक्जिक्यूटिव कौंसल के सामने क्या वाइस चांसलर ने अपनी गलती स्वीकार की?
सवाल 9: क्या ऐसी ही और गलतियां भी की गई हैं? क्या ऐसे सभी मामलों में वही फैसला किया गया जो अनिल चमड़िया के मामले में किया गया?
सवाल 10: क्या विश्वविद्यालय में उन मानदंडों के आधार पर कोई नियुक्ति नहीं हुई है, जिस आधार पर अनिल चमड़िया की नियुक्ति हुई है?
नीति और नैतिकता से इतर ये कुछ ऐसे सवाल है, जिनका जवाब दिया जाना चाहिए, ताकि अकादमिक जगत में शुचिता कायम हो और अकादमिक स्वायत्तता कोरा शब्द बनकर न रह जाए।
((वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल इन दिनों भारतीय जनसंचार संस्थान में पढ़ा रहे हैं))
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Dear Dilip Babu
Your writing flair is good but your ideology and thinking seems biased toward Dalit ideology..I know its been unfortunate to remove Mr.Anil from his post but responsible journalist like you should come out with some concrete mandates..sorry to say but you guyz are doing only litreary war over web..kindly do something constructive….