तो यह है स्टार न्यूज़ के धमाके का सच
लेखक: जनतंत्र डेस्क | January 8, 2010 | पहरेदार | 1 Comment
हम यह बता चुके हैं कि स्टार न्यूज़ ने साल के पहले सप्ताह ही एक बड़ा धमाका किया है। उसने टीआरपी की रेस में न केवल इंडिया टीवी बल्कि आज तक को भी पटक कर नंबर वन की कुर्सी हथिया ली है। वह भी चमत्कारिक उछाल के साथ। उसकी टीआरपी में 3.4 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। जहां कई बड़े चैनलों की कुल टीआरपी चार से नीचे हो वहां 3.4 अंकों की उछाल एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। लेकिन अब स्टार न्यूज़ के इस धमाके का एक और सच सुनिए। यह कारनामा तब हुआ है जब उसके सभी बड़े-छोटे अधिकारी मानेसर में ब्रेन स्ट्रॉमिंग कर रहे थे।
दरअसल, 2009 के आखिरी हफ़्ते में चैनल के सभी संपादक अपने चहेतों के साथ मानेसर में ब्रेन स्ट्रॉमिंग सेशन के लिए जमा हुए थे। तब तीन दिन तक दफ़्तर को मध्य क्रम और जूनियर स्तर के उन साथियों के भरोसे छोड़ दिया गया था जिन्हें किसी भी बैठक के काबिल नहीं समझा जाता। मानेसर में ये सभी दिग्गज चैनल को नंबर वन बनाने की रणनीति पर विचार कर रहे थे और इधर इनकी गैर मौजूदगी में चैनल नंबर वन बन गया। शायद यही वजह है कि इस चमत्कारिक उछाल के बावजूद स्टार न्यूज़ में कोई जश्न नहीं मना रहा। कोई हंगामा नहीं कर रहा।
आमतौर पर ऐसा देखने को नहीं मिलता। यहां तो चलन यह है कि कोई चैनल नंबर वन बना तो उसका ढोल पीटने लगता है। कुछ चैनल तो किसी न किसी सेगमेंट में खुद को नंबर वन घोषित करके ब्रांडिंग करते हैं। लेकिन स्टार न्यूज़ के अधिकारी इस बार खामोश हैं। वो कहें तो कैसे कहें कि उनकी गैर मौजूदगी में चैनल नंबर वन बना है।
टेलीविजन न्यूज़ एक टीम वर्क है। कोई भी जूनियर किसी न्यूज़ चैनल से जुड़ता है तो उसे बताया जाता है कि खुद से ऊपर टीम को समझो और बेहतर प्रदर्शन की कोशिश करो। कोई रिपोर्टर अच्छी स्टोरी करता है तो उसकी कामयाबी को अपनी कामयाबी समझो। उसे अच्छी तरह सजा कर चैनल पर पेश करो। लेकिन सत्ता के संघर्ष में लंबा सफ़र तय करते वक़्त बहुत से लोग यह सबक भूल जाते हैं। वो दूसरों की कामयाबी पर खुश होने की जगह कुंठित हो जाते हैं। यही वजह है कि स्टार न्यूज़ के कुछ “काबिल” लोग यह कहते फिर रहे हैं कि बहुत इतराओ मत अगले हफ़्ते सब बराबर हो जाएगा। जवाब में कुछ लोग चुटकी लेते हुए पुरानी कहावत दोहरा रहे हैं – ज़्यादा जोगिया मठ उजाड़।
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