जोशी जी के जातिवाद के बाद अमेरिकी रंगभेद पर नज़र
लेखक: जनतंत्र डेस्क | August 26, 2009 | देश-दुनिया | 6 Comments
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को नस्ली बताने वाले ग्लेन बेक के टेलीविजन शो से विज्ञापन कंपनियां किनारा कर रही हैं। जुलाई में न्यूज़ चैनल फॉक्स पर एक शो के दौरान ग्लेन बेक ने अमेरिका के पहले ब्लैक राष्ट्रपति बराक ओबामा को नस्ली करार दिया था। ग्लेन बेक ने कहा था – “ये शख़्स (ओबामा), मेरे हिसाब से नस्ली है”। ग्लेन ने यह भी कहा था कि ओबामा के दिल में “कहीं गहरे गोरे लोगों को प्रति नफ़रत भरी हुई है”।
ग्लेन ने फॉक्स पर एक शो के दौरान अपनी राय दी। उसके बाद मीडिया में काफी हंगामा मचा। फॉक्स ने अपनी सफाई दी। कहा कि उस शो में ग्लेन चैनल के प्रतिनिधि के तौर पर नहीं बल्कि एक जानकार के दौर पर आए थे और वो उनकी निजी राय है। इससे चैनल का कोई लेना-देना नहीं है। Read more
वीओआई में हड़ताल ख़त्म
लेखक: जनतंत्र डेस्क | August 25, 2009 | हक़ की आवाज़ | Comments Off
वॉयस ऑफ इंडिया में कर्मचारियों की हड़ताल ख़त्म हो गई है। लेकिन अब भी दोनों गुटों के बीच सुलह नहीं हुई है। समूह संपादक किशोर मालवीय की अगुवाई में एक धड़ा जैन टीवी के स्टूडियो से ही प्रोग्राम चला रहा है। ऐसी उम्मीद है कि कल तक वो धड़ा भी नोएडा में वॉयस ऑफ इंडिया के दफ़्तर जाने लगेगा और चैनल का प्रसारण वहां से शुरू हो जाएगा।
वीओआई में शुक्रवार शाम से हड़ताल चल रही थी। कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला था। इसके अलावा भी कई मांगें थीं। जिन्हें लेकर उन्होंने प्रसारण बंद कर दिया। हड़ताली कर्मचारियों के मुताबिक अब मैनेजमेंट ने ज़्यादातर लोगों को दो महीने का वेतन दे दिया है और बाकी लोगों को भी अगले एक-दो दिन में वेतन मिल जाएगा। साथ ही मैनेजमेंट ने यह भरोसा भी दिलाया है कि अगले छह महीने तक किसी को नहीं निकाला जाएगा। जिसके बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी। Read more
जो हरिवंश जी को नहीं जानते, उनके लिए
लेखक: अविनाश दास | August 25, 2009 | ब्लॉग, स्पेशल रिपोर्ट | 12 Comments
आदरणीय मॉडरेटर,
मैं आपकी थोड़े दिनों में मशहूर हो गयी वेबसाइट पर लगातार तथागत के लिखे को पढ़ रहा हूं। उनकी राइटिंग इस बात की ओर इशारा करती है कि वे मीडिया के प्रबुद्ध नागरिक हैं – लेकिन उनकी चेतना एकांगी है और ये भी तय है कि वे समग्रता में हमारे दौर को देखने से परहेज़ कर रहे हैं।
ख़ैर, प्रभात ख़बर और हरिवंश जी की बात बाद में। पहले मैं आपको एक ख़बर सुना रहा हूं। संजय यादव रांची में बरसों से पत्रकारिता कर रहे हैं। पहले टीवी और फिर अख़बार। मैं उन्हें व्यक्तिगत तौर पर जानता हूं। संजय जी के पास दुर्लभ ईमानदारी है, जिसकी हमारे समय में घनघोर कमी है। रांची से आठ किलोमीटर दूर टाटीसिल्वे में रहते हैं। वहां पानी की बेतरह परेशानी है। रोज़ दफ़्तर आने से पहले बाल्टी-बाल्टी पानी ढोकर घर वालों की मदद करते हैं। इस एक जिक्र से आप ये न समझें कि उनकी माली हालत ठीक नहीं है। दरअसल वे कर्मठ स्वभाव के शख्स हैं और जहां तक मैंने उनको वॉच किया है, श्रमदान उनका प्रिय प्रसंग है। Read more
