गुप्त कैमरे ने गेम कर दिया… नारायण नारायण

बिल क्लिंटन की जितनी उम्र है उससे कहीं पहले से नारायण दत्त तिवारी राजनीति में हैं। कई बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। नये उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी बने। प्रधानमंत्री बनते बनते रह गए। आंध्र प्रदेश का गवर्नर पद उनके उसी गरिमामय राजनीतिक सफर का वो चरम था जहां पहुंच कर तिवारी सरीखा राजनेता राजनीति से संन्यास लेना चाहता है। उनका वानप्रस्थ ही चल रहा था कि अचानक उन्हें गृहस्थ जीवन की फिर याद सताने लगी। हरकारे बुलवाए और गुपचुप गुपचुप वो कर डाला जिसे सुन के बिल क्लिंटन क्या खजुराहो की मूर्तियां भी शर्मा जाएं। किसी को शैतानी सूझी होगी कि जो व्हाइट हाउस में नहीं देख पाया उसका सारा मज़ा उसने गवर्नर हाउस के प्राइवेट चैंबर के भीतर चल रही रासलीला को कैमरे में कैद कर के लिया। नारायण..नारायण..।

बस इसी की कसर बची थी। तिवारी जी पर तो ऐसे इल्जाम लगते रहे हैं। एक 30 साल का शख़्स तो उनको अपना बाप बनाते बनाते रह गया। मामला कोर्ट तक पहुंचा। लेकिन कोर्ट ने ये कह कर पेटिशन खारिज कर दी अब बहुत देर हो चुकी है। बालिग होते ही कोर्ट का दरवाजा खटखटाते तो बेहतर था। कोर्ट के फैसले से एन डी तिवारी ने राहत की सांस ली होगी। लेकिन अचानक एक दिन उनकी अश्लील तस्वीरें टीवी चैनल पर देखकर दर्शकों की सांसें जरूर थम गयीं। तिवारी जी बेनकाब हो चुके थे। अब कह रहे ‘आई वॉज फ्रेम्ड।’ सही कहा – आप गुप्त कैमरे के फ्रेम में आ गए।

कैमरा प्रोफेशनल रहा होगा जो कमरे की बारीकियों को साफ साफ पकड़ लिया। आरोप लग रहे कि उत्तराखंड की एक महिला ने खदान का प्रोजेक्ट हथियाने के लिए तिवारी की कमजोरी का फायदा उठाना चाहा। अगर वो कैमरा अपना काम नहीं करता तो क्या खदानों का वो प्रोजेक्ट तिवारी उस महिला या उसके किसी सगे को बतौर रिटर्न गिफ़्ट दे देते। ये तो उससे कहीं ज्यादा बड़ा कॉम्प्रोमाइज होता जिस कॉम्प्रोमाइजिंग अवस्था में तिवारी उस वीडियो में दिखे। संवैधानिक पोस्ट पर रहते ये उस गरिमामय पद के साथ भद्दा मजाक होता। खैर, पद के साथ खिलवाड़ करके ही दम लिया तिवारी जी ने।

प्रभात शुंगलू

प्रभात शुंगलू

मोनिका लूइंसिकी कांड के बाद जब क्लिंटन भारत आए तो आईआईटी कानपुर के दीक्षांत समारोह में उन्हें जाना था। लेकिन कैम्पस में स्टूडेन्टस ने बवाल कर दिया। आईआईटी का कैम्पस पोस्टरों से पटा पड़ा था कि साइंस और इलेट्रौनिक्स के नाम पर क्लिंटन को बस ‘सिगारोट्रॉनिक्स’ आती है। वैसे तिवारी जी को क्लिंटन की परिणीति नहीं झेलनी पड़ी। धीरे से इस्तीफा देकर राजभवन से खिसक लिए। क्लिंटन की तर्ज पर उनका संसद में महाभियोग नहीं होगा। इस सेक्स स्कैन्डल के बाद क्लिंटन दोबारा राष्ट्रपति चुने गए लेकिन तिवारी जी को अब अपना जीवन कैमरों की चकाचौंध से दूर गुमनामी में जीने के लिये कमर कसनी होगी। पार्टी तो उनसे पल्ला झाड़ ही चुकी है। अब झाड़-पोंछ के राजनीतिक यात्रा की यादें बची हैं और उनमें तड़का डालने के लिये चंद वो पल जब वक़्त उन्हें कमज़ोर कर गया!

((वरिष्ठ पत्रकार प्रभात शुंगलू IBN 7 में एडिटर (स्पेशल असाइनमेंट) हैं))

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Comments

2 Responses to “गुप्त कैमरे ने गेम कर दिया… नारायण नारायण”
  1. नव वर्ष की मंगल कामनाएँ!

  2. SUNILPARBHAKAR says:

    Narayan Narayan hahahahahahaha prabhat g kya sixer mara hai . bahoot badia likha. oor parbhat g vastav mae yahi baat hai k nd tiwari agar akela nd tiwari hi hota oor apney ghar mae yae khel khel reha hota to aam jan kyu itni hai toba machata, abb wo governor ki kursi oor raj bhavan ki garima ko agar klank lagega to aam janta ka bhadkna jaej hi hai.
    yae sochiey k agar koi gori kanya hoti to yae khadan to kya poora state hi baech detey.
    uttharakhand walo abb apni ganga ki fikar kero