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	<title>Comments on: तो क्या अब दंगे नहीं होंगे?</title>
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	<description>Bol ke lab azaad hain tere</description>
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		<title>By: सुशांत झा</title>
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		<dc:creator>सुशांत झा</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Dec 2009 07:20:34 +0000</pubDate>
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		<description>इसे कहते हैं सियासत का शर्टकट...और कांग्रेसे तो इसमें सिद्धहस्त है। ये वैसा ही कुछ मामला है जैसे शहरीकरण की व्यापक योजना बनाने के वजाय धड़ाधड़ कच्ची कालनियों को नियमित कर दिया जाता है। अब सरकार भला आईपीएस में मुस्लिमों की भागीदारी तर्कसंगत स्तर तक क्यों लाने लगी-जबकि उसे पता है कि इस तरह के आरक्षण के लिए एक तो कोर्ट की इजाजत नहीं मिलेगी और अगर 50 फीसदी के अंदर आरक्षण दे भी दिया तो देशभर के पिछड़े- दलित नाराज हो जाएंगे। तो इसका एक ही सस्ता उपाय है कि कानून बना दो कि अकलियतों अगर दंगा हुआ तो ये कांग्रेस की सरकार बिना मोदी की इजाजत के ही सीआरपीएफ भेज देगी। मान लीजिए..कल को मोदी ही पीएम बन जाए तो क्या होगा? फिर तो वो सीआरपीएफ...राजपथ पर पैरेड करती हुई ही नजर आएगी। कुल मिलाकर ये बिल एक झुनझुना से कम नहीं जिसे सिर्फ सेक्यूलर सरकारे ही दिल्ली बजा पाएंगी-वो भी तब जब वे राजनीतिक रुप से अनूकूल हालत में हो। असली बात जो पुलिस सुधार की है उस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा। आयोगों की रपटे धूल फांक रही है कि देश में पुलिस व्यवस्था में सुधार किया जाए-जिस पर कोई नेता नहीं सोचता। सब सोचता है कि जब मैं सीएम बनूंगा तो फिर पुलिस को डंडा से कैसे हांक पाऊंगा। वक्त आ गया है कि चुनाव आयोग की तरह हरेक राज्या में पुलिस नियामक आयोग हो इसमें सीएम, विपक्ष का नेता, हाईकोर्ट के जज और कुछ बुद्दिजीवियों को शामिल किया जाए। इसके आलावे भी बहुत सारे पुलिस सुधार करने की जरुरत है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इसे कहते हैं सियासत का शर्टकट&#8230;और कांग्रेसे तो इसमें सिद्धहस्त है। ये वैसा ही कुछ मामला है जैसे शहरीकरण की व्यापक योजना बनाने के वजाय धड़ाधड़ कच्ची कालनियों को नियमित कर दिया जाता है। अब सरकार भला आईपीएस में मुस्लिमों की भागीदारी तर्कसंगत स्तर तक क्यों लाने लगी-जबकि उसे पता है कि इस तरह के आरक्षण के लिए एक तो कोर्ट की इजाजत नहीं मिलेगी और अगर 50 फीसदी के अंदर आरक्षण दे भी दिया तो देशभर के पिछड़े- दलित नाराज हो जाएंगे। तो इसका एक ही सस्ता उपाय है कि कानून बना दो कि अकलियतों अगर दंगा हुआ तो ये कांग्रेस की सरकार बिना मोदी की इजाजत के ही सीआरपीएफ भेज देगी। मान लीजिए..कल को मोदी ही पीएम बन जाए तो क्या होगा? फिर तो वो सीआरपीएफ&#8230;राजपथ पर पैरेड करती हुई ही नजर आएगी। कुल मिलाकर ये बिल एक झुनझुना से कम नहीं जिसे सिर्फ सेक्यूलर सरकारे ही दिल्ली बजा पाएंगी-वो भी तब जब वे राजनीतिक रुप से अनूकूल हालत में हो। असली बात जो पुलिस सुधार की है उस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा। आयोगों की रपटे धूल फांक रही है कि देश में पुलिस व्यवस्था में सुधार किया जाए-जिस पर कोई नेता नहीं सोचता। सब सोचता है कि जब मैं सीएम बनूंगा तो फिर पुलिस को डंडा से कैसे हांक पाऊंगा। वक्त आ गया है कि चुनाव आयोग की तरह हरेक राज्या में पुलिस नियामक आयोग हो इसमें सीएम, विपक्ष का नेता, हाईकोर्ट के जज और कुछ बुद्दिजीवियों को शामिल किया जाए। इसके आलावे भी बहुत सारे पुलिस सुधार करने की जरुरत है।</p>
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