“सहारा से जुड़ी वो ख़बर झूठी है, आप यकीन मत कीजिएगा”
लेखक: जनतंत्र डेस्क | August 25, 2009 | हक़ की आवाज़ | 3 Comments
झूठी और ग़लत ख़बरों के बहुत बड़े ख़तरे होते हैं। एक ग़लत ख़बर किसी की नौकरी छीन सकती है। किसी को बर्बाद कर सकती है। इसलिए किसी को भी यह हक़ नहीं दिया जा सकता है कि वो ग़लत ख़बर देकर दूसरों की रोजी रोटी के साथ खिलवाड़ करे। फिर यहां तो बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी का सवाल है। बात हो रही है सहारा समय की। आज सुबह भड़ास4मीडिया पर ख़बर छपी कि सहारा के कर्मचारियों ने अपना संगठन बना लिया है। इस ख़बर के बाद दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश के कई ब्यूरो में सहारा के कर्मचारियों से बात की गई। उन कर्मचारियों से भी जिनकी रोजी रोटी ख़तरे में है। उन सभी ने यही कहा कि सहारा में संगठन बनाने की मनाही है, फिर “हम ऐसे समय में संगठन क्यों बनाएंगे जब मैनेजमेंट ने हमारी मांगों पर संवेदनशीलता से विचार करने का भरोसा दिया है।” Read more
जिसकी जितनी जातीय औकात, उतना उसका प्राप्य
लेखक: रंगनाथ सिंह | August 25, 2009 | स्पेशल रिपोर्ट | 13 Comments

“……..अपने यहां मुसलमान कौन हुए? मुसलमान वो हुए, जो हाथ से काम करने वाले लोग थे. जुलाहे, लोहार, कुम्हार जो-जो भी हाथ से काम करने वाले लोग थे और जिनको आप के समाज में इज्जत की नजर से नहीं देखा जाता था, वो लोग मुसलमान हुए. वे स्वाभाविक रूप से हाथ को, उंगलियों को हैंडल करने वाले लोग थे. उनकी स्किल हमसे और आप से बेहतर है क्योंकि वो हाथ से ही काम करने वाले लोग थे. हम दिमाग से काम करने वाले लोग है….” - प्रभाष जोशी Read more
बीजेपी पर एंकर-रिपोर्टर की जुगलबंदी, मेहमानों की तान
पहले जसवंत सिंह और अब अरुण शौरी। इन दोनों ने न्यूज़ चैनलों को बैठे बिठाए बहुत बड़ा मुद्दा दे दिया है। सबकी चिंता है कि बीजेपी किस दिशा में जा रही है। चिंता इस बात की भी है कि जसवंत सिंह की विदाई तो हो गई अब अरुण शौरी का क्या होगा? इन सबके बीच आरएसएस आखिर कर क्या रहा है? इन सवालों की पड़ताल न्यूज़ चैनलों में कैसे हो रही है उसके दो नमूने पढ़िए। इनमें किसी का नाम नहीं लिखा गया है क्योंकि यहां नाम महत्वपूर्ण नहीं हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट कर देना सही होगा कि यहां पर सिर्फ भाव दर्ज हैं। शब्दश: लिखना मुमकिन नहीं हो सका।
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ब्राह्मणवाद पर बहस कीजिए, बहस की हत्या नहीं
लेखक: रंगनाथ सिंह | August 24, 2009 | स्पेशल रिपोर्ट | 21 Comments
