मंदी से पहले और बाद में एनडीटीवी
लेखक: जनतंत्र डेस्क | December 9, 2009 | स्पेशल रिपोर्ट | Comments Off
दो साल से भी कम समय में एनडीटीवी की स्थिति में ज़मीन आसमान का अंतर आ चुका है। 2008 के मध्य तक एनडीटीवी का सफ़र लाजवाब था। 2008 की शुरुआत तो एनडीटीवी के लिए बहुत हसीन थी। सबकुछ उसके योजनाओं के मुताबिक हो रहा था। कंपनी दिन-रात तरक्की कर रही थी। लेकिन सात महीने के भीतर उसके कदम लड़खड़ा गए। 2009 तो बहुत बुरा बीता। एनडीटीवी की आर्थिक स्थिति इतनी ख़राब हो गई कि उसे अपने दो-दो चैनल बेचने पड़े। उन चैनलों में अपनी हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों के हवाले करना पड़ा है। ऐसा वक़्त किसी भी कंपनी के लिए आसान नहीं होता। लेकिन उम्मीद है कि यह मुश्किल दौर अब ख़त्म हो जाएगा।
एक नज़र बीते दो साल के घटनाचक्र पर –
4 जनवरी 2008 – एनडीटीवी के शेयर के भाव ने 512 रुपये के स्तर को तोड़ दिया। – ये वो दौर है जब एनडीटीवी और एनबीसी यू के बीच सौदे की बात अंतिम चरण में थी। मंदी की तमाम आशंका के बीच भी कंपनी के शेयरों की कीमत आसमान पर थी। जनवरी में ही कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को इस सौदे के अंतिम चरण में होने की जानकारी दी।
21 जनवरी 2008 – एनडीटीवी का मनोरंजन चैनल एनडीटीवी इमैजिन लॉन्च।
अप्रैल 2008 – 2007-2008 वित्तीय वर्ष के नतीजे घोषित। कंपनी को करीब 188 करोड़ रुपये का नुकसान।
26 मई 2008 – एनडीटीवी ने अपनी सब्सिडरी कंपनी एनडीटीवी नेटवर्क में अमेरिकी कंपनी एनबीसीयू को हिस्सेदार बनाया। 15 करोड़ डॉलर यानी तब के हिसाब से 639 करोड़ रुपये में एनडीटीवी ने एनडीटीवी नेटवर्क के 26 फीसदी शेयर बेच दिए। यह सौदा अपने आप में काफी बड़ा सौदा था। इस सौदे ने अगले कई महीनों तक शेयर बाज़ार में एनडीटीवी को कमज़ोर नहीं होने दिया। जहां एक के बाद एक सभी कंपनियों के शेयर धड़ाम से नीचे गिर रहे थे। एनडीटीवी का भाव बना हुआ था।
अगस्त 2008 – बाज़ार में एनडीटीवी के शेयरे के दाम तेजी से गिरने लगे।
अक्टूबर 2008 – शेयरों के भाव में दो तिहाई तक की गिरावट।
अक्टूबर 2008 – 2008-2009 वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में 407 करोड़ रुपये का फायदा (इसमें एनबीसीयू को हिस्सेदारी बेचने की वजह से मिले 639 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। अगर उन्हें निकाल दें तो कंपनी को 228 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।))
2 दिसंबर 2008 - शेयर के भाव ने 70 रुपये के स्तर को भी तोड़ दिया। कंपनी की आर्थिक स्थिति काफी ख़राब। मैनेजमेंट पर चौतरफा दवाब।
अप्रैल 2009 - 2008-2009 वित्तीय वर्ष के नतीजे – कंपनी को 119 करोड़ रुपये का फायदा। यहां भी आप एनबीसीयू से मिले 639 करोड़ रुपये को ध्यान में रखें। अगर उस पैसे को हटा दें तो कंपनी को 520 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
15 अक्टूबर 2009 – एनबीसी यूनिवर्सल ने एनडीटीवी से पीछा छुड़ाया। करीब एक तिहाई कीमत पर एनडीटीवी नेटवर्क के 26 फीसदी शेयर एनडीटीवी को वापस बेच कर इस रिश्ते को तोड़ लिया।
28 अक्टूबर 2009 – पहली छमाही के नतीजे घोषित। कंपनी को करीब 170 करोड़ रुपये का नुकसान।
20 नवंबर 2009 – एनडीटीवी ने अपने लाइफस्टाइल चैनल गुडटाइम्स की 69 फीसदी हिस्सेदारी विदेशी कंपनी स्क्रिप्स नेटवर्क को बेच दी। यह सौदा 253 करोड़ रुपये में हुआ।
8 दिसंबर 2009 – कंपनी ने एनडीटीवी इमैजिन में 76 फीसदी हिस्सेदारी अमेरिकी कंपनी टाइम वार्नर की सब्सिडरी टर्नर एशिया को बेच दी। यह सौदा करीब 546 करोड़ रुपये में हुआ।
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