संजय जी आपने बहस को ज्यादा ठोस जमीन पर खड़ा किया है। लेकिन इसके बाद भी चार्वाक का कथन हमारे माथे पर लकीरें ले ही आता है। क्योंकि उसमें सच्चाई है। इन नए आंकड़ों के आने के बाद ब्राह्मणवाद किन चीजों से समझौता करके अपनी सत्ता बचाए रखने में सफल रहा है इसकी भी पड़ताल की जा सकती है। जैसे कोई ठाकुर किसी बड़े प्रसिद्ध व्यक्ति का बेटा हो। या कोई दलित किसी दलित नेता का बेटा हो या कोई महिला किसी की रिश्तेदार हो। ऐसे तमाम कारणों पर विचार करना जरूरी है। जिस तरह से मायावती का पैर छूने से कोई ब्राह्मण अपने गांव के दलितों को सम्मान देने वाला नहीं बन जाता उसी रह किसी खास कारण से नाम गिनानेभर की भर्तियों से कोई पाक-साफ नहीं हो जाता। इन कारणों को ध्यान में रखते हुए इस सूची का विश्लेषण करना होगा।
वीओआई में हड़ताल जारी, मैनेजमेंट पर धमकाने का आरोप
लेखक: जनतंत्र डेस्क | August 24, 2009 | बड़ी ख़बर, हक़ की आवाज़ | 1 Comment
हड़ताल का चौथा दिन
वॉयस ऑफ इंडिया में कर्मचारियों की हड़ताल का चौथा दिन है। वहां लोग अब भी धरने पर बैठे हुए हैं और अपने जायज हक़ की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मैनेजमेंट ने अभी तक उनकी मांगों पर अमल नहीं किया है। जून की तनख्वाह भी सभी कर्मचारियों को नहीं दी गई है। धरने पर बैठे कर्मचारियों का यह भी कहना है कि “जो भी यह कह रहे हैं कि समझौता हो गया है वो झूठ बोल रहे हैं और मैनेजमेंट के हाथों में खेल रहे हैं।”
वीओआई त्रिवेणी ग्रुप का चैनल है और पिछले शुक्रवार से वहां पर हड़ताल चल रही है। वहां कर्मचारियों को मई के बाद से तनख्वाह नहीं मिली थी। सैकड़ों की संख्या में लोग सिर्फ़ उम्मीद के सहारे काम में जुटे थे। लेकिन शुक्रवार को वो उम्मीद की डोर खुद मैनेजमेंट के लोगों ने तोड़ दी। सूत्रों के मुताबिक जब कुछ कर्मचारियों ने नए सीईओ अमित सिन्हा से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि वो मुंबई में हैं और अभी उनकी मदद करने की स्थिति में नहीं हैं। गौरतलब है कि त्रिवेणी ग्रुप ने जून में अमित सिन्हा को कंपनी का सीईओ और डायरेक्टर नियुक्त किया था। Read more
“जन”सत्ता में प्रभाष जी की “ब्राह्मण”सत्ता
लेखक: चार्वाक सत्य | August 24, 2009 | स्पेशल रिपोर्ट | 9 Comments
जनसत्ता के पहले संपादक प्रभाष जोशी को लगभग ढाई दशक पहले जब पत्रकारों की टीम बनाने का पहला मौका मिलता है तो कुछ ऐसी टीम बनती है। ये है जनसत्ता की शुरुआती टीम के टॉप 15 प्लेयर:-
1. प्रभाष जोशी (संपादक)
2. गोपाल मिश्र (न्यूज एडिटर)
3. श्याम आचार्य (दूसरे न्यूज एडिटर)
4. अच्युतानंद मिश्र (तीसरे न्यूज एडिटर)
5. हरिशंकर व्यास (असिस्टेंट एडिटर)
6. सतीश झा (असिस्टेंट एडिटर)
7. बनवारी (असिस्टेंट एडिटर)
8. मंगलेश डबराल (रविवारी के इंचार्ज)
9. ब्रजेंद्र पांडे (खेल डेस्क के इंचार्ज)
10. उमेश जोशी (बिजनेस डेस्क के इंचार्ज)
11. सत्यप्रकाश त्रिपाठी (डेस्क के इंचार्ज)
12. परमानंद पांडे ( डेस्क के इंचार्ज)
13. देवप्रिय अवस्थी (डेस्क इंचार्ज)
14. श्रीश मिश्र (डेस्क इंचार्ज)
15. जगदीश उपासने (डेस्क इंचार्ज)
गैर-सवर्ण अस्मिताओं के लिए प्रभात ख़बर में जगह नहीं
लेखक: तथागत | August 24, 2009 | ब्लॉग | 11 Comments

हरिवंश, संपादक, प्रभात ख़बर




